Cello World: अपने जीवन में प्रदीप राठोड़ (Pradeep Rathod) को बहुत जल्दी ही एक ऐसी सफलता मिली है, जिससे वे सिर्फ मारवाड़ और मारवाड़ियों के ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय उद्योग जगत के हीरो बन गए हैं। हालांकि, भारतीय उद्योग जगत में कुछ गिने चुने नाम ही ऐसे हैं, जो बहुत तेजी से सफल रहे हैं। लेकिन प्रदीप राठोड़ केवल ‘सेलो वर्ल्ड’ (Cello World) के अपने कारोबार के विकास और विस्तार से नहीं, बल्कि अपने जीवन की उच्चता, व्यक्तित्व की विराटता, और मूल्यों से भी पहचान बनातेने के साथ साथ सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण की भावना से भी जाने जाते हैं। ‘सेलो’ (Cello) के मुखिया प्रदीप राठोड़ उद्यम जगत के उस आधुनिक चेहरे का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें परंपरा और विरासत की जड़ें भी गहरी हैं और भविष्य की दृष्टि भी स्पष्ट, मातृभूमि के प्रति समामान का भाव भी है, तो अपने इलाके व लोगों के विकास में सहयोग के कदम भी।
मारवाड़ की मिट्टी से निखरी अंतरराष्ट्रीय चमक
दरअसल, प्रदीप राठोड़ केवल एक उद्योगपति नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की उद्यमशील आत्मा के प्रतीक हैं। उनकी दूरदर्शिता, व्यावहारिकता, शालीनता और सामाजिक प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट बनाती है। मारवाड़ की मिट्टी से जुड़ा यह व्यक्तित्व आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमक रहा है, लेकिन उसकी जड़ों में वही सादगी, वही अपनापन और वही संस्कार बसे हुए हैं, जो उन्हें गोड़वाड़ की धरती से मिले हैं। परंपरा और आधुनिकता के साथ यही समन्वय उन्हें एक सफल व्यवसायी के साथ-साथ एक संवेदनशील समाजिक नेतृत्व के रूप में भी शिखर पर बिठाए हुए है।

पिता की विरासत को आगे बढ़ाने में सफल
गोड़वाड़ के जाने माने समाजसेवी, उद्योगपति और दिल से बेहद दिलदार व्यक्तित्व के रूप में प्रतिष्ठित ‘सेलो वर्ल्ड’ ग्रुप के संस्थापक घीसूलाल बदामिया ने प्लास्टिक उत्पादों से अपने कंपनी को शुरू करके किचन-वेयर, फर्नीचर और स्टेशनरी तक से भी आगे भवन निर्माण में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। बाद में यह उद्म अगली पीढ़ी ने सम्हाला, और आज जो हम ‘सेलो वर्ल्ड’ वर्ल्ड’ का यह विस्तार देख रहे हैं, वह केवल व्यावसायिक रणनीति का परिणाम नहीं, बल्कि दूरदर्शिता सहित सबके साथ मिलजुल कर रहने का प्रमाण भी है। अपने पिता घीसूलाल बदामिया के मार्गदर्शन में प्रदीप राठोड़ ने बदलते बाजार की नब्ज को समझा। उन्होंने नई तकनीक को अपनाया, उत्पादन प्रक्रिया को आधुनिक बनाया और ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाए। उनकी सोच पारंपरिक मारवाड़ी व्यावसायिक सूझबूझ और वैश्विक दृष्टिकोण का संगम है। वे मानते हैं कि आज के दौर में केवल लाभ कमाना पर्याप्त नहीं, बल्कि गुणवत्ता, नवाचार और उपभोक्ता विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। यही कारण है कि ‘सेलो वर्ल्ड’ ब्रांड ने भारत के घर – घर में अपनी स्थायी जगह बनाई है।
सफलता के शिखर पर भी जड़ों से जुड़ाव
प्रदीप राठोड़ का सामंजस्य भरा व्यक्तित्व उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। वे जमीन से जुड़े उद्योगपति माने जाते हैं। कर्मचारियों से संवाद, साझेदारों के प्रति सम्मान और ग्राहकों के प्रति संवेदनशीलता, तो खैर कारोबार में बेहद जरूरी है, लेकिन इस सबके साथ समाज से जुड़ाव, जरूरतमंद सामाजिक लोगों के प्रति संवेदनशीलता तथा सामाजिक मुद्दों पर दूरगामी सोच जैसे गुण उन्हें अलग पहचान देते हैं। उनका व्यवहार सादगीपूर्ण और शालीनतो से भरा है। सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी वे अपनी जड़ों से कटे नहीं। वे निर्णय लेते समय केवल आंकड़ों को नहीं, बल्कि मानवीय पक्ष को ज्यादा महत्व देते हैं। यही व्यावहारिकता उन्हें एक सफल उद्यमी के साथ-साथ प्रेरक नेतृत्वकर्ता बनाती है। आधुनिक उत्पादन पद्धतियों के साथ-साथ गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन प्रदीप राठोड़ के जीवन प्रबंधन का प्रमुख हिस्सा है।

मातृभूमि की सेवा में जल संरक्षण और रोजगार
कोई भी उद्यमिता केवल उद्योग के विसकास तक सीमित नहीं रहती, उसका सामाजिक प्रभाव भी होता है। प्रदीप राठोड़ इस तथ्य को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने अपने व्यापार को केवल मुनाफे का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के विकास का साधन बनाया। गोड़वाड़ के लोगों के लिए रोजगार सृजन, कौशल विकास और वहां के स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कुछ विशिष्ट पहलों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। अपनी मातृभूमि के प्रति लगाव और जुड़ाव के कारण ही फालना में ‘सेलो वर्ल्ड’ का विशाल थर्मोवेयर प्लांट स्थापित किया है, जिससे गोड़वाड़ के युवा वर्ग को रोजगार के अवसर मिलेंगे। वे मानते हैं कि उद्योग का वास्तविक अर्थ तभी है, जब उससे समाज के विभिन्न वर्गों को लाभ पहुंचे। उनकी सोच में पर्यावरण और स्थायी विकास भी शामिल है। इसी कारण उन्होंने गोड़वाड़ इलाके के पुराने तालाबों, एनीकटों, व जल संसाधनों के विकास का काम हाथ में लिया, तो हर साल गर्मी के झुलसते सीजन में गोड़वाड़ के पशुधन को बचाने के लिए हजारों टन चारे का प्रबंधन भी करते रहे हैं।
विश्वास की परंपरा ही सेलो की उद्यमिता का आधार
भले ही कारोबार की दुनिया ‘सेलो वर्ल्ड’ ब्रांड को देश-विदेश तक ले गई, लेकिन प्रदीप राठोड़ का हृदय मारवाड़ से गहरे जुड़ा हुआ है। मारवाड़ी संस्कृति, परंपरा और भाषा के प्रति उनका सम्मान स्पष्ट दिखाई देता है। वे अक्सर कहते हैं कि गोड़वाड़ ने उन्हें संघर्ष, संयम और साहस सिखाया। यही सामाजिक मूल्य उनके व्यवसाय में भी झलकते हैं। मारवाड़ी समाज में सहयोग और विश्वास की जो परंपरा है, उसे वे अपनी उद्यमिता का आधार मानते हैं। सादड़ी सम्मेलन और ऐसे ही अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि वे बिल्कुल अपने पिता घीसूलाल बदामिया की तरह ही अपनी जड़ों को सहेजकर आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं। उनके लिए सफलता का अर्थ केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र और समाज का गौरव बढ़ाना है।

सफलता सिर्फ पूंजी से नहीं, सामाजिक दायित्व से
आज जब उद्यमिता तेजी से बदल रही है, प्रदीप राठोड़ का जिंदगी कमें सफलता का मॉडल प्रेरणादायक माना जा रहा है। उन्होंने दिखाया कि पारिवारिक व्यवसाय को आधुनिक कॉरपोरेट संरचना में ढालते हुए भी मूल्यों को बचाया जा सकता है, कैसे समाज के साथ जुड़े रहकर समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है तथा कैसे सामाजिक – व्यावसायिक संस्थाओं के साथ काम करते हुए स्वयं की मौलिकता को बचाए रखा जा सकता है। जैन समाज की वैश्विक संस्था ‘जीतो’ के मुखिया के तौर पर उनकी वैश्विक सोच को जमाने ने देखा है, और गोड़वाड़ सहित समूचे भारत का युवा वर्ग उनको सफलता के संवाहक के तौर प्रेरणा के रूप में पाता है। उम्र के लिहाज से अभी तो प्रदीप राठोड़ बहुत जवान हैं, फिर भी उनके जीवन का हर काम यह संदेश देता है कि सफलता केवल पूंजी से नहीं, बल्कि दृष्टि, व्यवहार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व से मिलती है। वे नई पीढ़ी के उद्यमियों के लिए उदाहरण हैं कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भी भारतीयता और स्थानीयता को आत्मसम्मान के साथ जिया जा सकता है।
उद्यमिता के शिखर की राह पर प्रदीप राठोड़
प्रदीप राठोड़ आज युवा पीढ़ी के हीरो हैं, जैन समाज में कईयों से बहुत आगे हैं, गोड़वाड़ के अग्रणी हैं, मारवाड़ के अगुआ हैं, राजस्थान के चहेते हैं, और देश भर में वे उद्यमिता के शिखर की राह पर हैं। ऐसे में, प्रदीप राठोड़ की शिखर की दावेदारी पर किसी को ऐतराज भी नही करना चाहिए और ना सिर्फ किसी राजवंश की तरह पीढ़ी दर पीढ़ी पाट बिठाने की परंपरा की तर्ज पर उन्हें सिर्फ इसलिए घीसूलाल बदामिया का उत्तराधिकारी मान लेने की बात की नहीं की जानी चाहिए, बल्कि कि वे गोड़वाड़ की उस विराट सामाजिक परंपरा वाले वंश के वारिस हैं, जिसने देश को अब तक का सबसे तेज दूरदर्शी उद्यमी दिया हैं।
-निरंजन परिहार (राजनीतिक विश्लेषक)

