Rajasthan Budget: राजस्थान सरकार ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट (Budget) पेश किया, जो कुल 6.11 लाख करोड़ रुपये का है। उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी (Diya Kumari) ने इसे विकासोन्मुख बताते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर, युवा, किसान और गरीब कल्याण पर फोकस करने की बात कही। वित्त मंत्री ने राजस्थान (Rajasthan) विधानसभा में 11 फरवरी 2026 को पेश अपने बजट संबोधन में कहा कि बीजेपी (BJP) सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को सुधारने की दिशा में निरंतर काम किया है। बजट को कांग्रेस (Congress) ने खोखला और सतही करार देते हुए आरोप लगाया कि इसमें स्कूलों की मरम्मत, सिंचाई तथा रोजगार जैसे कई क्षेत्रों के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।
बजट प्रस्तावों में राजस्थान के विकास का ढांचा
राजस्थान की भजनलाल सरकार ने अपने बजट प्रस्तावों में बजट का आकार 6 लाख 10 हजार 956 करोड़ रुपये रखा है, जिसमें राजस्व प्राप्तियां 3.25 लाख करोड़ और व्यय 3.50 लाख करोड़ अनुमानित हैं, जबकि राजस्व घाटा 24,313 करोड़ रुपये रहेगा। सरकार ने इस बार राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने और विकसित भारत – 2047 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी ने बजट प्रस्तुत करते हुए व्यापार, शिक्षा और बुनियादी ढांचे को मुख्य फोकस बनाने की बात कही और कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और प्रधानमंत्री के `मजबूत आधारभूत संरचना` के मंत्र को अपनाते हुए काम किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के मजबूत बुनियादी ढांचे को सुनिश्चित करने के मूल मंत्र को बजट का आधार बताया। दीया कुमारी के अनुसार, बजट में, इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण और नवीनीकरण कार्यों के लिए भी अलग से 500 करोड़ रुपये का भारी प्रावधान रखा गया है। सरकार की मुख्य प्राथमिकताएं सड़कें, पुल, जल आपूर्ति पर 1800 करोड़ से अधिक, ऊर्जा, युवा रोजगार में 30,000 युवाओं को 10 लाख तक ब्याज मुक्त ऋण, और शिक्षा के मामले में स्कूल मरम्मत पर 550 करोड़ का प्रावधान किया गया हैं। पूंजीगत व्यय पर 1 लाख करोड़ का प्रावधान बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा।

सत्ता पक्ष ने मोदीजी के विजन-2047 का बजट बताया
सरकार पक्ष ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए 2047 के विजन से जोड़ा, सीएम भजनलाल शर्मा ने समावेशी विकास का दावा किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान का समग्र और सर्वांगीण विकास ही हमारी सरकार का एकमात्र लक्ष्य और संकल्प है। वर्ष 2026-27 के बजट का आकार 6 लाख 10 हजार 956 करोड़ रुपये है, जो वर्ष 2023-24 के बजट की तुलना में 41 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष और राज्यसबा सांसद मदन राठोड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के के नेतृत्व में वित्त मंत्री श्रीमती दीया कुमारी द्वारा प्रस्तुत यह बजट आमजन, किसान, युवा, महिला, कर्मचारी, व्यापारी और उद्योग जगत सभी वर्गों की अपेक्षाओं पर खरा उतरता है। राठोड़ ने बजट में आधारभूत ढांचे के विस्तार, ग्रामीण विकास, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ सतीश पूनिया ने कहा कि राजस्थान की भजनलाल सरकार के बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के के ‘विकसित भारत – 2047’ के विजन की झलक साफ तौर पर दिखाई देती है।

गहलोत बोले – बजट प्रदेश की जनता के भविष्य पर चिंता
राजस्थान में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इस बजट को खोखला और सतही करार दिया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि यह बजट न सिर्फ निराशाजनक है बल्कि प्रदेश की जनता में भविष्य को लेकर चिंताएं पैदा करने वाला है। भाजपा सरकार के बजट में कोई घोषणा ऐसी नहीं है जिसे व्यापक जनहित में कहा जा सके। समाज का हर वर्ग इस बजट को देखकर हताश होगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने स्कूल मरम्मत, सिंचाई-रोजगार के मामले में उपेक्षा का आरोप लगाया, जबकि पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने इसे डबल इंजन की सरकार का डबल झटका बताया। पायलट ने कहा कि राजस्थान का बजट हर बार की तरह इस बार भी कागजों तक सिमटी हुई घोषणाओं का ही पुलिंदा है। बजट को लेकर हर वर्ग को उम्मीद थी, लेकिन वह भी निराशा में ही तब्दील हो गई। पायलट ने कहा कि निवेश प्रोत्साहन के नाम पर सरकार ने सिर्फ प्रचार किया है, परंतु ज़मीनी स्तर पर निवेश होता दिख नहीं रहा है। विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा की अनदेखी को सरकार नकार नहीं सकती है।
भजनलाल सरकार के बजट की गहलोत सरकार से तुलना
राजस्थान की जनता और राजनीतिक विश्लेषक वर्तमान भाजपा सरकार के इस 6.11 लाख करोड़ के बजट को गहलोत काल के अंतिम बजट से बड़ा मान रहे, जहां फोकस सब्सिडी और मुफ्त योजनाओं पर था, जबकि यह इंफ्रा-रोजगार प्रधान है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जहां गहलोत का बजट सीधे तौर पर जनता को नकद या वस्तु लाभ जैसे मोबाइल, किट पहुंचाने पर केंद्रित था, वहीं वर्तमान बजट दीर्घकालिक ढांचागत विकास और स्वरोजगार पर अधिक जोर दे रहा है। वैसे लोग चाहते हैं कि उनको सीधा लाभ मिले, लेकिन सरकार की भी अपनी प्राथमिकताएं हैं, जिनके तहत हर बार सीधे लाभ देना सही नहीं रहेगा।
-राकेश दुबे
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