US Iran War: पूरा मिडिल ईस्ट युद्ध के साये में खड़ा है। ईरान (Iran) पर इजरायल (Israel) और अमेरिका (USA) के हमले के बाद हालात गंभीर हैं। ईरान ने कुवैत, दुबई, अबू धाबी, बहरीन, कतर, इराक, सऊदी अरब, जॉर्डन समेत अन्य मिडिल ईस्ट (Middle East) देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मसाइलें दागी हैं। ये हमले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल की दो दिन की यात्रा से लौटने के तुरंत बाद हुए हैं। भारत सरकार ने एक एडवाइजरी जारी करके अत्यावश्यक कारण के बिना इन देशों की यात्रा न करने की सलाह दी है। भारतीय विमान सेवाओं, एअर इंडिया एक्सप्रेस और इंडिगो एयरलाइंस ने खाड़ी देशों के लिए अपनी सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। अमेरिका-इसराइल की ओर से ईरान पर किए गए इन हमलों का कई मायनों में असर होगा। जन सामान्य के मन में इसे विश्व युद्ध (World War) के डर के रूप में देखा जा रहा है। मिडल ईस्ट के केई देशों ने अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं।

एयर इंडिया और इंडिगो की मिडल ईस्ट की सभी उड़ानें निलंबित
हालात की गंभारता को देखते हुए एयर इंडिया और इंडिगो ने पश्चिम एशिया के गंतव्यों के लिए सभी उड़ानें निलंबित कर दी हैं। भारत सरकार ने शनिवार को ईरान और इजराइल समेत खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर घरों में रहने की अपील की है। एयर इंडिया ने कहा कि वह उड़ान संचालन के लिए सुरक्षा और संरक्षा स्थिति का आकलन करना जारी रखेगी और आवश्यकतानुसार परिचालन में बदलाव करेगी। एयर इंडिया ने कहा कि यात्रियों को हर संभव सहायता दी जाएगी। इस बीच, इंडिगो ने भी मध्यरात्रि तक इस क्षेत्र में अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं। इंडिगो ने कहा कि उनकी टीमें लगातार बदलती स्थिति पर नज़र रख रही हैं और व्यवधान को यथासंभव कम करने के लिए परिचालन में बदलाव कर रही हैं। एयरलाइन ने यात्रियों को सलाह दी है कि यदि उनकी उड़ान प्रभावित होती है तो वे वैकल्पिक यात्रा विकल्पों की तलाश करें या पूर्ण धनवापसी का विकल्प चुनें।
अमेरिका – इज़राइल के संयुक्त हमले के जवाब में ईराना हमला
साल 2026, महीना फरवरी और तारीख 28। ईरान ने खाड़ी के कई देशों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों की एक लहर दागी, जिनमें बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत सहित अन्य क्षेत्रों में स्थित अमेरिकी और सहयोगी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के प्रतिशोध के रूप में की गई। ये मिसाइल हमला केवल एक सैन्य जवाब नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन की चुनौती, और वैश्विक ऊर्जा तथा सुरक्षा पर बड़ा प्रभाव डालने वाला मोड़ है, जो खाड़ी और विश्व पटल पर अस्थिरता को तेज करता है। अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले के कुछ ही घंटों के भीतर, ईरान ने जवाबी हमला किया। उसने इज़राइल पर मिसाइलें दागीं और बहरीन, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित पूरे क्षेत्र में विस्फोट देखे गए, जिन्हें कथित तौर पर ईरानी हमले बताया जा रहा है। ईरान से खाड़ी सागर के उस पार स्थित तेल और गैस से समृद्ध अरब देश अमेरिका के दीर्घकालिक सहयोगी हैं और कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी करते हैं।

समर्थन देने वाले देश भी निशाने पर, प्रतिशोध का कारण
तेहरान ने अपना हमला अमेरिका और इज़राइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त रूप से किए गए हवाई हमलों के जवाब में बताया, जिनका लक्ष्य ईरानी वरिष्ठ सैन्य और सरकार के ढांचे को कमजोर करना था, और कथित रूप से आतंकवादी नेटवर्क को समाप्त करना था। इन हमलों ने आम सुरक्षा की भावना को झकझोर दिया था। ईरानी नेतृत्व ने मिसाइल हमलों को शत्रु का निर्णायक परास्ति तक जारी रहने वाला ऑपरेशन बताया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि तेहरान केवल चिन्हित सैन्य टारगेटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समर्थन देने वाले देशों और उनके सैन्य गठजोड़ को भी जवाबदेह ठहराएगा।
खाड़ी के सहयोगी देशों और अमेरिकी सैन्य तंत्र की ताकत
ईरान ने मिसाइलें विशिष्ट रूप से उन देशों की ओर दागीं हैं जहाँ यूएस मिलिट्री बेस और सहयोगी ठिकाने हैं बहरीन (यूएस नेवी 5 फ्लीट), कतर (अल उदेद एयरबेस), यूएई, कुवैत आदि। लेकिन ये क्यों लक्ष्य पर हैं, क्योंकि ये देश अमेरिका और इज़राएल-लिंक्ड ऑपरेशनों का हिस्सा हैं। ईरान इन ठिकानों को प्रत्यक्ष रूप से उन सामरिक नेटवर्कों का हिस्सा मानता है जो उसके खिलाफ हमलों में सहायता करते हैं। इस हमले का उद्देश्य प्रतिशोध के साथ-साथ एक रणनीतिक संदेश देना था कि तेहरान अपने क्षेत्रीय सहयोगियों और यूएस नेटवर्क को निशाना बना सकता है।

आत्मरक्षा के लिए हर तरीके का हमला जारी रखेगा ईरान
ईरान चाहता है कि अमेरिका और उसके सहयोगी यह समझें कि यदि वे ईरान के अंदर सैन्य आक्रमण करते हैं, तो इसका सीधा जवाब उन गठजोड़ों और सैन्य नेटवर्क को दिया जाएगा जो तेहरान के खिलाफ सक्रिय हैं। ईरान ने साफ कहा है कि आत्मरक्षा के लिए सभी सैन्य तरीकों का इस्तेमाल करेगा.मिसाइल हमले ईरान का संकेत हैं कि वह सिर्फ प्रत्यक्ष हमलों का प्रतिशोध नहीं ले रहा, बल्कि व्यापक तौर पर अपनी सामरिक पहुंच का प्रदर्शन भी कर रहा है, ताकि सामरिक संतुलन में बदलाव आए। राष्ट्रीय सुरक्षा पर बल देने से घरेलू जनता में एकता और समर्थन को मजबूत करने की कोशिश भी की जाती है। इससे तेहरान के लिए आंतरिक राजनीतिक समर्थन भी स्थिर रहता है।
गहरा क्षेत्रीय खतरा, तेल का खतरा और भविष्य की दिशा
यदि तनाव और बढ़ता है, तो एक व्यापक मिडल ईस्ट में संघर्ष का जोखिम बना रहेगा, जिससे वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। कूटनीति और शांति प्रक्रियाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी, क्योंकि व्यापार, ऊर्जा और आर्थिक गतिविधियां लंबे समय से स्थिर और सुरक्षित रहने पर निर्भर हैं। कूटनीति और वैश्विक प्रतिक्रिया के तहत क्षेत्रीय नेताओं ने संयम, वार्ता और संकटों को कूटनीतिक रूप से सुलझाने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्ध के विस्तार को रोकने और डिप्लोमैटिक समाधान खोजने पर जोर दे रहे हैं।
-आकांक्षा कुमारी
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