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Home»देश-प्रदेश»Ashok Chavan Congress: आखिर क्यों बड़े बड़े नेता सबसे पुरानी पार्टी को छोड़ छोड़ कर निकल रहे हैं ?
देश-प्रदेश 7 Mins Read

Ashok Chavan Congress: आखिर क्यों बड़े बड़े नेता सबसे पुरानी पार्टी को छोड़ छोड़ कर निकल रहे हैं ?

Prime Time BharatBy Prime Time BharatFebruary 12, 2024No Comments
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Ashok Chavan Congress : कांग्रेस के लिए यह वक्त आत्म चिंतन का है, आत्म मंथन का है और अपनी हालत को फिर से संवारने का है। सवाल यह है कि आखिर कांग्रेस (Congress) को झटके पर झटके खाने क्यों पड़ रहे हैं। क्यों आखिर, उसके बेहद मजबूत नेताओं को भी कांग्रेस छोड़कर जाना पड़ रहा है। बारह फरवरी 2024 का दिन कांग्रेस के लिए एक और बहुत बड़े झटकेवाला रहा। महाराष्ट्र के दो बार मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक चव्हाण (Ashok Chavan) ने कांग्रेस को राम – राम कह दिया। अशोक चव्हाण के पिता शंकर राव चव्हाण भी दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे और केंद्र में वित्त, रक्षा और गृह मंत्री होने के साथ साथ वे इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के बेहद करीबी रहे। अशोक चव्हाण और शंकर राव चव्हाण दोनों इस प्रदेश की राजनीति में ऐसे पिता- पुत्र रहे हैं, जिन्होंने दोनों ने दो – दो बार कांग्रेस पार्टी से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का पद सम्हाला। शंकरराव चव्हाण तो खैर अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन अशोक चव्हाण जैसे ताकतवर मराठा नेता ने कांग्रेस से किनारा कर लिया है, तो इस पर कांग्रेस को गहराई से चिंतन करना चाहिए कि आखिर उसके नेता एक एक करके पार्टी छोड़कर क्यों जा रहा हैं।

Table of Contents

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  • कांग्रेस के लिए अपनी हालत पर आत्म मंथन करने की वक्त
  • दो साल में तीन दर्जन दिग्गज कांग्रेस से बाहर निकल गए
  • कांग्रेस के हाल पर क्या कहते हैं राजनीति के जानकार
  • क्यों छोड़ी दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक चव्हाण ने कांग्रेस
          • -राकेश दुबे (वरिष्ठ पत्रकार)

कांग्रेस के लिए अपनी हालत पर आत्म मंथन करने की वक्त

कांग्रेस की सियासत में सब कुछ ठीक – ठाक नहीं चल रहा। देश में लगातार कोई ना कोई कांग्रेस छोड़ रहा है। राहुल गांधी जब से अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर निकले हैं, कांग्रेस से निकलने वालों का सिलसिला ही चल पड़ा है। अशोक चव्हाण को महाराष्ट्र की राजनीति में कांग्रेस के स्तंभ के रूप में देखा जाता रहा है, और वे वास्तव में स्तंभ थे भी, लेकिन अब कांग्रेस का वह स्तंभ भी ढह गया। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते हैं कि राजनीति में किसी को भी सत्तालोलुप कह देना बहुत आसान है, लेकिन राजनीति में बने रहने के लिए सम्मान, संवाद और संबंधों के समीकरण को साधे रखना सबसे ज्यादा जरूरी होता हैं। कांग्रेस में यही नहीं हो रहा है, इसीलिए उसके अपने ही लोग उसे झटके दे रहे हैं। राजनीति अशोक चव्हाण को कांग्रेस के रसूखदार परिवार के बेटे के तौर पर विरासत में मिली थी। अशोक चव्हाण कांग्रेस के उस राजनीतिक वंश के वारिस हैं, जिसका महाराष्ट्र की सियासत पर दशकों तक बहुत ही गहरा असर रहा है। कांग्रेस के ज्ञात इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि दो बार मुख्यमंत्री और कई बार मंत्री रहे किसी नेता के दो बार मुख्यमंत्री रहे पुत्र ने पार्टी को तिलांजली दे दी हो।

RahulGandhi Congress PrimeTime
RahulGandhi_Congress_PrimeTime

दो साल में तीन दर्जन दिग्गज कांग्रेस से बाहर निकल गए

अशोक चव्हाण से पहले सप्ताह भर ही में कांग्रेस छोड़कर जाने वालों में महाराष्ट्र के पूर्व सांसद मिलिंद देवड़ा और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दिकी शामिल हैं। लेकिन चव्हाण, सिद्दिकी और देवड़ा व आचार्य प्रमोद कृष्णम के अलावा बीते कुछ समय में पार्टी से करीब तीन दर्जन बड़े नेताओं ने अपना नाता तोड़ा है। पंजाब के मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने से नाराज होकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस से नाता तोड़ा तो, दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद सहित पूर्व केंद्रीय मंत्रियों में कपिल सिब्बल और अश्विनी कुमार, आरपीएन सिंह, जितिन कुमार व ज्योतिरादित्य सिंधिया, गुजरात के कद्दावर रेबारी नेता सागरभाई रायका, गोवाभाई रेबारी और संजय रबारी सहित पाटीदार युवा नेता हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़, पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी के बेटे अनिल एंटनी, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और गांधी परिवार की करीबी माने जाने वाली सुष्मिता देव, राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल, हरियाणा के मजबूत जाधारवाले नेता कुलदीप बिश्नोई सहित तीन दर्जन से ज्यादा बड़े कांग्रेस नेता पार्टी छोड़कर निकल गए हैं। सबका एक जैसा आरोप है कि कांग्रेस आलाकमान द्वारा उनकी की जा रही अवहेलना असहनीय है, खासकर राहुल गांधी तो मिलने तक का समय भी नहीं देते।

कांग्रेस के हाल पर क्या कहते हैं राजनीति के जानकार

ज्यादातर नेताओं को राहुल गांधी का गैर राजनीतिक व्यवहार पसंद नहीं है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने को अनुशासनहीनता बताकर कांग्रेस से निष्काषित किए गए बेबाक बोलनेवाले नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम का कहना है कि वे केवल चार दिन की कोशिश में प्रधानमंत्री से मिल लिए, उन्होंने काफी सम्मान दिया, समय भी दगा व बात सुनी। लेकिन कांग्रेस में राहुल गांधी से चार महीने की मेहनत के बावजूद मिलना संभव नहीं होता और वे सुनते तो किसी की भी नहीं है। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते हैं कि कांग्रेस छोड़ने वाले ज्यादातर नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व और खासतौर पर राहुल गांधी पर सवाल खड़े किए हैं, ऐसे में राहुल गांधी के अपने राजनीतिक आचरण पर चिंतन करना चाहिए। परिहार कहते हैं कि दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद ने अपने इस्तीफा में लिखा था कि कांग्रेस में अब कुछ भी ठीक नहीं है, राहुल गांधी के आसपास अनुभवविहीन लोग हैं और पार्टी में अब न तो इच्छा शक्ति बची है और न ही काबिलियत। राजनीतिक विश्लेषक परिहार का कहना है कि राहुल गांधी कांग्रेस नेताओं को मिलने का समय नहीं देते हैं और कार्यकर्ताओं और नेताओं की बात नहीं सुनते, ज्यादातर कांग्रेस छोड़कर जानेवालों ने यही लिखा है। हालांकि इसके उलट वरिष्ठ राजनीतिक टिप्पणीकार शकील अक्तर कहते हैं कि जाने वाला क्या ले जाएगा? अपनी विश्वसनीयता खत्म करवा कर जाएगा। क्या राहुल गांधी की विश्वसनीयता में कोई कमी आई है? क्या तेजस्वी की प्रतिष्ठा में कोई कमी आई है? नहीं! खत्म हुए हैं नीतीश कुमार और जयंत चौधरी। जबकि कांग्रेस की धाराओं के जानकार वरिष्ठ पत्रकार संदीप सोनवलकर कहते हैं कि कांग्रेस में लगातार वरिष्ठ नेताओं को किनारे किया जा रहा है। लगभग सभी नेताओं ने इस्तीफा देते हुए राहुल गांधी पर ही सवाल खड़े किए थे। सोनवलकर कहते हैं कि राहुल गांधी की पूरी टीम ही कांग्रेस से निकल गई है, अकेले सचिन पायलट बचे हैं। फिर भी अगर राहुल गांधी इस पर चिंतन नहीं करते हैं, तो कांग्रेस को क्या भविष्य होगा, इसे समझा जा सकता हैं।

यह भी पढ़ेंः Congress: कांग्रेस को गांधी परिवार के बाहर अपना नेतृत्व तलाशने की किसने दी सलाह ?

यह भी पढ़ेंः Rahul Gandhi: आखिर क्यों कांग्रेस छोड़ कर भाग जाते हैं राहुल के दोस्त?

क्यों छोड़ी दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक चव्हाण ने कांग्रेस

मुंबई में 28 अक्टूबर 1958 को जन्मे अशोक चव्हाण सन 1987 में महज 29 साल की उम्र में ही लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद में पहुंच गए थे। वे दो बार लोकसभा सांसद, दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और तीन बार विधायक रहे। महाराष्ट्र में विलासराव देशमुख सरकार में वे उद्योग, खनन और सांस्कृतिक विभाग संभाल चुके हैं। नांदेड़ उनका चुनाव क्षेत्र है और यह इलाका अशोक चव्हाण का मजबूत गढ़ माना जाता है। इस इलाके में अशोक चव्हाण का राजनीतिक दबदबा इतजा मजबूत है कि वे सन 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद अशोक चव्हाण यहां से भारी बहुमत से चुनाव जीते थे। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरु करने वाले अशोक चव्हाण ने 1987 में नांदेड़ लोकसभा सीट से सांसद बने, 1992 में विधान परिषद के सदस्य और 1993 में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री बने। 1995 में फिर चार साल के लिए महाराष्ट्र कांग्रेस के महासचिव और 2003 में विलासराव देशमुख सरकार में मंत्री बने। कांग्रेस में लगातार 35 साल तक विभिन्न पदों पर रहना और पारिवारिक रूप से कांग्रेसी होने के बावजूद अशोक चव्हाण ने कांग्रेस से अपना नाता तोड़ा है, तो संभव है कि इसमें चूक अशोक चव्हाण की भी हो, लेकिन कांग्रेस को मंथन करना चाहिए कि आखिर ऐसा है क्या, जिसकी वजह से इतने बड़े और मजबूत लोग भी कांग्रेस को छोड़ छोड़कर जा रहे हैं।

-राकेश दुबे (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

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