Edinburgh: एडिनबर्ग… लिखने में, लेकिन बोलचाल में एडिनबरा। नाम दो, आत्मा एक। यह युनाइटेड किंगडम के स्कॉटलैंड की राजधानी है। शहर छोटा, मगर महत्व बड़ा। इतना बड़ा कि उसे देखने से पहले महसूस करना होता है। यह शहर निगाहों से नहीं, अहसास के रास्ते मन में उतरता है। धीरे-धीरे, बिना किसी शोर के। फिर हौले से आत्मा पर असर करने लगता है। पत्थरों में स्मृतियां सजी हैं। समय सड़कों पर सरकता सा लगता है, और जीवन यहां संवरता सा महसूस होता है। एडिनबरा (Edinburgh) की अंधियारी गलियों की हवाओं में इतिहास पसरा है, तो इतिहास के भूतों का साया डराता भी है।
संसार का दूसरा सबसे डरावना शहर, मगर अद्भुत भी
एडिनबरा में पेड़ हैं, पहाड़ हैं हरियाली है और समंदर की ठंडी सांसें भी। कुदरत जैसे यहां पर खुलकर मुस्कुराई हो। भूत भी इस शहर की सांसों में बसते हैं। इन्हीं भूतों की वजह से एडिनबरा दुनिया के डरावने शहरों में गिना जाता है। इतिहास यहां का खून से सना है। कई भीषण लड़ाइयां इसकी जमीन पर लड़ी गईं। हजारों लोग उन लड़ाइयों में मारे गए। प्लेग फैला, तो अंधविश्वास में लोगों को जिंदा जला दिया गया और हजारों लोग रहस्यमयी मौतों के शिकार भी हुए। एक विलुप्त ज्वालामुखी से बनी विशाल चट्टान पर ग्यारहवीं शताब्दी से खड़ा विराट एडिनबरा कैसल सदियों से यहां का प्रहरी है। राजसी वैभवशाली, मगर गंभीर और मौन। एडिनबरा कैसल सिर्फ इमारत नहीं, आत्मसम्मान के अनंत संघर्ष का इतिहास है और इतिहास में इसका ऊंचा माथा है। रॉयल माइल पर चलते हुए लगता है, जैसे अतीत कंधे से कंधा मिलाकर वर्तमान के साथ चल रहा हो।

अंधेरी गलियों और उजले इलाके में बंटा खूबसूरत एडिनबरा
दो हिस्सो में बंटा है यह शहर, पुराना और नया। दोनों के बीच संवाद चलता है। ओल्ड टाउन की अंधेरी, और तंग खड़ी सीढ़ियों वाली संकरी गलियों का चप्पा – चप्पा भूतों के किस्सों से भरा हैं। स्कॉटिश लोग उस हिस्से को ओल्ड रिकी या ओल्ड स्मोकी कहते हैं। अंधेरी, संकरी गलियां और तंग खड़ी सीढ़ियों को लोग डरावनी कहानियों का हिस्सा बनाते आए हैं। यहां की हवा और माहौल में भूतों के डर जैसा कुछ हैं। एक बहुत ही गहन अदृश्य ऊर्जा है। जो इस ऊर्जा को महसूस करते हैं। वे इसकी गहराई में गोते लगाकर इसके कल्पनालोक को चिंगारी देते हैं। न्यू टाउन में खुले विचार हैं। एडिनबरा सिर्फ खूबसूरत नहीं, समझदार भी है। यही कारण है कि यह एजुकेशन सिटी है। सन 1582 में स्कॉटलैंड के किंग जेम्स फोर्थ द्वारा स्थापित एडिनबरा यूनिवर्सिटी संसार के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में है। यहां के विश्वविद्यालय डिग्रियां नहीं, दृष्टि देते हैं। भारतीय छात्र इसीलिए यहां अपने सपने पढ़ते हैं, और सपनों को अनुशासन से जोड़ते हैं। यहां पढ़ाई रोज़गार की सीढ़ी नहीं, जीवन को समझने का सार है।

परायों से भी अपनत्व का नाता रखता है एडिनबरा
यह शहर विचारों की आज़ादी देने का विश्वास देता है। प्रश्न पूछने की छूट देता है और असहमति को सम्मान। शायद इसी वजह से एडिनबरा का समाज बहुत सभ्य है। संवेदनशील है और समावेशी भी। ऐसा समावेशी कि यह शहर किसी को भी पराया नहीं बनाता। यहीं से भारत और भारतीयों का एडिनबरा से रिश्ता और गहरा हो जाता है। भारत और एडिनबरा दोनों की आत्मा में बसी आत्मीयता की लंबी यात्रा है। यहां भारतीय प्रवासी नहीं। संस्कृति के दूत हैं। भारत मूल के डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और व्यापारी, सब इस शहर के ताने-बाने में घुल-मिल गए हैं। अपने बचपन से साथी अश्विन नागर जी एक मल्टी नेशनल कंपनी में बड़े अधिकारी के तौर पर एडिनबरा पहले ही पहुंच गए। एडिनबरा पहुंचने के मामले में अपने को पीछे छोड़ने वाले अश्विन भाई कहते हैं कि एडिनबरा ने उनके भीतर की भारतीयता को कभी संकोच नहीं कराया। यहां पर योग और घ्यान स्कॉटिश प्रजा को शरीर से ज्यादा मन को साधते हैं।

एक शहर नहीं, अनुभूतियों सा अद्भुत है एडिनबरा
एडिनबरा का सौंदर्य सिर्फ दृश्य नहीं। इस शहर का अपने अस्तित्व के सत्व को संजोकर रखने वाला रहा है। यहां बारिश उदासी नहीं लाती, मन को ठहराव देती है। यहां शाम धीमें – धीमे से उतरती है और रात खामोशी से उभरती है। यहां कला है, संगीत है और थिएटर भी है। इडिनबरा फेस्टिवल सिटी है, और उत्सवों की आत्मा का शहर है। यह शहर कल्पनाओं को संवरने का आकाश देता है। कला को स्थान और कलाकार को सम्मान। एडिनबरा हमारी मुंबई की तरह भागता नहीं है। दिल्ली की तरह डराता नहीं है। यह चमकता है, दमकता है और दिलों में खनकता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के नाते हमारे अश्विन नागर जी गणितीय अंकों के गठजोड़ को डीकोड करने की तकनीक जानते हैं, लेकिन एडिनबरा की आत्मा को भी उन्होंने डीकोड़ बेहतर किया है। इसीलिए उनका कहा सही है कि एडिनबरा एक शहर नहीं, एक अनुभूति है, इस शहर को जो समझ ले, वह इसे भूल नहीं सकता। एडिनबरा एक संवाद है मन और अमूर्त अहसास के बीच का, इसीलिए अचानक हम उसे चुपचाप अपनी यादों में बसा पाते है, यही एडिनबरा की असली तासीर है।
-निरंजन परिहार (राजनीतिक विश्लेषक)
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