Rajasthan News: राजस्थान के बाड़मेर और बालोतरा जिलों का नक्शा फिर बदल गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने बाड़मेर (Barmer) और बालोतरा (Balotra) जिलों की सीमा बदल दी है। 31 दिसंबर 2025 की रात जारी अधिसूचना के जारी होने पर, बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर खुशी जताई। बीजेपी (BJP) ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बतात् हुए सही ठहराया है। वहीं कांग्रेस (Congress) ने इसके विरोध में आंदोलन और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। राजस्थान (Rajasthan) के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार के इस फैसले को अतार्किक और जनविरोधी फैसला कहा है, तो पूर्व मंत्री हरीश चौधरी एवं हेमाराम चौधरी सहित सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। बीजेपी के किसी भी बड़े नेता ने इस पर खुलकर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है। राजनीति के जानकार इसीलिए इसे बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमा बदल को एक रणनीतिक फैसला बताते हैं, तो दोनों जिलों की प्रभावित जनता इस बात से परेशान है कि उनके लिए अब जिला मुख्यालय की दूरी बढ़ गई है। सीमावर्ती इन दोनों जिलों की सीमाएं बदले जाने पर बवाल मच गया है।

कांग्रेस नेताओं ने किया विरोध
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में बदलाव पर नाराजगी जाहिर की है। गहलोत का कहना है कि यह फैसला प्रशासनिक दृष्टि से पूरी तरह अतार्किक है। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा है कि पिछली सरकार ने प्रशासन को जनता तक पहुंचाने की मंशा से नए जिलों का गठन किया था। लेकिन बीजेपी सरकार केवल सियासी फायदे साधने में लगी हैष हमारी सरकार ने प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने की मंशा से नए जिले बनाए थे, लेकिन मौजूदा बीजेपी सरकार सियासी रोटियां सेकने में व्यस्त है। बायतु से कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने शायराना अंदाज में विरोध जताया। चौधरी ने कहा कि राजनीतिक मकसद से तहसीलों को तोड़ा, न डरूंगा, न झुकूंगा, अपने लोगों के साथ खड़ा हूं। गुड़ामालानी से पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हेमाराम चौधरी ने इस फैसले को जमीनी हकीकत और जनता की सुविधा के खिलाफ बताया। बाड़मेर से सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने इसे तुगलकी व्यवस्था” और जनविरोधी कहा, जो लोकतंत्र का उल्लंघन करने वाला फैसला बताया है।

सरकार का फैसला राजनीतिक
बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में बदलाव के मुख्य असर पर बात करते हुए राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते हैं कि सरकार के इस निर्णय के वास्तविक राजनीतिक कारण तलाशे जाने चाहिए। परिहार कहते हैं कि इस फैसले से राजनीतिक समीकरण प्रभावित होंगे, यह बदलाव लगभग 2.5 लाख मतदाताओं को प्रभावित कर रहा है और आने वाले चुनावी परिसीमन व राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकता है। वरिष्ठ पत्रकार हरिसिंह राजपुरोहित कहते हैं कि बायतू और गुढ़ामालानी जैसे विधानसभा क्षेत्रों की चुनावी गतिशीलता प्रभावित होगी, जिससे भविष्य में विधानसभा सीटों के परिसीमन पर असर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि इससे प्रशासनिक पहुंच और परिसीमन पर पड़ेगा, जिससे कुछ क्षेत्रों के लोगों को जिला मुख्यालय बालोतरा और बाड़मेर पहुंचने के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़ सकती है। लेकिन सरकार का यह फैसला राजनीतिक रूप से लिया गया है, ऐसा साफ लगता है।
अब जिला मुख्यलय ज्यादा दूर
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस का विरोध इसलिए है क्योंकि दोनों जिलों के कई गांवों के लोगों को अब प्रशासनिक काम के लिए जिला मुख्यालय जाने के लिए ज्यादा दूरी तय करनी पड़ेगी। इस निर्णय से गुड़ामालानी क्षेत्र की जनता के लिए जिला मुख्यालय की दूरी कम होने के बजाय और अधिक बढ़ गई है, जो आमजन के साथ सीधा अन्याय है। कुछ गांवों के लोगों को अब जिला-स्तरीय कार्यों के लिए लगभग 140 किलोमीटर दूर बालोतरा जाना होगा, जबकि पहले बाड़मेर पास पड़ता था। फिर, धोरीमन्ना और गुड़ामालानी का ऐतिहासिक और सामाजिक जुड़ाव बाड़मेर से रहा है, सरकार ने इसका ख्यल ही नहीं रखा। दूरी बढ़ने से इंधन का भी ज्यादा नुकसान होगा। जानकारों की राय में, यह निर्णय स्थानीय जनता की सहूलियत को ध्यान में रखकर नहीं लिया गया।

आखरी वक्त पर निकला आदेश
साल 2025 की आखरी रात में, 31 दिसंबर को दोनों जिलों की प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव की अधिसूचना जारी हुई। इसके मुताबिक, अब बालोतरा जिले में कुल 5 उपखंड, 9 तहसील और 5 उपतहसील होंगी। गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड बालोतरा जिले में होंगे, जबकि बायतू उपखंड को बाड़मेर जिले में शामिल किया गया है, मगर बायतू की 2 तहसील गिड़ा और पाटोदी को बालोतरा जिले में शामिल किया गया है। जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुई, तो कहीं खुशी का माहौल, तो कहीं नाराजगी भी देखने को मिली। क्योंकि 1 जनवरी 2026 से आगामी जनगणना के कारण प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव पर रोक लग गई है। अब यह नया नक्शा कम से कम मई 2027, तक जनगणना के पूरा होने तक प्रभावी रहेगा, क्योंकि सरकार इस जनगणना के बीच कोई नया संशोधन नहीं कर सकती। अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 7 अगस्त 2023 को बालोतरा को नया जिला बनाया गया था।
– आकांक्षा कुमारी
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