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Home»देश-प्रदेश»Rajasthan Politics: राजस्थान में फेरबदल संभव, 11 सीटों पर हार के झटके के बाद मुख्यमंत्री की पीएम मोदी व बड़े नेताओं से मुलाकात में संकेत
देश-प्रदेश 6 Mins Read

Rajasthan Politics: राजस्थान में फेरबदल संभव, 11 सीटों पर हार के झटके के बाद मुख्यमंत्री की पीएम मोदी व बड़े नेताओं से मुलाकात में संकेत

Prime Time BharatBy Prime Time BharatJune 18, 2024No Comments
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Rajasthan Politics: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajan Lal Sharma) एक ही दिन में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सहित अपनी पार्टी के कई बड़े नेताओं से मिल लिए हैं और ऐसा कतई संभव नहीं है कि इन मुलाकातों में लोकसभा चुनाव में राजस्थान (Rajasthan) की 25 में से 11 सीटों पर हार के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई हो। इस बार के चुनाव में जीत के मामले में बीजेपी (BJP) राजस्थान में लगभग झुलसी हुई है। अतः निश्चित तौर पर हार के कारणों पर भी चर्चा तो हुई ही होगी। दो – दो बार, 2014 और 2019 में लगातार बीजेपी प्रदेश की सभी 25 सीटों पर जीती, लेकिन भजनलाल शर्मा के सत्ता में आते ही सीधे 11 सीटों का नुकसान। माना जा रहा है कि राजस्थान में हार के कारणों में भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने से कई बड़े नेताओं की नाराजगी की वजह से भीतरघात और जीत के लिए बड़े नेताओं का साथ नहीं मिलना सबसे बड़ा कारण बताया गया है। लेकिन असल कारण कई बड़े नेताओं की उपेक्षा, जातियों में जनाधारवाले नेताओं की अलवहेलना और ओबीसी वर्ग का उपोक्षित महसूस करने के साथ ही अकेले मुख्यमंत्री के कंधों पर सारा भार आ जाना ही सबसे बड़े कारण रहे।

Table of Contents

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  • लोकसभा चुनाव के झटके से कैसे उबरें
  • जाट, राजपूत, मीणा नाराज और ओबीसी भी दूर
  • बड़े नेताओं से मिलकर अगली रणनीति पर विचार
  • अब सरकार, संगठन व प्रशासन में फेरबदल जरूरी
        • -आकांक्षा कुमारी

लोकसभा चुनाव के झटके से कैसे उबरें

सही मायने में देखा जाए, तो यह लगभग तय माना जा रहा था कि लोकसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार भी बीजेपी सभी 25 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। लेकिन राजस्थान की जनता ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 11 सीटों पर हार का जनादेश देकर एक ऐसा जख्म दिया है, जो बीजेपी सहित मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। इसी सदमे से उबरने के लिए मुख्यमंत्री नई दिल्ली में अपने नेताओं से मुलाकात करने पहुंचे, ताकि जो हुआ उसका और नुकसान न हो, व भूलकर नहीं बल्कि सुधारकर आगे बढ़ें। जयपुर में बीजेपी के बड़े नेताओं के बीच व्यापक मंथन के बाद जो रिपोर्ट तैयार हुई है, उसे लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिले हैं और खास तौर पर बताया गया है कि लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने के मामले में मुख्य़मंत्री भजनलाल शर्मा को अन्य नेताओं का साथ नहीं मिला। जबकि शर्मा के लिए लोकसभा चुनाव अग्नि परीक्षा माना जा रहा था, और वे उसमें झुलस गए।

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जाट, राजपूत, मीणा नाराज और ओबीसी भी दूर

राजस्थान में बीजेपी की 11 सीटों पर हार पर राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते हैं कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनकी पार्टी इस हार के कारण भले ही कुछ भी तलाशें, लेकिन असल में जाट, राजपूत, मीणा व गुर्जर मतदाताओं की नाराजगी और ओबीसी का साथ न मिलना ही राजस्थान में बीजेपी की 11 सीटों पर हार का सबसे बड़े कारण रहे। परिहार बताते हैं कि इस पूरे चुनाव में राजस्थान में बीजेपी की सबसे वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे पूरी तरह से दरकिनार रही, तो दिग्गज नेता राजेंद्र राठोड़ और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया के पास भी कोई खास जिम्मेदारी नहीं थी। परिहार बताते हैं कि बीजेपी ने प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद ओबीसी को साधने के लिए कोई बड़ा कदम उठाया हो, ऐसा भी कहीं प्रतीत नहीं होता। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी दोनों ब्राह्मण हैं, तो दो उपमुख्यमंत्रियों में डॉ प्रेमचंद बैरवा दलित हैं, और दीया कुमारी भले ही राजपूत वर्ग से है, लेकिन वे राजपूत नेता नहीं है। फिर ओबीसी का तो कोई चेहरा तक आगे नहीं था। वे यह भी कहते हैं कि मुख्यमंत्री को प्रकट तौर पर राजस्थान के बाकी बड़े बीजेपी नेताओं और मंत्रिमंडल के सदस्यों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। मंत्री तो अपनी मर्जी से ही पार्टी प्रत्याशियों को जिताने की जुगत में दौरे कर रहे थे, यह भी साफ लग रहा था। परिहार का कहना है कि संगठन सुधारने से लेकर केंद्र से कॉर्डिनेशन की दिशा में सोचने के साथ साथ बीजेपी को इस पर भी तत्काल सोचना होगा कि मूल ओबीसी को साथ कैसे रखा जाए।

बड़े नेताओं से मिलकर अगली रणनीति पर विचार

माना जा रहा है कि दो दिनों तक 11 सीटों पर हार को लेकर बीजेपी में आत्ममंथन चला, उसकी रिपोर्ट भले ही संगठन के स्तर पर तैयार की गई हो, लेकिन उस रिपोर्ट का सार सुनाने ही भजनलाल शर्मा नई दिल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री शर्मा ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के लगभग निवर्तमान होने जा रहे अध्यक्ष जेपी नड्डा को राजस्थान में बीजेपी की हार के कारणों पर फीडबैक दिया है। माना जा रहा हैं कि इस फीडबैक के बाद राजस्थान में बीजेपी और सरकार दोनों में विभिन्न स्तर पर बड़े बदलाव हो सकते हैं। मुख्यमंत्री शर्मा नई दिल्ली में जिन नेताओं से मिले हैं, उनमें पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष नड्डा के अलावा केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, वित्त मंत्री निर्माल सीतारामन आदि से भी मिले हैं। कुछ से प्रदेश के विकास की योजनाओं पर तो किसी से बजट में सहायता की बात करना तो राजनीतिक मामला है, मगर असल में अपनी राजनीति चमकाने के लिए मुख्यमंत्री सबसे मिले हैं।

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अब सरकार, संगठन व प्रशासन में फेरबदल जरूरी

राजस्थान में लोकसभा चुनाव में 11 सीटों पर बीजेपी की हार पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की रिपोर्ट और पार्टी नेताओं के फीडबैक के बाद आनेवाले दिनों में राजस्थान सरकार में व्यापक फेरबदल की संभावना देखी जा रही है। राजस्थान की राजनीति के जानकार पत्रकार हरिसिंह राजपुरोहित कहते हैं कि खास तौर से प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार के मंत्रियों सहित पार्टी संगठन में भी बदलाव जरूरी दिख रहे हैं। मंत्रिमंडल में जातिगत संतुलन के लिए भी फेरबदल जरूरी माना जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री शर्मा ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। मुख्यमंत्री ने सभी 25 सीटों पर 80 से ज्यादा चुनावी सभाएं, रोड़ शो व दौरे किए, लेकिन राजपुरोहित का कहना है कि लोकसभा चुनाव में जहां आलाकमान ने हर बूथ को मजबूत करने की जिम्मेदारी नेताओं और कार्यकर्ताओं को दी थी, जो एक तरह से बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत भी मानी जाती है, राजस्थान के कई लोकसभा क्षेत्रों में वही बड़ी ताकत मिसिंग थी। चुनाव में उस तरीके का बूथ मैनेजमेंट नहीं कहा, जो होना चाहिए था। राजपुरोहित इसका एक ही कारण बताते है कि प्रदेश संगठन में हर स्तर पर विजन की कमी रही,  फिर केंद्र व प्रदेश के बीच तालमेल भी कम ही रहा। उसे देखते हुए पार्टी संगठन में भी बड़े बदलाव संभव हैं। वैसे भी  मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही ब्राह्मण समुदाय से हैं।  बदले हुए राजनीतिक हालात में अब आने वाले दिनों में सरकार, संगठन व प्रशासन तीनों स्तर पर बदलाव की तत्काल संभावना देखी जा रही है।

-आकांक्षा कुमारी

 

यह भी पढ़ियेः Bhajanlal Sharma: मजबूत मुख्यमंत्री के रूप में उभरे भजनलाल शर्मा, लोकसभा चुनाव में की जबरदस्त मेहनत

यह भी पढ़ियेःLoksabha Election Rajasthan : भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सभी 25 लोकसभा सीटों पर जीत का जतन

 

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