– निरंजन परिहार
Choice International: अब असल में इंटरनेशनल बन गई है चॉइस इंटरनेशनल लिमिटेड’, जो भारतीय वित्त क्षेत्र की अग्रणी कंपनी है। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था (Economy) की सबसे बड़ी पहचान यह नहीं होती कि वहां कितने उद्योग हैं, बल्कि यह होती है कि दुनिया का पैसा उस देश पर कितना भरोसा करता है। विदेशी निवेश (Investment)केवल पूंजी नहीं लाता, वह अपने साथ विश्वास, प्रतिष्ठा और भविष्य की संभावनाओं का प्रमाणपत्र भी लेकर आता है। यही कारण है कि दक्षिण कोरिया (South Koria) की प्रतिष्ठित वित्तीय संस्था ‘एनएच इन्वेस्टमेंट एंड सिक्योरिटीज’ (NH Investment & Securities) द्वारा भारत की अग्रणी वित्तीय (Finance) सेवा कंपनी ‘चॉइस इंटरनेशनल’ (Choice International) की ब्रोकिंग एवं वेल्थ मैनेजमेंट इकाई ‘चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग’ में 900 करोड़ रुपये के रणनीतिक निवेश की घोषणा सामान्य कारोबारी खबर नहीं है। यह उस नए भारत की कहानी है, जिसकी आर्थिक धड़कन अब दुनिया के बड़े वित्तीय केंद्रों तक साफ सुनाई देने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, यह बढ़ते भारत की आर्थिक विश्वसनीयता पर लगी एक अंतरराष्ट्रीय मुहर है कि दुनिया की अनुभवी वित्तीय कंपनियां भावनाओं में नहीं, भारत के विकास के आंकड़ों में निवेश करती हैं। वे बाजार की स्थिरता, नियामकीय पारदर्शिता, विकास की गति और भविष्य की संभावनाओं का महीनों तक अध्ययन करती हैं। उसके बाद ही कोई निर्णय लेती हैं। इसलिए चॉइस इंटरनेशनल लिमिटेड में दक्षिण कोरिया की वित्तीय कंपनी ‘एनएच इन्वेस्टमेंट एंड सिक्योरिटीज’ का यह निवेश भारतीय वित्तीय बाजार पर विश्वास का प्रमाण है।

बड़ा मैसेज है चॉइस में 900 करोड़ का निवेश
‘एनएच इन्वेस्टमेंट एंड सिक्योरिटीज’ के ‘चॉइस इंटरनेशनल’ की ब्रोकिंग एवं वेल्थ मैनेजमेंट इकाई ‘चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग’ में इस निवेश की असली ताकत उसकी 900 करोड़ रूपए के आंकड़े में नहीं, बल्कि उसके संदेश में छिपी है। जब कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था किसी भारतीय कंपनी में निवेश करती है तो दुनिया के अन्य निवेशकों को भी संकेत मिलता है कि भारत में अवसर सुरक्षित हैं। ऐसे निवेश आगे चलकर तकनीक लाते हैं, वैश्विक अनुभव लाते हैं, नई कार्य संस्कृति लाते हैं और सबसे महत्वपूर्ण—पूरे उद्योग में प्रतिस्पर्धा का स्तर ऊंचा कर देते हैं। इसका लाभ अंततः निवेशकों और ग्राहकों दोनों को मिलता है। कभी सीमित दायरे में काम करने वाली चॉइस इंटरनेशनल आज देश की तेजी से बढ़ती वित्तीय सेवा कंपनियों में शामिल है। कमल पोद्दार और अरुण पोद्दार के नेतृत्व में चॉइस इंटरनेशनल लिमिडेट ने ब्रोकिंग, वेल्थ मैनेजमेंट, निवेश सलाह, ऋण वितरण और डिजिटल वित्तीय सेवाओं में जिस गति से विस्तार किया है, उसने निवेशकों के बीच एक विश्वसनीय नाम बनाया है। दक्षिण कोरिया जैसी परिपक्व वित्तीय व्यवस्था की संस्था का इस कंपनी पर भरोसा जताना बताता है कि भारतीय निजी वित्तीय संस्थान अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता हासिल कर चुके हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था के उभरते आयाम
दुनिया की बड़ी वित्तीय संस्थाएं वहां निवेश करती हैं, जहां उन्हें भविष्य दिखाई देता है। भारत आज उसी श्रेणी में खड़ा है। राजनीतिक स्थिरता, मजबूत नियामकीय व्यवस्था, बढ़ती अर्थव्यवस्था, डिजिटल क्रांति और निवेशकों का बढ़ता विश्वास, इन सबने मिलकर भारत को वैश्विक पूंजी का पसंदीदा ठिकाना बना दिया है। चॉइस इंटरनेशनल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक कमल पोद्दार कहते हैं कि उनकी कंपनी में हुआ यह निवेश केवल एक कॉरपोरेट सौदा नहीं, बल्कि उस आर्थिक परिवर्तन का हिस्सा है, जिसने भारत को दुनिया के वित्तीय मानचित्र पर कहीं अधिक मजबूत और प्रभावशाली बना दिया है। चॉइस इंटरनेशनल लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ अरुण पोद्धार कहते हैं कि हमारी कंपनी में दक्षिण कोरिया का यह निवेश भारतीय वित्तीय बाजार में विदेशी कंपनियों के बढ़ते विश्वास और हमारी सुदृढ़ स्थिति का एक उत्कृष्ट प्रतीक है।”ऐसे माहौल में वैश्विक निवेशकों को भारत केवल एक उभरता बाजार नहीं, बल्कि भविष्य का वित्तीय महाशक्ति बनने की क्षमता वाला देश दिखाई दे रहा है। चॉइस इंटरनेशनल के ज़इंट मेनेजिंग डायरेक्टर सुयश पाटोदिया के मुताबिक कंपनी इस 900 करोड़ रुपए के फंड का उपयोग मुख्य रूप से मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी बढ़ाने, अत्याधुनिक वित्तीय तकनीक को विकसित करने और नए ग्राहकों को जोड़ने में किया जाएगा।

वित्तीय सेवाओं का भारत में बदलता भविष्य
चॉइस इंटरनेशनल के पास अब केवल पूंजी नहीं होगी, बल्कि वैश्विक अनुभव और तकनीकी साझेदारी का अवसर भी होगा। आने वाला दशक केवल बैंकिंग का नहीं होगा, बल्कि तकनीक आधारित वित्तीय सेवाओं का होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल वेल्थ मैनेजमेंट और व्यक्तिगत निवेश सलाह वित्तीय उद्योग का नया चेहरा बनने जा रहे हैं। भारत-दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अप्रैल को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग से मुलाकात की थी, जहां दोनों नेताओं ने भू-राजनीतिक संघर्षों पर चर्चा की, जिसमें खाड़ी क्षेत्र और रूस-यूक्रेन युद्ध में चल रहे तनाव सहित जहाज निर्माण, एआई, अर्धचालक, व्यापार और उभरती प्रौद्योगिकियों सहित वित्तीय विकास पर चर्चा की गई। क्योंकि भारत अब केवल बाजार नहीं, अवसर है पिछले एक दशक में भारतीय पूंजी बाजार ने जो परिवर्तन देखा है, वह अभूतपूर्व है। यह निवेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘मेक इन इंडिया’ और वित्तीय सुधारों के चलते भारत के प्रति वैश्विक कंपनियों के बढ़ते आकर्षण की पुष्टि करता है। उनका कहना है कि यह कदम न केवल चॉइस इंटरनेशनल के वैश्विक विस्तार को गति देगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की एक मजबूत और सेफ इन्वेस्टमेंट हब वाली छवि को और अधिक सुदृढ़ करेगा। विदेशी निवेश से भारतीय वित्तीय संस्थाओं में कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वैश्विक मानकों का पालन सुनिश्चित हुआ है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल्स की रिपोर्ट बताती है कि इन बदलावों से भारतीय बाज़ार में विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ा है
विदेशी पूंजी की पहली पसंद बनता भारत
आज किया गया 900 करोड़ रुपये का यह निवेश आने वाले वर्षों में शायद और भी बड़े निवेशों की भूमिका लिखेगा। यह बताता है कि भारतीय कंपनियां अब विदेशी पूंजी की मोहताज नहीं, बल्कि उसकी पहली पसंद बन रही हैं। पूंजी वहां जाती है जहां भरोसा होता है। और आज दुनिया का भरोसा भारत पर है। एक समय था, जब विदेशी निवेशक भारत को केवल विशाल उपभोक्ता बाजार के रूप में देखते थे। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। आज दुनिया भारत को अवसरों की अर्थव्यवस्था, तकनीक की प्रयोगशाला और पूंजी निर्माण के सबसे भरोसेमंद केंद्र के रूप में देख रही है। यही कारण है कि एशिया की एक बड़ी वित्तीय संस्था ने भारत के वित्तीय क्षेत्र में इतनी बड़ी राशि निवेश करने का निर्णय लिया है। यह निवेश केवल 900 करोड़ रुपये का नहीं है। दक्षिण कोरिया से आया यह 900 करोड़ रुपये का विश्वास उसी बदलते भारत की कहानी कह रहा है, एक ऐसे भारत की, जो केवल विकास नहीं कर रहा, बल्कि दुनिया की वित्तीय व्यवस्था में अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)
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