
Jaipur Diwali: बात दिवाली की हो और जयपुर (Jaipur) की याद न आए, ऐसा कैसे हो सकता है! राजस्थान की राजधानी जयपुर यानी गुलाबी नगरी, दिवाली (Diwali) पर ये शहर सिर्फ सजता नहीं, बल्कि रोशनी के रंगों में नहाता है, अपनी पूरी खूबसूरती बिखेरता है और कुछ ज्यादा ही खिल जाता है। दिवाली जयपुर के बाजारों की बहार है। हवेलियों की हनक है। राजमहलों का रोमांच है। किलों के कल को आज के उजाले में आलोकित करने का अवसर है, और आतिशबाजी का आसमान है। दिवाली जयपुर के लिए एक ऐसा उत्सव है, जो आंखों से शुरू होकर सीधे दिल में उतर जाता है। जयपुर, जहां दिवाली की एक रात जिंदगी भर की यादों की पोटली बन जाती है। आज उसी पोटली को आपके लिए खाली करने का मन है। जयपुर में दिवाली (Jaipur Diwali) देखने का मतलब सिर्फ रोशनी देखना नहीं होता। इसका मतलब है, अपने मन को भीतर तक एक उत्सव में उतरते देखना। हमने खुद के जवान होने के दिनों में देखी है जयपुर की दिवाली। उसकी गुलाबीयत के रंग जिंदा है जेहन में। इसीलिए जानता हूं कि दिवाली के कुछ दिन पहले से ही, जयपुर की सुहानी सांझ में जब दिन ढलने लगता है। आसमान में सूरज की आखिरी किरणें गुलाबी शहर की दीवारों को छूती हैं। बाजारों में हलचल बढ़ने लगती है। दुकानों के बाहर सजावट संवर चुकी होती है। कहीं रंगीन झालरें हैं। कहीं सुनहरी रोशनी। कहीं दीपों की कतारें। और कहीं दीयों का काफिला। धीरे-धीरे जयपुर अपने जलवे के साथ हमारे दिल की दुनिया में प्रवेश करता है और सदा के लिए बसा रहता है। बरसों बाद आज भी हर दिवाली के दिन जयपुर की दिवाली, दिल के दरिया में दस्तक देती लगती है।

बाजारों की चमक, गुलाबी शहर की पहचान
जयपुर की दिवाली का सबसे खूबसूरत दृश्य उसके बाजारों में दिखाई देता है। हमने देखा है जौहरी बाजार। किशनपोल बाजार। चौड़ा रास्ता। बापू बाजार। नेहरू बाजार। त्रिपोलिया बाजार। एमआई रोड। हर जगह अलग रंग। अलग सजावट। अलग आकर्षण। दुकानों की छतों से लेकर सड़क के दोनों ओर तक रोशनी की लडकती लड़ियां आंखों लो लुभा देती हैं। पुराने शहर की गुलाबी इमारतें जब रंगीन रोशनी से नहाती हैं, तो उनकी खूबसूरती और भी निखर जाती है। यहां सिर्फ खरीदारी नहीं होती। यहां उत्सव का अनुभव होता है। कपड़ों की दुकानों पर भीड़ है। मिठाइयों की दुकानों पर रौनक है। सोने-चांदी के आभूषणों की चमक है। मोतियों और रत्नों की रौनक है। रंग-बिरंगे सजावटी सामान हैं। हर दुकान अपने तरीके से दिवाली को खास बनाने की कोशिश करती है। जयपुर की दिवाली में बाजार सिर्फ बाजार नहीं रहते। वे शहर की खूबसूरती का हिस्सा बन जाते हैं।
महलों और किलों की रोशनी का जादू
दुनिया जानती है कि जयपुर की पहचान में हवा महल एक खास आकर्षण है। गुलाबी रंग की यह ऐतिहासिक इमारत अपने अनूठे झरोखों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। दिवाली के दिनों में हवा महल के आसपास का माहौल और अधिक आकर्षक हो उठता है। जब रोशनी इसकी ऐतिहासिक दीवारों को छूती है, तो लगता है जैसे अतीत और वर्तमान एक दीसरे में समा रहे हों। वहां से सर उठाएं, तो सामने पहाड़ी पर चमकता आमेर किला और उसके पास ही जलवे बिखेरता जयगढ़ फोर्ट। शांत लहरों के बीत जल महल। अजमेरी गेट, न्यू गेट और सांगानेरी गेट। चांदपोल और त्रिपोलिया गेट। फिर परकोटे से बाहर निकलते ही रामनिवास बाग के बीचों बीच रॉयल अल्बर्ट हॉल। थोड़ा आगे बांई तरफ स्टेच्यू सर्कल और वहां से नजर घुमाओ तो दूर पहाड़ी से शहर को निहारता मोती डूंगरी किला और नीचे बिड़ला मंदिर फिर हमारा राजस्थान राजस्थान विश्वविद्यालय । एक तरफ सदियों पुरानी वास्तुकला। दूसरी तरफ आधुनिक इमारतों की सजावट। और बीच में जयपुर की दिवाली। यह दृश्य कैमरे में कैद करना आसान है। लेकिन उसकी खूबसूरती को शब्दों में उतारना मुश्किल।

आतिशबाजी और उत्सव का आसमान
जयपुर की दिवाली में आतिशबाजी का आकर्षण भी कम नहीं। शाम ढलते ही आसमान चमकने लगता है, उसमें रंग दिखाई देने लगते हैं। कहीं सुनहरी चमक है। कहीं लाल और हरे रंग की लंबी रोशनी। कहीं दूर से आती पटाखों की आवाजें। लेकिन जयपुर की दिवाली का असली आनंद केवल आतिशबाजी में नहीं है। यह आनंद रोशनी से नहाते शहर को देखने निकले उन परिवारों में है, जो एक साथ बाजार में घूमते निकलते हैं। ये आनंद उन बच्चों में है, जिनकी आंखों में रोशनी देखकर उत्साह भर जाता है। उन दुकानदारों में है, जो पूरे साल इस त्योहार का इंतजार करते हैं। और उन पर्यटकों में है, जो खास तोर से जयपुर की दिवाली देखने आते हैं। जयपुर में वैसे तो हर त्योहार में मिठाइयों की दुकानों पर खास रौनक दिखाई देती है। लेकिन यहां दिवाली सिर्फ रोशनी का त्योहार नहीं है। यह स्वाद का त्योहार भी है। घेवर, मावा कचौरी, लड्डू, काजू कतली और पारंपरिक राजस्थानी मिठाइयां लोगों को अपनी ओर खींचती हैं। अब तो खैर, कई सारी नई नई मिठाई की दुकानें लगातार खुलती जा रही हैं, लेकिन एलएमबी, रावत, सोडानी, गोविंदम की मिठाइयों का आज भी कोई तोड़ नहीं। देश – दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस शहर की सजावट, मिठास और उत्सव का अनुभव लेने पहुंचते हैं।
संकरी गलियों में बड़ी खुशियों के खजाने
जयपुर की दिवाली का सबसे खूबसूरत हिस्सा उसके लंबे और चौड़े रास्तों में दिखता है, तो उसकी छोटी-छोटी गलियों में भी छिपा है। सरगासूली रकी लंबी मीनारों और झरोखों से झांकता उजाला है, तो किसी घर के बाहर अनगिनत दीपों की कतार है। खजानेवालों का रास्ता, झालानियों का रास्ता, खूंटेटों का रास्ता, घी वालों का रास्ता, हल्दियों का रास्ता, गोपालजी का रास्ता, सोंथलीवालों का रास्ता, मोतीसिंह भोमियों का रास्ता जैसी कई सारी संकरी – संकरी गलियों के गुलाबी घरों में कहीं मांडवे मंडते हैं, तो कहीं रंगोली रचती है। कहीं दरवाजे पर फूलों की सजावट है। किसी छत पर परिवार एक साथ बैठा है। कहीं झरोखों की चमक है, तो कहीं बच्चे अपने दोस्तों के साथ उत्सव मना रहे हैं। पुराने शहर की गलियों में घूमते हुए महसूस होता है कि दिवाली सिर्फ बड़े बाजारों की चमक नहीं है। यह हर घर की अपनी कहानी है। हर दीपक एक उम्मीद है। हर रोशनी एक खुशी। और हर घर एक उत्सव। विदेशी पर्यटकों के लिए भी जयपुर की दिवाली भारतीय संस्कृति, परंपरा और आधुनिक उत्सव का आकर्षक संगम है।

जयपुर की दिवाली, जिंदगी भर की याद
जयपुर की दिवाली देखने के बाद जब आप किसी दूसरे शहर में रोशनी देखेंगे, तो शायद अनायास ही जयपुर याद आ जाएगा। वह गुलाबी शहर। वह जगमगाते बाजार। वह हवा महल, मोती डूंगरी, जयगढ़ और आमेर का किला। वह मिठाइयों की खुशबू। और वह रात, जब पूरा शहर एक साथ उत्सव में डूब जाता है। जयपुर की दिवाली की खूबसूरती इसी में है कि यहां परंपरा और आधुनिकता एक साथ दिखाई देती हैं। ऐतिहासिक इमारतों की शान भी है। आधुनिक सजावट का आकर्षण भी। परिवारों की खुशियां भी हैं। पर्यटकों का उत्साह भी। तो जिंदगी में कम से कम एक बार जयपुर की दिवाली जरूर देखिए। यहां के बाजारों की रोशनी देखिए। हवा महल की खूबसूरती निहारिए। मोती डूंगरी का मस्त मौला अंदाज देखिए। और उस ऐतिहासिक शहर को महसूस कीजिए, जो दिवाली पर सिर्फ जगमगाता नहीं, बल्कि अपने रंग, अपनी संस्कृति और अपनी खुशियों से हर किसी को पूरी तरह अपने भीतर समेट लेता है। क्योंकि जयपुर की दिवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं है। यह रंगीन रोशनियों से रिसती रिश्तों की रवायत का भी ऐसा अनुभव है, जिसे देखने के बाद दिल बार-बार उसी शहर में लौटना चाहता है। दुनिया के कई देशों और हमारे हिंदुस्तान के कई शहरों की दिवाली देखने के बाद मेरा दावा है कि जब भी दुनिया में आपको कहीं दिवाली की रोशनी दिखाई देगी, मन यह जरूर कहेगा, दिवाली हो, तो जयपुर के जैसी।

