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Home»देश-प्रदेश»Rajasthan: नेता के बच्चे नेता, कोई कई बार विधायक – सांसद, तो कोई बार – बार मंत्री
देश-प्रदेश 9 Mins Read

Rajasthan: नेता के बच्चे नेता, कोई कई बार विधायक – सांसद, तो कोई बार – बार मंत्री

Prime Time BharatBy Prime Time BharatJanuary 8, 2026No Comments
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Sonia Gandhi Randeep Surjewala Mukul Wasnik Neeraj Dangi Sachin Pilot Congress Political Nepotism Rajasthan Prime Time Bharat 1
Sonia-Gandhi-Randeep-Surjewala-Mukul-Wasnik-Neeraj-Dangi-Sachin-Pilot-Congress-Political-Nepotism-Rajasthan-Prime-Time-Bharat
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Rajasthan: राजा – महाराजाओं के राजपुताने में सत्ता के शिखर पर वंशवाद पहली जरूरत के रूप में सदा से समाहित रहा है। मगर, लोकतंत्र में वंशवाद और परिवारवाद सदा से निशाने पर रहने के बावजूद वंश की बेल भी साल दर साल विकसित होती रही हैं। राजस्थान (Rajasthan) की राजनीति में परिवारवाद (Nepotism) की पौध के रूप में, लगभग हर पार्टी में ऐसे चेहरे हैं, जिनकी राजनीति (Politics) में पहचान उनके व्यक्तिगत संघर्ष या जनसेवा से ज्यादा उनकी पारिवारिक (Family) पृष्ठभूमि से जुड़ी हुई है। कांग्रेस (Congress) पर तो खैर, वंशवाद विकसित करने के आरोप लगते ही रहे हैं, क्योंकि उस पार्टी में चार पीढ़ियों से एक ही, गांधी परिवार सर्वोपरि रहा है। मगर, बीजेपी (BJP) वंशवाद का विरोध करती रही है, फिर भी वंशवाद की फसल उसके खेतों में भी सदा से लहराती रही है।

Table of Contents

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  • बीजेपी – कांग्रेस दोनों के विधायक परिवारवाद से
  • पीढ़ी दर पीढ़ी सियासत में वंशवाद की फलती फूलती बेल
  • वंशवाद की संस्कृति का प्रदेश है राजाओं का राजस्थान
  • कांग्रेस में सर्वाधिक नेता सियासी वंशवाद की पैदाइश
  • बीजेपी में भी सूची लंबी है रिश्तेदारी और विरासत की
  • सियासत में बहुत गहरी हैं परिवारवाद की जड़ें
          • -राकेश दुबे

बीजेपी – कांग्रेस दोनों के विधायक परिवारवाद से

राजस्थान विधानसभा के वर्तमान 200 विधायकों का तथ्यात्मक अध्ययन करें, तो कुल 40 विधायक वंशवादी पृष्ठभूमि से हैं, जिसमें कांग्रेस का आंकड़ा सबसे ऊपर है। कांग्रेस के 69 विधायकों में से कुल 21 विधायक अर्थात लगभग 30 फीसदी विधायक वंशवाद की पैदाइश हैं। दूसरी पार्टियों के आंकड़ों पर गौर करें तो, वंशवाद का सदा से विरोध करने वाली बीजेपी 115 विधायकों में से 14 यानी लगभग 12 फीसदी विधायक वंशवादी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। राजस्थान में मुख्य रूप से यो दो ही पार्टियां है, लेकिन एक क्षेत्रीय पार्टी भी है – राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी। उसके सांसद हनुमान बेनीवाल भी वंशवाद की पैदाइश कहे जा सकते हैं। बेनीवाल के पिता भी विधायक रहे हैं। भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली वर्तमान बीजेपी सरकार के कई मंत्री भी वंशवादी पृष्ठभूमि से हैं। कांग्रेस के महासचिव वैभव गहलोत के पिता अशोक गहलोत राजस्थान तके 3 बूार मुख्यमंत्री, तीन बार केंद्र में मंत्री, पांच बार सांसद और छह बार विधायक रहे हैं।  कांग्रेस नेता और विधायक रहे दानिश अबरार के पिता अबरार अहमद सांसद व केंद्र में मंत्री रहे, तो उनकी माता यास्मीन अबरार भी विधायक रहीं।

पीढ़ी दर पीढ़ी सियासत में वंशवाद की फलती फूलती बेल

राजस्थान में दूसरी और तीसरी पीढ़ी के वंशवादी भी प्रमुखता से राजनीति में सक्रिय हैं। बीजेपी और कांग्रेस दोनों में कई नेता ऐसे हैं, जो वंशवाद की तीसरी पीढ़ी से हैं। बीजेपी की दिग्गज नेता रहीं विजयाराजे सिंधिया की बेटी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खुद विधायक और उनके बेटे दुष्यंत सिंह पांचवी बार सांसद हैं। बीजेपी नेता और पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा, सांसद – विधायक और केंद्र में मंत्री रहे नाथूराम मिर्धा की पोती हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव दिव्या मदेरणा के दादा परसराम मदेरणा और पिता महिपाल मदेरणा दोनों मंत्री रहे, तो मां लीला मदेरणा जिला प्रमुख रहीं। उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी पूर्व सांसद गायत्री देवी की पोती हैं, तो विधायक सिद्धि कुमारी के दादा बीकानेर राजघराने के करणी सिंह भी सांसद रहे। बीजेपी सांसद रहने के बाद कांग्रेस में आकर भी सांसद बने राहुल कस्वां के पिता राम सिंह कस्वां भी बीजेपी के सांसद थे और दादा दीप सिंह भी पूर्व में सांसद रहे। इसी तरह, कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हरेंद्र मिर्धा तथा पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा के बेटे सहित राम स्वरूप लांबा के दादा भी सांसद व मंत्री थे।

वंशवाद की संस्कृति का प्रदेश है राजाओं का राजस्थान

राजस्थान की राजनीति में वंशवादी पृष्ठभूमि से जुड़े नेताओं की यह उपस्थिति दशकों से बनी हुई है और वर्तमान निर्वाचित प्रतिनिधियों में भी यह प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते हैं कि राजनीति में ही नहीं, समाज के हर वर्ग में वंशवाद एक स्थापित प्रवृत्ति के रूप में मौजूद है। परिहार कहते हैं कि जब उद्योगपति का बेटा उद्यमी, व्यापारी का बेटा व्यापारी, डॉक्टर का बेटा डॉक्टर, वकील का बेटा वकील, सीए का बेटा सीए और ठेकेदार का बेटा ठेकेदार होता है, तो किसी को भी ऐतराज नहीं होता। वहां तो लोग उन पर गर्व करते हैं, तो फिर नेता के परिवार में कोई अगर नेता बने तो किसी ऐतराज क्यों होना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषक परिहार कहते हैं कि राजस्थान तो वंशवाद की ही संस्कृति का प्रदेश रहा है, जहां राजा का बेटा राजा होता था, तो सियासत में यह कोई नई बात नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार  राजीव जैन का कहना है कि परिवारवाद से भाजपा हो या कांग्रेस या अन्य दल सभी एक से हैं।  हर नेता चाहता है कि उसकी विरासत बेटे, बेटी, पत्नी या भाई संभाले। वरिष्ठ पत्रकार अरविंद चोटिया का कहना है कि राजनीतिक परिवारों की अपने निर्वाचन क्षेत्रों में मजबूत पकड़ होती है, और वे अक्सर स्थानीय राजनीति, टिकट आवंटन और पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन राजनीति में, सियासी परिवार को कोई व्यक्ति किसी को धकेल कर वंशवाद के बल पर ही आगे बढ़े, तो लोगों को जरूर दिक्तत होती है। राजस्थान की राजनीति के जानकार हरिंसिंह राजपुरोहित कहते हैं कि वर्षों तक की गई मेहनत से बनी पिता की बनी विरासत अगर कोई बेटा न सम्हाले तो भी लोगों को मुसीबत होती है, और ना संभाले तो भी मुसीबत। राजनीति की यह अजब दुविधा है।

Sonia Gandhi Randeep Surjewala Mukul Wasnik Neeraj Dangi Sachin Pilot Congress Political Nepotism Rajasthan Prime Time Bharat
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कांग्रेस में सर्वाधिक नेता सियासी वंशवाद की पैदाइश

कांग्रेस में, सोनिया गांधी भी राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं जो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बहू हैं। इनके पुत्र राहुल गांधी सांसद हैं और लोकसभा में विपक्ष के नेता भी। सोनिया गांधी की बेटी पुत्री प्रियंका गांधी वाड्रा भी सांसद हैं। राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी पूर्व मंत्री के पिता दिनेश डांगी के बेटे हैं। रणदीप सिंह सुरजेवाला भी राजस्थान से ही राज्यसभा सांसद हैं, जिनके पिता कांग्रेस नेता शमशेर सिंह सुरजेवाला हैं और पुत्र आदित्य सुरजेवाला विधायक हैं। प्रमोद तिवारी राजस्थान के राज्यसभा सांसद हैं और पुत्री आराधना मिश्रा ‘मोना’ उत्तर प्रदेश में विधायक हैं। मुकुल वासनिक राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं, उनके पिता बालकृष्ण वासनिक भी मंत्री रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री शीश राम ओला के बेटे बृजेंद्र ओला लोकसभा सांसद हैं। वीरेंद्र सिंह विधायक हैं और इनके पिता नारायण सिंह पूर्व में मंत्री और विधायक रहे। शोभारानी कुशवाहा विधायक हैं तो उनके पति बीएल कुशवाहा भी विधायक रहे हैं। रूपिंदर सिंह कूनर विधायक हैं, जो पूर्व विधायक गुरमीत सिंह कूनर के बेटे हैं। विधायक रीता चौधरी के पिता राम नारायण चौधरी बरसों तक राजस्थान में मंत्री रहे। हरेन्द्र मिर्धा विधायक हैं और उनके पिता रामनिवास मिर्धा केंद्र में लंबे समय तक मंत्री रहे। इसी तरह सुशीला डूडी विधायक हैं और पति रामेश्वर डूडी पूर्व सांसद और नेता प्रतिपक्ष रहे। विधायक रोहित बोहरा भी कई सरकारों में मंत्री रहे प्रद्युम्न सिंह के बेटे हैं। अनिल कुमार शर्मा विधायक हैं जो पूर्व विधायक भंवरलाल शर्मा के बेटे हैं। मनोज कुमार विधायक के पिता भंवरलाल मेघवाल पूर्व में मंत्री रहे तो, विधायक सचिन पायलट के पिता कांग्रेस के कद्दावर नेता राजेश पायलट केंद्रीय मंत्री रहे और उनकी मां रमा पायलट भी विधायक व सांसद रही हैं। इस फेहरिस्त में लोकसभा सांसद हरीशचंद्र मीणा भी शामिल हैं। इनके भाई नमो नारायण मीणा पूर्व में केन्द्रीय मंत्री रहे हैं।

Mahima Kumari Dushyant Singh Brijendra Ola Rahul Kaswan Jyoti Mirdha Political Nepotism Rajasthan Prime Time Bharat
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बीजेपी में भी सूची लंबी है रिश्तेदारी और विरासत की

बीजेपी में मेवाड़ राजघराने से आने वाले विश्वराज सिंह मेवाड़ नाथद्वारा से विधायक और उनकी पत्नी महिमा कुमारी मेवाड़, राजसमंद से लोकसभा सांसद हैं। तो जयपुर राजघराने की दिया कुमारी व बीकानेर राजघराने की सिद्धि कुमारी भी वंशवाद की ही उपज हैं। विधायक शैलेश सिंह पूर्व मंत्री दिगंबर सिंह के पुत्र हैं और इनके ससुर कांग्रेस विधायक विद्याधर सिंह हैं। डॉ किरोड़ीलाल मीणा मंत्री हैं तथा उनकी पत्नी गोलमा देवी भी विधायक व मंत्री रही हैं, जबकि भतीजा राजेंद्र मीणा विधायक हैं। विधायक व राज्य मंत्री कृष्ण कुमार विश्नोई के पिता पूर्व विधायक लादूराम हैं। अंशुमान सिंह भाटी विधायक हैं और पिता महेंद्र भाटी सांसद रहे हैं जबकि दादा पूर्व विधायक देवी सिंह भाटी हैं। कोटा राजघराने की कल्पना देवी विधायक हैं और पति इज्यराज सिंह कांग्रेस के सांसद रहे हैं। कल्पना के ससुर ब्रृजराज सिंह भी सांसद थे। विधायक जगत सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री पूर्व केंद्रीय मंत्री कुंवर नटवर सिंह के पुत्र हैं। रामस्वरूप लाम्बा विधायक हैं और पिता सांवरलाल जाट पूर्व में सांसद व मंत्री रहे हैं। हेमंत मीणा राज्य मंत्री एवं पिता नंदलाल मीणा भी पूर्व में मंत्री रहे हैं। राजसमंद की विधायक दीप्ति महेश्वरी की माता किरण महेश्वरी भी विधायक व मंत्री रही। शांता मीणा विधायक हैं और पति अमृतलाल मीणा विधायक रहे हैं। झाबर सिंह खर्रा राज्य मंत्री हैं और पिता हरलाल सिंह खर्रा भी मंत्री रहे हैं। अरुण चौधरी विधायक हैं और इनके पिता अमराराम चौधरी विधायक रहे हैं। मंजू शर्मा लोकसभा सांसद हैं और इनके पिता भंवरलाल शर्मा विधायक, मंत्री व बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। विधायक गुरवीर सिंह के दादा गुरजंट सिंह बराड़ विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा जोधपुर शहर के विधायक अतुल भंसाली के चाचा कैलाश भंसाली भी विधायक रह चुके हैं।

सियासत में बहुत गहरी हैं परिवारवाद की जड़ें

राजनीति का यह वंशानुगत चेहरा, जनता के भरोसे, नए लोगों की कोशिशों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भले ही सवाल खड़े करता रहा है, लेकिन सियासत, सत्ता, संगठन और समाज में हर स्तर पर वंशवाद की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि नए और सक्षम लोगों को आगे बढ़ने के रास्ते मुश्किल दिखने लगे हैं। हालांकि, इस हालात से, वंशवाद को कोई खास सरोकार नहीं है, वह तो साल दर साल लगातार, धुंआधार और बेशुमार विकसित होता ही रहा है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। क्योंकि सियासत में परिवारवाद की जड़े बहुत गहरी हैं। फिर, हमारे हिंदुस्तानी समाज में तो, पीढ़ी दर पीढ़ी पिता के काम को सम्हालते रहना ही हमारी संतानों का संस्कार और संस्कृति सदा से सही मानी जाती रही है।

-राकेश दुबे

इसे भी देखेंः Rajasthan: दो नेताओं की सजह मुलाकात या अगले प्रदेश अध्यक्ष की तैयारी ?

यह भी  पढ़ेः Rajasthan Politics: …आखिर उड़ान के लिए पायलट को विमान रन-वे पर लाना ही पड़ा?

BJP Congress Family Nepotism Politics Rajasthan
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