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Home»देश-प्रदेश»Raj Purohit: बहती हवा सा था वो… सदा सक्रिय रहा राज पुरोहित की जिंदगी का सफर
देश-प्रदेश 4 Mins Read

Raj Purohit: बहती हवा सा था वो… सदा सक्रिय रहा राज पुरोहित की जिंदगी का सफर

Prime Time BharatBy Prime Time BharatJanuary 18, 2026No Comments
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        • – निरंजन परिहार
  • सांस सांस भाजपा, अंतिम सांस भाजपा
  • दिलदार, जिंदा दिल और यारों को यार
  • छोटे गांव से निकलकर बड़े शहर में बने बड़े
  • अब स्मृतियों में सजेंगे और यादों में रहेंगे
          • (लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)
– निरंजन परिहार

राज के पुरोहित चले गए। जाना सबको है, लेकिन यह उनके जाने का वक्त नहीं था। राज पुरोहित (Raj Purohit) उन विरले नेताओं में रहे, जिनकी राजनीतिक हैसियत जितनी बड़ी थी, सामाजिक स्वीकार्यता उससे भी कहीं अधिक व्यापक। वे बीजेपी (BJP) की राजनीति में एक ऐसे कर्मठ माने जाते थे, जो जमीन से जुड़े थे और जिसे संगठन में अपने नेताओं की नब्ज समझने का हुनर आता था। इसीलिए भले ही वे नगरसेवक, विधायक, मंत्री, पार्टी अध्य़क्ष और मुख्य़ सचेतक बने, लेकिन अपने नेताओं के लिए वे सदा कार्यकर्ता ही बने रहे। उनका जाना प्रवासी राजस्थानी समाज के लिए केवल एक युग का अंत ही नहीं, एक बहुत बड़ा सवाल भी है। सवाल यह कि अब प्रवासी राजस्थानी किस नेता में अपना नेता ढूंढे?

Raj Purohit Om Prakash Mathur Prime Time Bharat
Raj-Purohit-Om-Prakash-Mathur-Prime-Time-Bharat

सांस सांस भाजपा, अंतिम सांस भाजपा

राज के पुरोहित के निधन की पीड़ा इसलिए भी ज्यादा गहरी है क्योंकि यह घटना अचानक हुई। अभी दो दिन पहले ही वे मुंबई महानगर पालिका चुनाव में उनकी पार्टी बीजेपी को जिताने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ मैदान में थे। पार्टी की प्रचार यात्राओं में उनके चेहरे पर चमक थी और वही जिद कि हर हाल में जीत दिलानी है। महानगर पालिका में पहली बार बीजेपी का मेयर बनने की खुशखबरी जिस दिन मुंबई के आकाश में पसरी, अगले ही दिन राज के पुरोहित, मानो उसी जीत में विलीन हो गए। इसी चुनाव में उनके बेटे आकाश पुरोहित ने भी लगातार दूसरी बार चुनाव जीता। बीजेपी और प्रवासी राजस्थानी समाज राज के पुरोहित के निधन की इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से सन्न है, क्योंकि यह केवल एक नेता का जाना नहीं, अपने एक कर्मठ सेवक और सक्षम संरक्षक का संसार से अचानक चले जाना है।

दिलदार, जिंदा दिल और यारों को यार

राज के पुरोहित प्रवासी राजस्थानी समाज के ‘वास्तविक नेता’ कहे जाते थे। उनकी दिलदारी, जिंदादिली और दबंग अंदाज की छवि सिर्फ मंचों तक सीमित नहीं थी, बल्कि लाखों लोगों के निजी जीवन की स्मृतियों के पन्नों में दर्ज थी। व्यवहार ऐसे अपनत्व से भरा था कि वे जिससे भी मिलते, उसे अपने ही परिवार का सदस्य लगते। मुंबई में शायद ही कोई सक्रिय प्रवासी राजस्थानी होगा जिसके पास राज के पुरोहित को लेकर कोई निजी अनुभव की शानदार कहानी न हो। वे राजनीति में थे, पर उनका दिल समाज में बसता था। यही वजह रही कि वे सामाजिक संस्थाओं, ट्रस्टों, व्यापारिक संगठनों और सांस्कृतिक मंचों से गहराई से जुड़े रहे। जरूरतमंदों को लिए सहयोगी साबित होना उनकी आदत में शामिल था, और यह सहयोग केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्ची आत्मीयता के लिए होता था।

Raj Purohit Om Ravindra Bhati Prime Time Bharat
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छोटे गांव से निकलकर बड़े शहर में बने बड़े

राजस्थान के छोटे से सिरोही जिले के छोटे से गांव फूंगणी से निकलकर देश के सबसे बड़े शहर मुंबई की राजनीति के शिखर तक पहुंचने वाले राज के पुरोहित ने जिस तरह अपने संघर्ष, परिश्रम और व्यक्तित्व के बल पर पहचान बनाई, वह हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया। मुंबई में नगरसेवक के रूप में जिस यात्रा की शुरुआत की, वही आगे चलकर 6 बार विधायक, फिर मंत्री, उसके बाद में मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष और फिर विधानसभा में मुख्य सचेतक जैसी रणनीतिक जिम्मेदारियों तक पहुंची। उनकी राजनीतिक सक्रियता, तेजतर्रार कार्यशैली और निर्णय लेने की क्षमता पार्टी के भीतर भी उन्हें विशेष बनाती थी। लोगों को उनमें कभी नेता दिखा ही नहीं, हर किसी को वे अपने दोस्त से लगते थे।

अब स्मृतियों में सजेंगे और यादों में रहेंगे

राज के पुरोहित जब तक हमारे बीच रहे, मुंबई में राजस्थानी समाज की आखिरी ‘उम्मीद’ बने रहे। किसी का कोई भी काम हो, छोटा हो या बड़ा, वे हर वक्त मदद को तैयार रहते थे। कई लोग उन्हें नेता नहीं, अपना संकटमोचक मानते थे। उनके जाने से न केवल प्रवासी राजस्थानी समाज की राजनीति में बड़ा शून्य पैदा हुआ है, बल्कि देश के व्यापारिक समाज ने भी अपना एक अनन्य सहयोगी खो दिया है। राज के पुरोहित के जीवन का सीधा और स्पष्ट संदेश सिर्फ यही है कि बड़े शहर के बड़े – बड़े लोगों की भीड़ में भी छोटे जगह से आए व्यक्ति के इरादे अगर मजबूत हों, तो गांव का बेटा भी एक इतिहास लिख सकता है। आज मुंबई के प्रवासी समाज ने अपने एक ऐसे नेता को विदाई दी है, जिसकी जगह भर पाना आसान नहीं। राज के पुरोहित की स्मृतियां, उनका व्यक्तित्व और उनका किया हुआ सामाजिक योगदान लंबे समय तक लोगों के बीच जीवित रहेगा।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)

 

इसे भी पढ़ेः Dharmendra: जिंदादिल और शायर अभिनेता धर्मेंद्र की खूबसूरती को आखरी सलाम…!

ये भी देखेंः Piyush Pandey: शब्दों से जादू निकालते रहे पीयूष पांडे, अब कौन कहेगा – जहां तुम, वहां हम?

BJP Raj Purohit
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