Close Menu
  • होम
  • देश-प्रदेश
  • सत्ता- सियासत
  • व्यक्ति विशेष
  • समाज – संस्कृति
  • कारोबार
  • ग्लैमर
  • वीडियो
  • प्रेस रिलीज़
Facebook X (Twitter) Instagram
ट्रेंडिंग:
  • Vishwanath Sachdev: यूं ही कोई विश्वनाथ, सचदेव नहीं हो जाता…!
  • Rajasthan: दो नेताओं की सजह मुलाकात या अगले प्रदेश अध्यक्ष की तैयारी ?
  • Akshay Kumar: राजस्थान में फिल्म विकास पर मुख्यमंत्री से अक्षय कुमार की मुलाकात के मायने
  • Rajasthan Congress: बहुत कुछ ठीक करना होगा कांग्रेस को अपने घर में
  • Rajasthan Congress: नए जिलाध्यक्षों पर सवाल, बवाल और कांग्रेस का हाल
  • Dharmendra: जिंदादिल और शायर अभिनेता धर्मेंद्र की खूबसूरती को आखरी सलाम…!
  • Rajasthan: अगली सत्ता के लिए अभी से बीजेपी की रणनीति बनाम कांग्रेस की उलझन
  • Bihar: नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने दसवीं बार, मगर कंधों पर वादों का बहुत सारा भार
1st December, Monday, 1:48 AM
Facebook X (Twitter) Instagram
Prime Time BharatPrime Time Bharat
  • होम
  • देश-प्रदेश
  • सत्ता- सियासत
  • व्यक्ति विशेष
  • समाज – संस्कृति
  • कारोबार
  • ग्लैमर
  • वीडियो
  • प्रेस रिलीज़
Prime Time BharatPrime Time Bharat
Home»देश-प्रदेश»Congress: चुनाव हारना कोई राहुल गांधी से सीखे, ट्रोल पॉलिटिक्स नहीं दिलाती जीत
देश-प्रदेश 7 Mins Read

Congress: चुनाव हारना कोई राहुल गांधी से सीखे, ट्रोल पॉलिटिक्स नहीं दिलाती जीत

Prime Time BharatBy Prime Time BharatNovember 24, 2024No Comments
WhatsApp Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Reddit Tumblr Email
Rahul Gandhi Prime Time Bharat
Rahul-Gandhi-Prime-Time-Bharat-3
Share
WhatsApp Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

Congress: महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे कई कारणों से ऐतिहासिक हैं। महाराष्ट्र में बीजेपी एक अरसे से सबसे ताकतवर पार्टी बनना चाहती थी। अब ये हसरत पूरी हो गई है और चुनौतीपूर्ण चुनाव में पूरी हुई है। इस चुनाव में मराठा और गैर मराठा वोटों को साथ लाने का मुश्किल काम करने में बीजेपी सफल रही। अब तक के नतीजों के हिसाब से बीजेपी का स्ट्राइक रेट करीब करीब 85 से 90 पर्सेंट है। वोट प्रतिशत भी करीब 50 फीसदी तक होगा। यह ऐतिहासिक है।

महाराष्ट्र में अपना दबदबा बढ़ाने के लिए शतरंज की जितनी चालें चार-पांच साल में पार्टी ने चलीं, वो कामयाब रही। शिंदे को तोड़कर लाना। अजित पवार को साथ में लाना। एकनाथ शिंदे को अहमियत देना और ऐसे मुद्दे गढ़ना, जिसमें एक तरफ विकास और दूसरी तरफ उससे भी बड़ा महिला वोट बैंक सधे। इसने मिलकर कमाल किया। देखा जाए तो इस तरह की विजय की उम्मीद तो बीजेपी को खुद भी नहीं रही होगी।

Maharashtra Politics Prime Time Bharat
Maharashtra-Politics-Prime-Time-Bharat

Table of Contents

Toggle
  • एकनाथ शिंदे का क्या
  • विपक्ष के लिए सबक
  • सड़क पर नहीं, सोशल मीडिया पर सियासत
  • कांग्रेस से सवाल
  • उद्धव की विकास विरोधी राजनीति
          • -संजय पुगलिया

एकनाथ शिंदे का क्या

सवाल पूछे जा रहे हैं कि महाराष्ट्र में अकेले बहुमत के पास जा पहुंची बीजेपी अपने दोस्तों को भाव देगी क्या? बीजेपी जब बहुत बढ़िया से जीतकर आती है, तो वह गठबंधन धर्म निभाती रही है। बीजेपी का यह इतिहास रहा है।आने वाले दिनों में बीजेपी अपने साथियों को बहुत अच्छे से साथ रखे, तो इसमें अचरज नहीं होना चाहिए। इन चुनाव नतीजों के बाद अजित पवार और एकनाथ शिंदे के लिए भी यह जरूरी होगा कि बीजेपी के साथ बने रहने और विश्वास का संबंध बनाने के लिए काम करें। भले ही अब गठबंधन में शिंदे की उतनी जरूरत न दिख रही हो, लेकिन बीजेपी लॉन्ग टर्म पॉलिटिक्स करने वाली पार्टी है। अभी तक सुना जाता था कि महाराष्ट्र में सीनियर और जूनियर पार्टनर कौन है, लेकिन अब बीजेपी सीनियर पार्टनर बनकर आई है, इसलिए यह लगता नहीं कि दोस्तों से तालमेल में कोई बदलाव आएगा।आने वाले दिनों में यह बहुत मुमकिन है कि पावर शेयरिंग के लिए कोई अच्छा फॉर्मूला निकलकर आए।

चुनाव के दौरान शिंदे ने कहा कि अभी सीएम तय नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके चेहरे पर चुनाव लड़ा गया लेकिन इन बातों को आप दबाव की राजनीति कह सकते हैं। लेकिन ये गठबंधन की राजनीति में सामान्य बात है। बीजेपी की ऐतिहासिक जीत बीजेपी के लिए यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि बीजेपी ने पहली बार राज्य में इतनी सीटें जीती हैं। बीजेपी तीसरी बार 100 के पार पहुंची है। एनडीए के करीब 50 पर्सेंट के वोट शेयर में अगर 25 पर्सेंट से ज्यादा उसका वोट शेयर है, तो यह ऐतिहासिक नंबर है। जनमत को ईमानदारी से डिकोड किया जाए तो सीएम का पहला हक बीजेपी का बनता है। ऐसे में शिंदे को पीछे आना ही पड़ेगा। और वह खुशी से आते भी दिखाए देंगे। इस पर भी चौंकना नहीं चाहिए।

NarendraModi PrimeTimeBharat
NarendraModi_PrimeTimeBharat

विपक्ष के लिए सबक

यह चुनाव विपक्ष के नेताओं के लिए सबक है। लोकसभा चुनाव के बाद पूछा  जा रहा था कि बीजेपी को दलित, पिछड़े वोट मिलेंगे क्या? दलित वोट जो संविधान के नाम पर चले गए थे, उसका क्या होगा? महाराष्ट्र में वे सब वापस आते हुए दिखाई दे रहे हैं। बीजेपी, पीएम मोदी, अमित शाह, संघ, एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फणडवीस ने किस तरह से रणनीति बनाई, इस चुनाव में धूल चाट रहे नेताओं के लिए यह पीएचडी के रिसर्च का विषय होना चाहिए।

इस चुनाव का सबसे बड़ा सबक कांग्रेस के लिए है। चुनाव कैसे हारें यह राहुल गांधी से सीखना चाहिए। चुनाव प्रचार के दौरान राहुल ने क्या कहा, आज किसी को याद नहीं होगा। महाराष्ट्र की जनता से किया हुआ उनका कोई वादा शायद ही किसी के जेहन में ताजा हो। महाराष्ट्र कभी कांग्रेस मजबूत का गढ़ था। वो गढ़ अब ध्वस्त हो चुका है। इस चुनाव में शरद पवार ही थे, जिनके कारण कांग्रेस किसी तरह चुनाव लड़ पाई, नहीं तो उसकी क्या हैसियत थी, वह सभी जानते हैं।

सड़क पर नहीं, सोशल मीडिया पर सियासत

राहुल ऐसे मुद्दे पर लगे रहे जो जो सोशल मीडिया पर ट्रोल का मुद्दा था। जब नेता विपक्ष खुद को ही ट्रोल बना ले, सिंगल मुद्दा पार्टी बना ले, पूरे मीडिया में सनसनी फैलाने की कोशिश करे और फिर सोचे कि महाराष्ट्र तो निकल जाएगा, तो ऐसा नहीं हो सकता। महाराष्ट्र ने राहुल गांधी और कांग्रेस को ये सबक सिखाया है।

विदर्भ कभी कांग्रेस का गढ़ था। संघ का यहां मुख्यालय है। बीजेपी का कभी भी विदर्भ में ऐसा असर नहीं था, जो आज है। कांग्रेस को हारने की कला इतने शानदार तरीके से आती है कि यह इसका दूसरा उदाहरण है।

झारखंड में इंडिया गठबंधन भले ही सत्ता में वापसी कर रहा हो, लेकिन कांग्रेस वहां खुद कोई बहुत अच्छा नहीं कर पाई। इसलिए कांग्रेस पार्टी को यह सोचना पड़ेगा कि इस हकलाने वाले नेतृत्व के साथ वह कौन सी राजनीति कर रही है।

PriyankaGandhi RahulGandhi Prime Time Bharat1
PriyankaGandhi_RahulGandhi_Prime_Time_Bharat1

कांग्रेस से सवाल

आखिर क्या वजह थी कि कांग्रेस को महाराष्ट्र से ज्यादा ताकत वायनाड में झोंकनी पड़ी? वायनाड एक जीता हुआ चुनाव था, लेकिन कांग्रेस का पूरा कैडर अपने नेता को वहां चेहरा दिखाने के लिए जुटा था। यही सारे कारक हैं कि महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी के लिए सबसे बुरी खबर बन गया है। यह कांग्रेस के ध्वस्त होने की खबर है। राहुल गांधी के पूरी तरह फेल होने का संदेश इस जनादेश में छिपा है।

कांग्रेस के पुराने बीट रिपोर्टर के तौर पर मैं कह सकता हूं कि राहुल गांधी जिस सियासी रास्ते पर चल रहे हैं, वह साजिश की पॉलिटिक्स है, ट्रोल की पॉलिटिक्स है, यह पॉलिटिक्स वोट दिलाने वाली नहीं है। दरअसल बीजेपी और संघ का नेतृत्व राहुल गांधी को अपनी पार्टी का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने के लिए शुक्रिया अदा कर रहे होंगे। बीजेपी की चुनाव लड़ने की महारथ से कांग्रेस ऐसे जमींदोज हुई है कि यह चुनाव राहुल गांधी के फेल होने का सबसे बड़े सबूत और मिसाल के तौर पर भी याद किया जाएगा।

Vinod Tawde Prime Time Bharat
Vinod-Tawde-Prime-Time-Bharat

उद्धव की विकास विरोधी राजनीति

चुनाव में उद्धव ठाकरे की भी हालत भी देखिए। बाला साहेब ठाकरे की विरासत को उन्होंने कैसे निभाया, यह भी देखने और समझने की जरूरत है। उनकी बातों में भी कर्कशपना था। विकास विरोधी बात कर रहे थे। प्रांतवाद को फैलाने की बातें करते थे। अब कांग्रेस गुजरात में जाकर कैसे वोट मांगेगी, यह भी देखने वाली चीज होगी। बाला साहेब ठाकरे के नाम पर कैसे उद्धव ठाकरे अपनी राजनीति को आगे बढ़ाएंगे, यह भी देखने वाली बात होगी। महाराष्ट्र में राज करने वालीं ये पार्टियां 20-20 सीटों की पार्टियां बनकर रह गई हैं।

लोकतंत्र में विपक्ष को भी मजूबत होकर उभरना चाहिए। लेकिन जब विपक्ष के मुद्दे विकास विरोधी, देश विरोधी, कारोबार विरोधी हो जाएं और जनता के मुद्दे वो उठाना बंद कर दे तो भी यह स्थिति आती ही  है। महाराष्ट्र के इस बड़े झटके के बाद कांग्रेस पार्टी अभी भी जागेगी, इसमें संदेह है।क्योंकि जब तक राहुल गांधी का नेतृत्व है, कांग्रेस धराशायी होती रहेगी। कांग्रेस को अगर लगता है कि वह 2029 को भी इस ट्रोल पॉलिटिक्स के सहारे जीत जाएगी, तो उसे भूल जाना चाहिए।

-संजय पुगलिया

(लेखक ‘एनडीटीवी’ के समूह संपादक हैं, उनके ये विचार वहीं से साभार)

ये भी पढ़िएः Maharashtra Assembly Election: बीजेपी गठबंधन की महाराष्ट्र में प्रचंड जीत को ऐतिहासिक कहा पीएम मोदी ने

यह भी पढ़ेंः Baramati: शरद पवार और अजीत पवार के लिए क्या जरूरी…? राजनीति या परिवार?

 

Congress
Share. WhatsApp Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram Email
Prime Time Bharat

Related Posts

Vishwanath Sachdev: यूं ही कोई विश्वनाथ, सचदेव नहीं हो जाता…!

November 30, 2025

Rajasthan: दो नेताओं की सजह मुलाकात या अगले प्रदेश अध्यक्ष की तैयारी ?

November 29, 2025

Akshay Kumar: राजस्थान में फिल्म विकास पर मुख्यमंत्री से अक्षय कुमार की मुलाकात के मायने

November 28, 2025

Leave A Reply Cancel Reply

टॉप ख़बरें

Vishwanath Sachdev: यूं ही कोई विश्वनाथ, सचदेव नहीं हो जाता…!

November 30, 2025

सिनेमा से गायब राजमहल और राजा-रानी

October 28, 2023

फिर जनम लेने जयपुर आ जाना इरफान!

October 28, 2023

पाप के पुरुषार्थ का रंगमंच बना सोशल मीडिया !

December 26, 2023
यह भी देखें
देश-प्रदेश
4 Mins Read

Hathras stampede: हाथरस हादसे से आई जोधपुर की याद, भगदड़ में मरे थे 216 लोग, जांच रिपोर्ट 16 साल बाद भी नहीं

By Prime Time BharatJuly 4, 2024

Hathras stampede: भारत ने 2 जुलाई को एक और भयावह त्रासदी देखी, जब उत्तर प्रदेश…

संसदीय लोकतंत्र में सिनेमा के सितारों की उपस्थिति

October 20, 2023

मीडिया यानी अपने ही बोझ से भारी होता हाथी

October 20, 2023

Ram Mandir: यूपी में कांग्रेस की जमीन है, लेकिन क्या अविनाश पांडे फिर से कोई उम्मीद जगा पायेंगे?

January 9, 2024
हमें फॉलो करें
  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • Instagram
  • YouTube
  • Vimeo
About Us
About Us

‘प्राइम टाइम’ की शुरुआत पर कोई बड़ी बात नहीं, मगर यह कहना जरूरी है कि इसके उद्भव के लिए हमें एक बड़ी मजबूरी में सोचना पड़ा। मजबूरी यही कि हमारे हिंदुस्तान में वास्तविक अर्थों में जैसी होनी चाहिए, वैसी पत्रकारिता का मार्ग तेजी से सिकुड़ रहा है।

Contact Us:-
Mobile:- +91-9821226894
Email:- contact@primetimebharat.com

Facebook X (Twitter) Pinterest YouTube WhatsApp
Pages
  • About us
  • Our Team
  • Contact Us
  • Cookies Policy
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
लेटेस्ट ख़बरें

Vishwanath Sachdev: यूं ही कोई विश्वनाथ, सचदेव नहीं हो जाता…!

November 30, 2025

Rajasthan: दो नेताओं की सजह मुलाकात या अगले प्रदेश अध्यक्ष की तैयारी ?

November 29, 2025

Akshay Kumar: राजस्थान में फिल्म विकास पर मुख्यमंत्री से अक्षय कुमार की मुलाकात के मायने

November 28, 2025
© 2025 Prime Time Bharat | All Rights Reserved |

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.