Rajasthan News: राजस्थान में सर्दी के मौसम में कंबल वितरण के कार्यक्रम ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। विवाद के केंद्र में है बीजेपी (BJP) के पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया (Sukhbeer Singh Jaunapuria)। जिनके बारे में कहा जा रहा है कि कंबल वितरण कारयक्रम में उन्होंने एक मुस्लिम महिला को दिया हुआ कंबल वापस ले लिया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को गाली देने वालों को यह लेने का अधिकार नहीं है। मामला 22 फरवरी का है। टौंक जिले के निवाई तहसील के करेड़ा गांव में पूर्व सांसद जौनापुरिया द्वारा कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम (Muslim) महिलाएं भी वहां कंबल लेने पहुंची थीं। कंबल वापस लेने के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर गरमा गया। राजस्थान की सियासत में एक बार फिर संवेदनशीलता और बयानबाज़ी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने पूर्व सांसद के इस आचरण की निंदा की है और राजनीतिक विश्लेषक इसे ध्रुवीकरण की राजनीति मान रहे हैं।
वीडियो में दिख रही है सारी सच्चाई
राजस्थान की राजनीति में, बीजेपी के पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया के एक कंबल वितरण कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि कंबल वितरण के दौरान पूर्व सांसद ने महिला का नाम पूछा और यह कहते हुए कंबल वापस रखने को कहा कि जो लोग प्रधानमंत्री को गाली देते हैं, उन्हें कंबल लेने का अधिकार नहीं है, यह चाहे किसी को बुरा लगे तो लगे। इसके साथ ही महिला से एक तरफ हटने और कंबल वहीं छोड़ देने को कहा गया। वीडियो सामने आते ही यह सवाल उठने लगे कि क्या किसी जरूरतमंद की मदद को उसकी राजनीतिक या वैचारिक पहचान से जोड़ना उचित है? मामले पर सफाई देते हुए सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया ने कहा कि कार्यक्रम में अनुशासन और सम्मान बनाए रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का समर्थन करने वालों को इस तरह के आयोजनों से दूर रखा जाना चाहिए। हालांकि, इस बयान ने विवाद को शांत करने के बजाय और भड़का दिया। घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूज़र्स ने इसे गरीबों और अल्पसंख्यकों के अपमान से जोड़ते हुए कड़ी आलोचना की। वहीं कुछ समर्थकों ने सांसद के बयान का बचाव करते हुए कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में अनुशासन और राष्ट्र के शीर्ष पद का सम्मान जरूरी है। हैशटैग्स के ज़रिए यह मुद्दा प्रदेश से निकलकर राष्ट्रीय बहस का रूप लेने लगा।

राजनीतिक लाभ में इंसानियत पीछे छूट जाती है
सुखबीर सिंह जौनापुरिया जहां के सांसद रहे हैं, वह टोंक इलाका मुस्लिम बहुत माना जाता है। कांग्रेस के नेता सचिन पायलट टोंक से ही विधायक हैं। राजस्थान के जाने माने चिंतक और विश्लेषक त्रिभुवन इस घटना को केवल राजनीतिक या सामाजिक विवाद के रूप में ही नहीं देखते। त्रिभुवन कहते हैं कि किसी ज़रूरतमंद को उसकी आस्था के आधार पर मदद से वंचित करना सिर्फ़ भेदभाव नहीं, बल्कि सहज मानवीय सहानुभूति की कमी का प्रमाण है। वे कहते हैं कि इससे राजनीति में जीत भले मिलती हो, लेकिन इन्सानियत पीछे छूट जाती है।राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार का मानना है कि इस तरह की घटनाएं राजनीतिक ध्रुवीकरण को और तेज करती हैं। परिहार मानते हैं कि राजनीति रूप से ये घटना शुदद् रूप से समाज को विभाजित करती है, जो कि आजकल दोनों तरफ से हो रहा है। वरिष्ठ पत्रकार अरविंद चोटिया कहते हैं कि जौनापुरिया का असली मक्सद कुछ और था, जो सोशल मीडिया से हल हो रहा है। चोटिया कहते हैं कि अगर, मुस्लिम महिलाओं को केवल कंबल नहीं देना होता तो कार्यकर्ताओं को चुपचाप उन्हें हटाने के लिए कहा जा सकता था,, लेकिन इससे उनका वह उद्देश्य पूरा नहीं होता, जो अब हो गया है।
विपक्ष का तीखा हमला, कांग्रेस बोली – अमानवीय
राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने इस घटना को अमानवीय और विभाजनकारी करार दिया। उन्होंने कहा कि सर्दी में कंबल किसी की जान बचा सकता है और उसे धर्म या राजनीतिक निष्ठा से जोड़ना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। जूली ने भी इस घटना का वीडियो साझा करते हुए पूर्व सांसद की कार्यशैली की आलोचना की है। उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण आचरण बताते हुए कहा कि एक जनप्रतिनिधि रह चुका व्यक्ति इस प्रकार का व्यवहार करे, यह निंदनीय है। टोंक के सांसद व कांग्रेस नेता हरिशचंद्र मीणा ने कहा है कि गरीब और असहाय महिलाओं को कंबल देकर फिर उनका नाम पूछकर, उनके धर्म के आधार पर कंबल वापस लेना, यह बेहद शर्मनाक और अमानवीय कृत्य है। दरअसल, कंबल वितरण जैसे मानवीय कार्यक्रम का इस तरह विवादों में घिरना यह सवाल खड़ा करता है कि सामाजिक सहायता की सीमा और राजनीति की रेखा आखिर कहां खिंची जानी चाहिए। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भाजपा नेतृत्व इस मामले पर क्या कदम उठाता है और क्या यह विवाद प्रदेश की राजनीति में कोई बड़ा असर डालता है।
-राकेश दुबे (वरिष्ठ पत्रकार)
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