AISummit: नई दिल्ली में हुई एआई सम्मिट अपने समापन के साथ ही कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP) के बीच जंग का मैदान बन गई है। एआई सम्मिट में दुनिया भर से आए प्रमुख लोगों के सामने युवक कांग्रेस के द्वारा किए गए शर्टलैस प्रदर्शन ने देश की राजनीति में तीखी बहस छेड़ दी है। भारत में अब तक हुए वैश्विक आयोजनों में एआई सम्मिट (AISummit) सबसे प्रमुख कार्यक्रम माना जा रहा है। इसी दौरान हुए कांग्रेस इस प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी ने इसे राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के इशारे पर किया गया शर्मनाक, गैर-जिम्मेदाराना और भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य करार दिया है। इस घटना के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कई राज्यों में राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। देश की राजधानी नई दिल्ली से लेकर राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी कांग्रेस पार्टी के कार्यालयों के बाहर नारेबाजी हुई और कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग की गई। बीजेपी का आरोप है कि ऐसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का नग्न विरोध न केवल कूटनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि दुनिया के सामने भारत की साख पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
बीजेपी का कांग्रेस के प्रति आक्रामक रुख
बीजेपी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस और खासतौर पर राहुल गांधी को कठघरे में खड़ा किया है। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी का कहना है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार ऐसे कदम उठा रही है, जिनसे भारत की छवि विदेशों में धूमिल होती है। बीजेपी नेता और हरियाणा के प्रभारी डॉ सतीश पूनिया का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि राष्ट्र की गरिमा से जुड़ा विषय है। पूनिया का कहना है कि जब पूरा विश्व भारत को तकनीक और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देख रहा है, तब कांग्रेस की यह हरकत राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी राहुल गांधी विदेशी मंचों पर भारत के लोकतंत्र, संस्थाओं और नीतियों को लेकर विवादास्पद बयान देते रहे हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या राजनीतिक विरोध के नाम पर देश की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाना उचित है।
लोकतंत्र में विरोध जरूरी बता रही है कांग्रेस
कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी का कहना है कि युवक कांग्रेस का प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार के तहत था और इसका उद्देश्य सरकार का ध्यान कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर आकर्षित करना था। कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठोड़ का तर्क है कि बीजेपी इस घटना को अनावश्यक रूप से तूल देकर असल मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है। राठोड़ ने यह भी कहा कि बीजेपी हर विरोध को देशविरोधी करार देने की आदत डाल चुकी है। सांसद डांगी का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने भी यह स्पष्ट किया कि पार्टी भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस तरह के आरोप राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं।

वैश्विक मंच को विवादास्पद बनाने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के प्रश्न पर राजनीतिक दलों को कितनी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। एआई सम्मिट जैसे महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं का शर्टलैस प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर भारत की छवि के समर्थन में तो नहीं कहा जा सकता। परिहार कहते हैं कि भले ही विरोध लोकतंत्र का हिस्सा हो, लेकिन मंच और समय का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है। देश के जाने माने राजनीतिक चिंतक एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह का कहना है कि यह कृत्य योजनाबद्ध तरीके से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को असहज स्थिति में डालने का प्रयास था। प्रदीप सिंह का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर होने वाले किसी भी प्रकार के प्रदर्शन को लेकर अतिरिक्त संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार संदीप सोनवलकर के अनुसार, इस तरह की घटनाएं अक्सर राजनीतिक दलों को अल्पकालिक लाभ तो दिला सकती हैं, लेकिन दीर्घकाल में देश की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
सियासत गरम मगर राजनीतिक निष्कर्ष नहीं
एआई सम्मिट में दुनिया भर से तकनीक, नीति और निवेश से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए थे। ऐसे मंच को भारत अपनी तकनीकी प्रगति, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व के प्रदर्शन के अवसर के रूप में देख रहा है। फिलहाल यह मुद्दा देश की राजधानी से लेकर प्रदेशों की सड़कों तक गर्माया हुआ है। बीजेपी जहां इसे कांग्रेस की गैर-जिम्मेदार राजनीति बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दे रही है। एआई सम्मिट जैसे वैश्विक मंच पर हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राजनीतिक विरोध की सीमा क्या होनी चाहिए और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के प्रश्न पर दलों को कितनी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज हो सकता है। सियासी बयानबाजी, प्रदर्शन और वाद – प्रतिवाद के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहता है या इससे आगे कोई ठोस राजनीतिक निष्कर्ष निकलता है।
-आकांक्षा कुमारी
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