Ajit Pawar: दादा, आज जब मैं यह ख़त लिखने बैठा हूं, तो शब्द गले में अटके रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे बारामती (Baramati) के आसमान में वह विमान हादसा (Plane Crash) हो गया था। खबर आई है कि अब अजित पवार (Ajit Pawar) नहीं रहे। यकीन मानिए, यह वाक्य लिखने में मुझे उतनी ही तकलीफ हो रही है, जितनी किसी पहाड़ को अपनी ही तलहटी में दरकते हुए देखने पर होती है। राजनीति के गलियारों में शोर बहुत होता है, वहां हर रोज नए नारे गढ़े जाते हैं, लेकिन आज जो खामोशी महाराष्ट्र की हवाओं में तैरी है, वह किसी भी नारे से ज्यादा भारी है। यह खामोशी उस वैक्यूम की तरह है जो किसी विशाल बरगद के पेड़ के अचानक गिर जाने के बाद जंगल में पैदा हो जाता है। आप महाराष्ट्र की राजनीति की वह ‘घड़ी’ थे, जिसकी सुइयां कभी रुकती नहीं थीं, चाहे वक्त कैसा भी हो। लोग कहते थे कि आप सत्ता के खेल के माहिर खिलाड़ी थे, लेकिन मुझे लगता है कि आप उस नदी की तरह थे जो अपना रास्ता खुद बनाती है, भले ही उसे पहाड़ काटने पड़ें। आज वह नदी अचानक किसी अदृश्य समंदर में विलीन हो गई। मुझे याद आता है वह दौर जब आपने राजनीति के क्षितिज पर अपना पहला कदम रखा था। बारामती की मिट्टी से उठकर मंत्रालय की ऊंची कुर्सियों तक का आपका सफर किसी सीधी रेखा जैसा नहीं था।

न कोई अलविदा, न कोई आखिरी भाषण, बस एक धमाका…
राजनीति शतरंज की बिसात है, यह सब जानते हैं। लेकिन आपने इस खेल को कभी खेल की तरह नहीं, बल्कि एक ‘युद्ध-कला’ की तरह जिया। आपके फैसले अक्सर चौंकाने वाले होते थे। कभी-कभी लगता था कि आप हवा के रुख के खिलाफ कश्ती चला रहे हैं, लेकिन फिर किनारे पर पहुंचकर आप सबको गलत साबित कर देते थे। रिश्तों की डोर और राजनीति की रस्साकशी के बीच आपने जो संतुलन बनाने की कोशिश की, वह नटराज के नृत्य जैसा था–सुंदर लेकिन बेहद मुश्किल। ‘पवार’ उपनाम एक विरासत भी था और एक वजन भी। उस वजन को कंधों पर उठाए हुए आपने दशकों तक महाराष्ट्र की गाड़ी को खींचा। चाचा (शरद पवार) के साथ आपके रिश्ते किसी धूप-छांव के खेल जैसे रहे। कभी आप उनकी लाठी बने, तो कभी आपने उसी लाठी को थामने से इनकार कर दिया। यह द्वंद्व सिर्फ एक परिवार का नहीं था, यह दो पीढ़ियों के बीच का, दो विचारधाराओं के बीच का, और शायद दो अलग-अलग तरह के प्रेम के बीच का द्वंद्व था। आज जब आप चले गए हैं, तो वह आंगन सूना हो गया है जहां इन मतभेदों के बावजूद एक साझा इतिहास सांस लेता था।आज सुबह का वह हादसा… कितना निष्ठुर है यह वक्त। एक लोहे का परिंदा, जो आपको मंजिल तक ले जाने वाला था, वही आपकी आखिरी यात्रा का रथ बन गया। आसमान ने आपको ऐसे निगल लिया जैसे समंदर किसी कीमती मोती को अपनी गहराइयों में छिपा लेता है। न कोई अलविदा, न कोई आखिरी भाषण, न कोई संकेत। बस एक धमाका और फिर… अनंत शांति। मुझे लगता है कि आसमान शायद आपकी ऊर्जा से जलने लगा होगा, इसीलिए उसने आपको अपने में समाहित कर लिया। आपके जाने से जो समीकरण बिगड़े हैं, उन्हें सुलझाने में शायद सालों लग जाएं। विपक्ष हो या सत्ता पक्ष, हर किसी ने आज एक ऐसा योद्धा खो दिया है, जो सामने से वार करना जानता था। पीठ पीछे की साजिशें आपके स्वभाव में नहीं थीं। आप उस खुली किताब की तरह थे, जिसके कुछ पन्ने फटे जरूर थे, लेकिन जो लिखा था, वह स्याही से नहीं, पसीने से लिखा गया था।

कहानी का सबसे दिलचस्प किरदार मंच छोड़कर चला गया
मौत एक ऐसा पूर्णविराम है, जो वाक्य के खत्म होने का इंतजार नहीं करती। वह बीच शब्द में ही आ जाती है। आपके साथ भी यही हुआ। अभी तो बहुत कुछ करना बाकी था। अभी तो कई राजनीतिक दांव बाकी थे। अभी तो कई चुनाव लड़ने थे, कई रैलियां करनी थीं। लेकिन नियति के अपने ही प्लान होते हैं। उसने आपको रिटायर होने का मौका ही नहीं दिया। अब आप जमीन पर नहीं, यादों में सफर करेंगे। मैं सोच रहा हूं कि अब जब आप उस दूसरी दुनिया में जाएंगे, तो वहां भी क्या कोई गठबंधन बनाएंगे? क्या वहां भी आप अपनी शर्तों पर सरकार चलाएंगे? वहां, जहां फरिश्ते रहते हैं, शायद उन्हें भी आपकी प्रशासनिक क्षमता की जरूरत पड़े। आप वहां भी सुस्त नहीं बैठेंगे, मुझे यकीन है। आप वहां भी बादलों को कतार में खड़ा कर देंगे और हवाओं को समय पर चलने का आदेश देंगे। हम जैसे लोगों के लिए आप एक पहेली थे–कभी विलेन, कभी हीरो। लेकिन आज जब आप नहीं हैं, तो यह महसूस हो रहा है कि कहानी का सबसे दिलचस्प किरदार मंच छोड़कर चला गया है। नाटक अभी बाकी है, लेकिन रोशनी मंदी पड़ गई है। मेरी श्रद्धांजलि उन सभी सपनों को है जो आपकी आंखों में थे और अधूरे रह गए। मेरी श्रद्धांजलि उस ऊर्जा को है जो अब ब्रह्मांड में विलीन हो गई है। मेरी श्रद्धांजलि उस ‘पवार’ को है, जिसने अपनी अलग लकीर खींची और उसे इतना गहरा कर दिया कि उसे मिटाना नामुमकिन है। अलविदा, दादा।
ख़त लिखने वाला लड़का, चाय इश्क़ और राजनीति…
संबंधित समाचारः Ajit Pawar: विमान हादसे के शिकार हो गए अजित पवार, बारामती पहुंचते ही क्रेश हुआ विमान
इसे भी पढ़ेः Air India Plane Crash Vijay Rupani: सरल और विरल विजय रूपाणी का दुनिया से विदा होना

