Drugs: राजस्थान की पहचान बदल रही है। युवा पीढ़ी ड्रग्ज के जाल में है। शराब, अफीम और पोस्त डोडा का नशा पीछे छूट गया। अब सूखा नशा चलन में है। राजस्थान (Rajasthan) में रेत, खेत और खलिहान वाले इलाकों में अब ड्रग्स (Drugs) की फसल लहलहा रही है। हर हफ्ते नई खबर सामने आ रही है। कहीं छापे, कही बरामदगी और कहीं तो पूरी की पूरी फैक्ट्री ही पर धावा। हालात ये हैं कि राजस्थान पुलिस, राजस्थान एंटी नारकोटिक्स फोर्स और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की कार्रवाई में हर साल सैकड़ों करोड़ों रुपये की ड्रग्स पकड़ी जा रही है। ड्रग्ज माफिया पर कार्रवाई के ज्ञात आंकड़ों के अनुसार, 2022 में 3740 मामले दर्ज हुए, जबकि 2024 में 5246 और 2025 के शुरूआती केवल जनवरी महीने में ही 1210 से अधिक मामले दर्ज करके 1393 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। आंकड़े डराने वाले हैं। सत्ता में बैठे लोग चिंता करें। अफसर चिंतन करें। विधायक – सांसद सत्ता से सवाल करें कि आखिर क्यों बढ़ रहा है ड्रग्स का शिकंजा। सरकार अब भी अगर नहीं जागी, तो आने वाले कुछ ही वक्त में, समूचा राजस्थान बुरी तरह से ड्रग्स की जद में होगा।
जगह – जगह ड्रग्ज फैक्ट्री पर धावा
ड्रग जब्ती में सीमावर्ती राज्यों में सबसे आगे रहा है, जहां पिछले साल 2025 में में कुल 2.25 लाख किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए। बाड़मेर में हाल ही में 234 किलो ड्रग्ज मेकिंग केमिकल पकड़ा गया। प्रतापगढ़ में एक ड्रग तस्कर की 2.50 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज हुई। जोधपुर के लूणावपुरा गांव में खेत में बनी फैक्ट्री में ड्रग्ज निर्माताओं की फायरिंग के बावजूद 176 किलो से अधिक ड्रग्स बरामद की गई। सिरोही के दांतराई में खेत में अवैध ड्रग्ज लैब से 40 करोड़ रुपये का ड्रग मेकिंग केमिकल जब्त हुआ और पांच लोग गिरफ्तार किए गए। दौसा में केवल एक ही वर्ष 2025 में कुल 55 करोड़ रुपये से अधिक के नशीले पदार्थ जब्त किए। झालावाड़ में ड्रग्स की फैक्ट्री पकड़ी गई। झुंझुनू में दिसंबर 2025 में अवैध ड्रग फैक्ट्री से 100 करोड़ की ड्रग्स जब्त की। बीकानेर के गंगाशहर से 22 हजार प्रतिबंधित नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए। गंगानगर में पंजाब सीमा के पास से 1.5 किलोग्राम हेरोइन, अफीम और हथियार के साथ पंजाब के तस्करों को गिरफ्तार किया।

मारवाड़ में बढ़ता ड्रग्ज का कारोबार
हाल ही के वर्षों में मारवाड़ इलाके के जोधपुर, बाड़मेर, बालोतरा पाली और सिरोही में सिंथेटिक ड्रग्स बनाने वाली कई फैक्ट्रियां पकड़ी गईं। 2023 और 2024 में राजस्थान पुलिस ने मारवाड़ क्षेत्र में एमडी ड्रग्स और स्मैक के कई बड़े नेटवर्क का खुलासा किया। बाड़मेर और जैसलमेर जैसे सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान सीमा से हेरोइन और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के मामले लगातार सामने आए। राजस्थान पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अकेले जोधपुर रेंज में सैकड़ों मामले दर्ज हुए और हजारों किलो डोडा-पोस्त, अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स जब्त की गईं। नागौर जिले के कुछ कस्बों, पाली के औद्योगिक क्षेत्रों और बालोतरा के आसपास के इलाकों और सिरोही जिले में भी ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं।
बिना संरक्षण ड्रग्ज कारोबार असंभव
ड्रग्ज के बढ़ते नेटवर्क के पीछे कानून, व्यवस्था और भ्रष्टाचार का मुद्दा भी गंभीर है।राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार मानते हैं कि स्थानीय स्तर पर बिना संरक्षण के इतना बड़ा नेटवर्क संभव नहीं माना जाता। परिहार का कहना है कि राजनीति, पुलिस और प्रशासन में बैठे कुछ भ्रष्ट तत्वों से तस्करों को राहत मिलती है, यह हर रोज आ रही खबरों से साबित भी हो रहा है। परिहार कहते हैं कि इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। विधायक, सांसद और स्थानीय जनप्रतिनिधि जिस क्षेत्र से वे चुनकर आते हैं, वहां युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना भी उनकी जिम्मेदारी है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश चोपड़ा कहते हैं कि जनप्रतिनिधियों को गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाने चाहिए, स्कूलों और कॉलेजों में नशा मुक्ति कार्यक्रम शुरू कराने चाहिए और पुलिस-प्रशासन पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाना चाहिए। चोपड़ा कहते विधायक और सांसद अपने क्षेत्रों में नियमित जनसंवाद और निगरानी तंत्र बनाएं तो इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

सामाजिक संकट बना नशे का कारोबार
बड़ा खतरा यह है कि राजस्थान अब केवल ट्रांजिट रूट नहीं, ड्रग्स का उपभोक्ता बनता जा रहा है। गांवों तक नशे की पहुंच बढ़ चुकी है। बेरोजगारी, तेजी से बदलती जीवनशैली और सोशल मीडिया पर नशे को फैशन की तरह दिखाना भी इस समस्या को बढ़ा रहा है। ड्रग्स समस्या केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि यह सामाजिक संकट बन चुकी है। जरूरत यह है कि सरकार, पुलिस, सामाजिक संगठन, धार्मिक संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इसके खिलाफ अभियान चलाएं। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई, राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामाजिक जागृति नहीं आई, तो राजस्थान में ड्रग्ज का यह संकट आने वाले वर्षों में और भयावह रूप ले सकता है। यह केवल अपराध की लड़ाई नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बचाने की लड़ाई है।
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आकांक्षा कुमारी
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