Gold Import Duty: भारत में गोल्ड फिर से बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अपील और उसके तुरंत बाद गोल्ड आयात शुल्क ( Gold Import Duty) में भारी बढ़ोतरी ने देश की अर्थव्यवस्था, ज्वेलरी कारोबार और आम उपभोक्ताओं के बीच नई बहस छेड़ दी है। सरकार ने अब गोल्ड (Gold) और सिल्वर के आयात पर प्रभावी टैक्स 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। भारत सरकार ने 24 जुलाई 2024 को गोल्ड पर कुल इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) को 15% से घटाकर 6% कर दिया गया था, जिसे अब फिर से बढा दिया है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने भी संकट को और गहरा किया है। रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान – अमेरिका से जुड़े तनावों के कारण दुनिया भर के निवेशकों ने गोल्ड को सुरक्षित निवेश माना है। इसी वजह से पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमतों में भारी उछाल आया है। भारत (India) सरकार का मानना है कि इससे विदेशों से होने वाली गोल्ड-सिल्वर की खरीद कम होगी और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा दबाव घटेगा।
गोल्ड इंपोर्ट बढ़ा, सरकारी घाटा भी बढ़ा
पिछले कुछ वर्षों में भारत का गोल्ड इंपोर्ट लगातार तेजी से बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में देश का गोल्ड इंपोर्ट 71 अरब डॉलर के पार पहुंच गया, जो कच्चे तेल के बाद भारत के आयात बिल का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा बन चुका है। केवल 2024-25 में ही भारत ने 51.4 बिलियन डॉलर का गोल्ड आयात किया, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 45.54 बिलियन डॉलर था। यानी एक साल में लगभग 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। गोल्ड की बढ़ती खरीद का सीधा असर देश की विदेशी मुद्रा पर पड़ता है, क्योंकि इसके लिए भारत को भारी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया कमजोर होता है और चालू खाता घाटा भी बढ़ता है। यही कारण है कि सरकार अब गोल्ड के आयात को केवल एक व्यापारिक गतिविधि नहीं, बल्कि आर्थिक संतुलन से जुड़ा विषय मान रही है।

पीएम की अपील, विदेशी मुद्रा बचाना जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही देशवासियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा था कि देशहित में कम से कम एक साल तक गोल्ड के गहनों की खरीद से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले संकट के समय लोग देश के लिए गोल्ड दान कर देते थे, लेकिन अब आवश्यकता केवल इतनी है कि लोग कुछ समय के लिए गोल्ड खरीदने से परहेज करें ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके। प्रधानमंत्री ने इसे देशभक्ति से जोड़ते हुए कहा कि विदेशी मुद्रा बचाना आज की राष्ट्रीय आवश्यकता है। सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर अब घरेलू बाजार में दिखाई देने लगा है। आयात शुल्क बढ़ने से विदेशों से आने वाला गोल्ड और सिल्वर महंगे दाम पर भारत पहुंचेगा। इसका असर ज्वेलर्स, व्यापारियों और अंततः आम ग्राहकों पर पड़ेगा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमतों पर इस फैसले का असर नहीं होगा, लेकिन भारत में गोल्ड-सिल्वर के दाम और बढ़ सकते हैं।
रिटर्न बढ़ा, तो शेयर से गोल्ड में झुकाव
प्रधानमंत्री की अपील और नई ड्यूटी के बाद ज्वैलरी कारोबार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज हुई। टाइटन, कल्याण ज्वैलर्स और राजेश एक्सपोर्ट्स जैसी कंपनियों के शेयर दो दिनों में 10 से 15 प्रतिशत तक टूट गए। बाजार को आशंका है कि ऊंची कीमतों और सरकारी अपील के कारण ग्राहकों की मांग कमजोर पड़ सकती है। भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश के लिए इसका मतलब है और अधिक आयात बिल तथा विदेशी मुद्रा पर बढ़ता दबाव। खास बात यह है कि पिछले एक साल में शेयर बाजार से कमजोर रिटर्न मिलने के कारण निवेशकों का झुकाव तेजी से गोल्ड की ओर बढ़ा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक मार्च तिमाही में भारत के गोल्ड ईटीएफ में निवेश पिछले साल की तुलना में 186 प्रतिशत बढ़ गया। यानी अब लोग गोल्ड को केवल गहनों के रूप में नहीं, बल्कि निवेश के सुरक्षित विकल्प के रूप में भी देख रहे हैं।
ताकि विदेशी मुद्रा सुरक्षित और रुपया स्थिर रहे
अर्थशास्त्री मानते हैं कि गोल्ड सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं है। फिर भी खपत बहुत ज्यादा होने से देश गोल्ड आयात करता है तो विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा उसमें जाता है, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ता है और रुपया कमजोर पड़ता है। यही वजह है कि आर्थिक दबाव के दौर में सरकारें अक्सर गोल्ड के आयात को नियंत्रित करने की कोशिश करती हैं। भारत पहले भी ऐसे कदम उठा चुका है। बीते वर्षों में सरकारों के प्रयासों का मकसद हमेशा एक ही रहा है कि विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना और रुपये को स्थिर बनाए रखना। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री की अपील और सरकार की सख्त नीति देशवासियों की खरीदारी की आदतों में कितना बदलाव ला पाती है। क्योंकि भारत में गोल्ड केवल निवेश नहीं, बल्कि परंपरा, प्रतिष्ठा और भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है।
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साक्षी त्रिपाठी
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