Rajasthan: देश के सबसे बड़े प्रदेश राजस्थान का युवा आज एक अजीब त्रासदी जी रहा है। हाथ में डिग्री है। जेब में उम्मीद है। लेकिन सामने नौकरी नहीं है। बेरोजगारी में राजस्थान देश में दूसरे नंबर पर है। यह केवल बेरोजगारी (Unemployment) नहीं है। यह एक पूरी पीढ़ी की बेचैनी है। राजस्थान (Rajasthan) की आबादी लगभग 8 करोड़ है। इनमें से बड़ी संख्या युवा वर्ग की है। करीब 2.7 करोड़ युवा मतदाता राज्य की राजनीति और अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाते हैं। लेकिन यही युवा आज रोजगार के लिए भटक रहा है। आंकड़े बताते हैं कि संकट बहुत गहरा है। अलग-अलग एजेंसियों के अनुसार राजस्थान में बेरोजगारी दर कई बार देश में सबसे ज्यादा रही है। कुछ आकलनों में 28 प्रतिशत तक पहुंची बताई गई। यानी हर चार में से एक युवा के पास काम नहीं। सरकारी सर्वे थोड़ा नरम तस्वीर दिखाते हैं, लेकिन जमीन की हकीकत उनसे अलग है। रोजगार कार्यालयों के रिकॉर्ड में करीब 23 लाख से अधिक बेरोजगार युवा दर्ज हैं। ज्यादातर ग्रामीण हैं और इनमें से 14 लाख से ज्यादा स्नातक और उससे अधिक पढ़े-लिखे हैं। इसी ज्वलंत मुद्दे पर बेरोजगारों के नेता हनुमान किसान, राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार अरविंद चोटिया और युवा मामलों के जानकार अशोक भाटी से हुई बातचीत का विश्लेषण –
छोटी नौकरी, बड़ी डिग्री, फिर भी काम नहीं
राजस्थान में भर्तियों का दृश्य कभी-कभी बेहद विडंबनापूर्ण लगता है। चपरासी के कुछ सौ पद निकलते हैं। लाखों आवेदन आ जाते हैं। उन आवेदनों में इंजीनियर भी होते हैं। एमबीए भी होते हैं। पीएचडी तक के उम्मीदवार भी होते हैं। यानी शिक्षा का स्तर ऊपर गया, लेकिन रोजगार का ढांचा वहीं खड़ा रह गया। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार इसे एजुकेटेड अनएम्प्लॉयमेंट का विस्फोट कहते हैं। परीक्षाएं, पेपर लीक और टूटते सपने राजस्थान के युवाओं का सबसे बड़ा सपना सरकारी नौकरी है। लेकिन यह सपना भी आसान नहीं रहा। राजस्थान के जानकार पत्रकार अरविंद चोटिया कहते हैं कि अक्सर भर्तियां वर्षों तक अटक जाती है। कभी अदालत में मामले चले जाते हैं। कभी पेपर लीक हो जाते हैं। और कभी चयनित भर्तियां रद्ध हो जाती हैं। चोटिया कहते हैं कि एक परीक्षा रद्द होती है तो लाखों युवाओं की तैयारी भी रद्द हो जाती है। कई युवा पांच-पांच साल तक कोचिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगे रहते हैं। उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण साल इंतजार में निकल जाते हैं।

राजनीति की घोषणाएं और अधूरी उम्मीदें
हर चुनाव में बेरोजगारी मुद्दा बनती है। हर सरकार रोजगार देने का वादा करती है। कभी लाखों नौकरियों का ऐलान होता है। कभी बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा। राजस्थान में मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के तहत बेरोजगारी भत्ता शुरू किया गया। लेकिन कई जगह युवाओं को महीनों तक भुगतान नहीं मिला। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार साफ कहते हैं कि सरकारें घोषणाओं में तेज हैं, रोजगार सृजन में नहीं। रोजगार आंदोलन होते हैं, लेकिन परिणाम कुछ भी नहीं। युवा वर्ग में गुस्सा बहुत है। बेरोजगारों के नेता हनुमान किसान कहते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में युवाओं के कई आंदोलन हुए। आरईईटी भर्ती, पटवारी भर्ती, शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती। हर भर्ती के लिए युवा सड़कों पर उतरे। धरने हुए। सोशल मीडिया पर भी अभियान चले। लेकिन निराशाी के साथ हनुमान किसान कहते हैं कि इन आंदोलनों से व्यवस्था में न तो बड़ा बदलाव और न ही रोजगार का ढांचा बदला।
गांवों में घटते अवसर, शहर भागते लोग
ग्रामीण राजस्थान की स्थिति और भी कठिन है। खेती पहले जैसी लाभकारी नहीं रही। लगभग 46 हजार से अधिक गांव हैं। गांवों में ही प्रदेश की 75 फीसदी लोग रहते हैं। प्रदेश में 18-39 आयु वर्ग के लगभग 2.73 करोड़ मतदाता हैं, जो 8 करोड़ की जनसंख्या वाले प्रदेश में एक बड़ी संख्या हैं। रोजगार कार्यालयों में 23 लाख बेरोजगार पंजीकृत हैं। लेकिन रोजगार कहां है। बीते कुछ वर्षों से राजस्थान में युवा मामलों पर अध्ययन करने वाले राजनीतिक जानकार अशोक भाटी कहते हैं कि राजस्थान में बेरोजगारी दर 28.5% तक पहुँच गई है। गांवों में कोई काम नहीं है। युवा काम करना चाहता है, लेकिन गांव में काम करे तो क्या करे। सो, वह युवा शहर भाग रहा है। जयपुर, अहमदाबाद, दिल्ली, मुंबई और दक्षिण के राज्यों में। भाटी कहते हैं कि राजस्थान का युवा रोजी के लिए प्रदेश से बाहर जा रहा है, रोटी के लिए भाग रहा है।

असली समस्या है प्रदेश में कम औद्योगीकरण
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान की बेरोजगारी का मूल कारण है कम औद्योगीकरण। निजी निवेश की कमी। कौशल और उद्योग की जरूरतों के बीच अंतर। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार एक और बात जोड़ते हैं। राजस्थान की राजनीति लंबे समय से सत्ता परिवर्तन के चक्र में उलझी रही। दीर्घकालिक रोजगार नीति कभी स्थिर नहीं बन पाई। हर बार निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। लेकिन नतीजा शून्य। परिहार कहते हैं कि देश में सबसे ज्यादा अमीर, उद्योगपति और उद्यमी इसी प्रदेश के हैं। मगर यही वह राजस्थान है, जहां बेरोजगारों की कतार भी सबसे ज्यादा बढ़ा रही है।
सबसे बड़ा सवाल कि काम मिलेगा या नहीं?
राजस्थान का युवा मेहनती है। वह तपती रेत में चलता है, ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ता है, गरम लू के थपेड़े सहता है और चीर देने वाली ठंड की मार झोलता है। जबरदस्त मेहनती। वह संघर्ष करना जानता है और प्रतिभाशाली भी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या व्यवस्था उसे मौका दे रही है? जब इंजीनियर चपरासी की नौकरी के लिए लाइन में लगे हों, जब प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के जीवन के साल निगल जाएं, जब घोषणाएं ज्यादा और नौकरियां कम हों, तो समस्या केवल बेरोजगारी नहीं रह जाती। यह एक पीढ़ी की उम्मीदों का संकट बन जाती है। राजस्थान के सामने आज सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या यह राज्य अपने युवाओं को काम देगा, या उन्हें सिर्फ लगातार इंतजार और जीवन भर संघर्ष करने वाला भविष्य देगा?
– राकेश दुबे
इसे भी पढ़िएः Rajasthan Health: राजस्थान बेमिसाल, मगर लोग परेशान, क्योंकि स्वास्थ्य सेवाएं हाल – बेहाल
यह भी पढ़िएः Rajasthan: विकास और निवेश का नया अध्याय लिखता राजस्थान

