Rajya Sabha Election: राजस्थान में राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) है और प्रदेश की कांग्रेसी राजनीति इस वक्त ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां पार्टी के सामने केवल सत्ता में वापसी की चुनौती नहीं है। इससे भी ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को बचाए रखने की है। प्रदेश में दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग सदा से कांग्रेस की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इन वर्गों का एक हिस्सा बीजेपी (BJP) की ओर आकर्षित हुआ है। ऐसे नाजुक हालात में, कांग्रेस (Congress) को ऐसे नेताओं की जरूरत है, जो संगठन से लेकर संसदीय स्तर पर पार्टी की विचारधारा, संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक प्रतिनिधित्व तीनों का संतुलन बनाकर चल सकें। फिर, डांगी को तो पार्टी ने पिछले कुछ सालों में देश भर में प्रमुख सांगठनिक व रणनीतिक मामलों के लिए विभिन्न प्रदेशों में भेज कर बेहतरीन चेहरे के रूप में तैयार किया है, वह भी स्वयं राहुल गांधी की देखरेख में। कांग्रेस ही नहीं किसी भी राजनीतिक दल में ऐसे अनुभवी लोगों का लाभ लिए जाने की परंपरा भी रही है, ताकि संगठन मजबूत हो सके। इसीलिए, राजस्थान से युवा नेता नीरज डांगी (Neeraj Dangi) का एक बार फिर राज्यसभा सांसद बनना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नेता तैयार किया, तो फायदा भी ले पार्टी
कांग्रेस में एक नेता के रूप में नीरज डांगी की सबसे बड़ी ताकत उनका संगठनात्मक अनुभव एवं वैचारिक प्रतिबद्धता रही है। पिछले छह वर्षों में कांग्रेस ने उन्हें पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा, मेघालय, बिहार, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, असम, केरल, कर्नाटक, तमिलनाड़ु, पश्चिम बंगाल जैसे, मुश्किल प्रदेशों में उन्होंने विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिली, निभाते हुए बेहतरीन काम किया है। कहीं चुनाव प्रभारी, कहीं पर्यवेक्षक, तो कहीं स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य के रूप में उन्होंने पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाया है। ये केवल औपचारिक जिम्मेदारियां नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों को समझने और संगठन को मजबूत करने का अवसर दिया। इससे डांगी एक राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक समझ रखने वाले नेता के रूप में विकसित हुए हैं। तो, अब वह समय आ गया है जब पार्टी उनके अनुभव और क्षमता का बड़ा राजनीतिक लाभ ले सकती है

संसदीय सक्रियता में भी कमाल परफॉर्मेंस
अपने पहले ही संसदीय कार्यकाल में नीरज डांगी ने पार्टी के कठिन राजनीतिक दौर में, संसद में भी राहुल गांधी के भरोसेमंद साथी के रूप में काम किया है, जिससे डांगी कांग्रेस के प्रभावी युवा सांसद के रूप में स्थापित हुए हैं। विपक्ष के सांसद के रूप में उन्होंने संसद के भीतर सरकार को घेरने, जनहित के मुद्दे उठाने और कांग्रेस की आवाज को मजबूती देने का काम किया। उनकी संसदीय सक्रियता केवल भाषणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रश्न, बहस, समितियों में भागीदारी और मुद्दों की गंभीर समझ के रूप में भी सामने आई। कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी लगातार स्पष्ट दिखाई दी है। आज कांग्रेस पुनर्निर्माण और वैचारिक संघर्ष के दौर से गुजर रही है। ऐसे में, डांगी जैसे नेताओं की अहमियत और ज्यादा है जो केवल पद की राजनीति नहीं, बल्कि विचारधारा को भी समर्पित हैं। पार्टी के विभिन्न मामलों में डांगी ने यह साबित किया है कि वे कांग्रेस की राजनीतिक लाइन को मजबूती से आगे बढ़ाने वाले नेता हैं।

कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक की ताकत
कांग्रेस लंबे समय से सामाजिक न्याय और समावेशी राजनीति की बात करती रही है, लेकिन राजनीति में केवल विचारधारा काफी नहीं होती, उसका प्रतिनिधित्व भी उतना ही जरूरी होता है। नीरज डांगी ऐसे नेता हैं जो कांग्रेस की विचारधारा के कट्टर सिपाही माने जाते हैं और दलित समाज में उनकी साफ-सुथरी तथा मजबूत छवि है। यही कारण है कि वे कांग्रेस के दलित वोट बैंक को साधने में सबसे उपयोगी चेहरों में गिने जाते हैं। राजस्थान में आने वाले विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। बीजेपी लगातार दलित समाज में अपनी पैठ बढ़ाने का प्रयास कर रही है। केंद्र और राज्यों में बीजेपी ने दलित वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देकर अपने सामाजिक विस्तार की रणनीति पर काम किया है। इसका असर कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक पर भी दिखाई दे रहा है। ऐसे नाजुक राजनीतिक हालात में यदि कांग्रेस नीरज डांगी जैसे मजबूत दलित चेहरे को फिर अवसर देती है, तो इसका संदेश दलित समाज में सकारात्मक जाना तय है।
दलित समाज में सकारात्मक संदेश
राजस्थान के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नीरज डांगी ने अपनी राजनीतिक चतुराई से हर तरह के विवादों से खुद को दूर रखते हुए एक निर्विवाद और संयमित नेता की छवि बनाई है। इसके साथ ही खास बात यह रही कि उन्होंने एक तेजतर्रार युवा दलित सांसद के रूप में भी अपनी पहचान को निखारा है। कांग्रेस का नीरज डांगी को फिर राज्यसभा भेजने का एक मजबूत राजनीतिक संदेश यही होगा कि पार्टी दलित नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे कांग्रेस को न केवल दलित समाज में भरोसा मजबूत करने में मदद मिलेगी, बल्कि युवा कार्यकर्ताओं में भी यह संदेश जाएगा कि संगठन में मेहनत और वैचारिक निष्ठा का सम्मान होता है। कांग्रेस यदि राजस्थान में अपने दलित आधार को मजबूत बनाए रखना चाहती है और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश देना चाहती है, तो नीरज डांगी जैसे नेता को फिर अवसर देना उसके लिए राजनीतिक रूप से अत्यंत आवश्यक माना जाएगा।
-निरंजन परिहार (राजनीतिक विश्लेषक)
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