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Home»देश-प्रदेश»Swami Vivekananda: पीएम नरेंद्र मोदी की साधना वहां, जहां विवेकानंद ने किया ध्यान और शिव के लिए पार्वती ने की तपस्या
देश-प्रदेश 4 Mins Read

Swami Vivekananda: पीएम नरेंद्र मोदी की साधना वहां, जहां विवेकानंद ने किया ध्यान और शिव के लिए पार्वती ने की तपस्या

Prime Time BharatBy Prime Time BharatMay 31, 2024No Comments
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Swami Vivekananda: नरेंद्र… यानी स्वामी विवेकानंद…! जी हां स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) का बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। उन्हीं नरेंद्र के ध्यान स्थल पर अब नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की साधना चर्चा में है। वह नरेंद्र स्वामी विवेकानंद थे, और अब यह नरेंद्र हैं, भारत के प्रधानमंत्री हैं – नरेंद्र मोदी। तो, नरेंद्र से नरेंद्र तक के इतिहास में ध्यान का मार्ग बराबर माना जा रहा है। उन नरेंद्र यानी विवेकानंद ने कन्याकुमारी (KanyaKumari) में भारत के तीनों समुद्रों, हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के संगम पर स्थित जिस शिला पर 1892 में ध्यान  लगाने के बाद कुछ महीनों बाद शिकागो की धर्म संसद में एक ऐसा भाषण दिया था, जिसे सुनने के बाद पूरी दुनिया अचंभित रह गई थी और भारत का नाम रोशन हुआ था। लोकसभा चुनाव (Parliament Election) का प्रचार समाप्त करते ही उसी शिला पर बैठकर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है। इस ध्यान के बाद मोदी तीसरी बार देश की बागडोर सम्हालने वाले हैं और उसके बाद कुछ ऐसा खास करने का ऐलान पहले ही कर चुके है, जो पूरी दुनिया में भारत को नए सिरे से उच्च स्थान पर स्थापित करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 30 मई से लेकर 1 जून तक कन्याकुमारी में विवेकानंद रॉक मेमोरियल में ध्यान में रहना हर तरफ चर्चा का विषय है।

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  • विवेकानंद जैसे मोदी भी विकसित भारत का संकल्प
  • पीएम मोदी का कन्याकुमारी में ध्यान एक नया पड़ाव
  • पार्वती की तपस्या स्थली और विवेकानंद का ध्यान स्थल
          • -आकांक्षा कुमारी

विवेकानंद जैसे मोदी भी विकसित भारत का संकल्प

पीएम मोदी का विवेकानंद रॉक मेमोरियल के ध्यान मंडपम में 30 मई की शाम से 1 जून की शाम तक ध्यान की अवस्था में रहना सभी की चर्चा में है। इस स्थल की पीएम मोदी के लिए खास महत्ता इसलिए भी है क्योंकि स्वामी विवेकानंद को भारत माता के बारे में दिव्य दृष्टि यहीं पर ध्यान के बाद प्राप्त हुई थी। इसी कारण इस जगह को भारत में आध्यात्मिक विरासत के एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में माना जाता है। यह वह स्थान है जहां पर पूर्वी और पश्चिमी तटीय रेखाएं मिलती हैं और हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर भी मिलते हैं। यहां पर सूर्योदय और सूर्यास्त के भी अद्भुत नजारे देखने को मिलते हैं, जो दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। स्वामी विवेकानंद ने यहां ध्यान लगाकर ही एक विकसित भारत का सपना देखा था और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में भी अपने तीसरी बार फिर प्रधानमंत्री बनने के साथ विकसित भारत का संकल्प है।

पीएम मोदी का कन्याकुमारी में ध्यान एक नया पड़ाव

सांसारिक व शारीरिक सुखों की कामना में तो सभी ध्यान करते हैं, लेकिन आध्यात्म व ध्यान से पीएम मोदी का खास नाता रहा है। पिछली बार 2019 का चुनाव प्रचार समाप्त के बाद पीएम मोदी पांच साल पहले केदारनाथ पहुंचे थे, जहां पर उन्होंने गुफा में ध्यान लगाया था। दरअसल, स्वामी विवेकानंद का राष्ट्र प्रेम सर्वविदित है, उन्होंने अपने विचारों से देश की दशा बदलने का संकल्प लिया था। स्वामी विवेकानंद ने यहां पर ध्यान के बाद कहा था – उठो, जागो और तब तक मत रूको जब तक लक्ष्य न मिल जाए। अब, समस्त राष्ट्र की प्रजा के लिए कल्याण की कामना के लिए ध्यान में जाने की पीएम मोदी की राजनीतिक परंपरा में कन्याकुमारी एक नया पड़ाव है।

पार्वती की तपस्या स्थली और विवेकानंद का ध्यान स्थल

भारत के अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थलों में शामिल कन्याकुमारी में विवेकानंद रॉक मेमोरियल का भी अपना एक खास इतिहास है। यह वही स्थान है, जिसे पवित्र ग्रंथों में भगवान शिव की प्राप्ति के लिए देवी पार्वती के द्वारा एक पैर पर खड़े होकर तपस्या के स्थल के रूप में भी जाना जाता है। कहते हैं कि है कि 1892 में जब स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी पहुंचे तो उन्होंने देखा कि तट से 500 मीटर दूरी पर समंदर के बीच एक टापू है, तो स्वामी विवेकानंद गहरे पानी में तैर कर इस टापू पर पहुंचे और फिर उन्होंने वहां बैठकर ध्यान लगाया। विवेकानंद तीन दिन और तीन रात तक लगातार इसी टापू पर रहे ध्यान लगाया और विवेक को जागृत करने का प्रयास किया। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वहां पर ध्यान धरना समस्त संसार भर में चर्चा का विषय है, उसका एक कारण यह भी है कि ये वही शिला है जिस पर स्वामी विवेकानंद ने 1892 में बैठकर ध्यान लगाया और कन्याकुमारी में ध्यान करने के करीब एक साल बाद शिकागो की धर्म संसद में समस्त संसार को भारतीय सभ्यता, संस्कृति व परंपरा का गहन संदेश दिया था।

-आकांक्षा कुमारी
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