Budget 2026: केंद्रीय बजट केवल साल भर का आर्थिक दस्तावेज नहीं होता, वह देश के विकास की तस्वीर होता है, और राज्यों की राजनीति का आईना भी। लेकिन जैसा कि होना ही था, इस बार भी राजस्थान (Rajasthan) में केंद्रीय बजट (Budget 2026) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं, बिल्कुल अलग दो राजनीतिक ध्रुवों में बंटी नजर आईं। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बजट को बीजेपी (BJP) के नेताओं ने इसे विकासोन्मुखी और दूरदर्शी बताया, वहीं कांग्रेस (Congress) ने इसे जनविरोधी और पूंजीपरस्त बता कर तीखा हमला बोला। सत्ता पक्ष के लिए बजट (Budget) विकास का रोडमैप है, जबकि विपक्ष निराशाजनक मानता है। सच शायद इन दोनों ध्रुवों के बीच ही कहीं है, जहां उम्मीदें भी हैं और आशंकाएं भी।
सत्ता पक्ष को विकास और विश्वास का दावा
राजस्थान में सत्तारूढ़ बीजेपी के नेताओं ने केंद्रीय बजट को प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विजन से जोड़कर देखा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यह बजट राज्यों को आर्थिक रूप से मजबूत करने वाला है और बुनियादी ढांचे, सड़क, रेलवे, जल जीवन मिशन तथा ग्रामीण विकास को नई गति देगा। उनके अनुसार बजट में राजस्थान जैसे राज्यों के लिए पर्यटन, अक्षय ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़े अवसर छिपे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बजट को मध्यम वर्ग और किसानों के हित में बताया। उन्होंने विशेष रूप से कृषि, स्टार्ट-अप और महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रावधानों को रेखांकित किया। बीजेपी नेताओं की भाषा में लगभग समानता दिखी। स्थिरता, निरंतरता और भविष्य की तैयारी जैसे शब्द समान थे। सत्ता पक्ष का तर्क साफ था कि मजबूत केंद्र ही राज्यों के विकास की गारंटी है।
विपक्ष बोला – महंगाई से राहत नहीं, युवा भी परेशान
कांग्रेस ने मोदी सरकार के बजट को जमीनी हकीकत से कटा हुआ बताया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि बजट में न तो महंगाई से राहत है और न ही बेरोजगार युवाओं के लिए ठोस समाधान। गहलोत के अनुसार देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान का बजट भाषण में कोई मेंशन न होना प्रदेश के साथ हो रहे सौतेलेपन की झलक है। ईआपपीसी को लेकर कोई जिक्र नहीं हुआ, न ही राजस्थान में किसी नई रेलवे परियोजना या मेट्रो प्रोजेक्ट की घोषणा हुई। गरीब, श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र की बड़ी आबादी के लिए कोई राहत का बड़ा ऐलान नहीं हुआ है। गहलोत ने कहा कि कुल मिलाकर डबल इंजन के बावजूद यह बजट राजस्थान के लिए यह ऊंची दुकान फीका पकवान साबित हुआ है।। विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा कि बजट में न महंगाई कम करने का इरादा है, न गिरते रुपये को संभालने की कोई योजना। सबसे चिंताजनक बात यह है कि एआई से पैदा होने वाली बेरोजगारी की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार के पास कोई रोडमैप नहीं है। युवाओं का भविष्य अधर में है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी सवाल उठाया कि जब देश में रोजगार संकट गहराता जा रहा है, तब बजट में रोजगार सृजन के स्पष्ट रोडमैप का अभाव क्यों है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और कर्ज राहत जैसे मुद्दों पर बजट खामोश है। कांग्रेस नेताओं की बजट प्रतिक्रिया में विपक्ष के तौर – तरीकों का भाव साफ झलक रहा था।

विश्लेषकों ने कहा – भविष्य चमकदार, वर्तमान अंधेरे में
राजस्थान के संदर्भ में बजट का मूल्यांकन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन कहते हैं कि इस बजट में भविष्य चमकदार है; बस वर्तमान अंधेरे में छोड़ दिया गया है! राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते हैं कि राजस्थान जैसे विकासशील राज्य के लिए केंद्रीय बजट का वास्तविक आंकलन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन से होगा। राजस्थान के जाने माने पत्रकार अरविंद चोटिया का मानना है कि असल में बजट के दिन बजट किसी भी पार्टी के नेता को बिल्कुल भी समझ में नहीं आता है। इसलिए सत्ता पक्ष वाले इसे ऐतिहासिक रूप से शानदार और दिशा देने वाला बजट बताते हैं और विपक्ष वाले इसे ऐतिहासिक रूप से फ्लॉप और दिशाहीन बताते हैं। पक्ष और विपक्ष बदलते रहते हैं लेकिन बजट पर यह प्रतिक्रिया कभी नहीं बदलती। वैसे, नेता चाहें कुछ भी कहें, लेकिन क्या सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए घोषित योजनाएं वास्तव में गांवों तक पहुंचेंगी? क्या युवाओं को रोजगार मिलेगा या वे केवल भाषणों तक सीमित रह जाएंगे?
राजस्थान के लिए बजट केवल राजनीतिक दस्तावेज
कुल मिलाकर बजट 2026-27 राजस्थान के लिए न तो अभूतपूर्व रहा और न ही पूरी तरह निराशाजनक। लेकिन सत्ता पक्ष की प्रतिक्रियाओं में जहां आशा और आत्मविश्वास झलकता दिखा, वहीं विपक्ष की भाषा आक्रोश और सवालों से भरी रही। यही वे सवाल हैं जिन पर आने वाले महीनों में राजनीति तेज होगी। राजनीतिक रूप से यह ध्रुवीकरण राजस्थान में भाजपा के लिए फायदेमंद भी हो सकता है, क्योंकि जनता अक्सर केंद्र की बड़ी योजनाओं, आयुष्मान भारत, पीएम-किसान, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को स्थानीय सरकार से जोड़कर देखती है। लेकिन अगर ईआरसीपी जैसे जल-संकट के मुद्दे लगातार अनसुलझे रहे, तो पूर्वी राजस्थान के जिलों में असंतोष बढ़ सकता है, जो कांग्रेस के लिए ऑक्सीजन का काम करेगा। भले ही बजट में राजस्थान के कारोबारी विकास को कोई बहुत जिक्र नहीं था, फिर भी बीजेपी नेताओं ने बजट को उपलब्धियों की सूची के रूप में पेश किया, जबकि कांग्रेस ने इसे अधूरे वादों और आंकड़ों के खेल का दस्तावेज बताया। यह अंतर केवल विचारधारा का नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति का भी संकेत है। राजस्थान के सत्ता पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं एक बार फिर यह दिखाती हैं कि बजट आर्थिक से अधिक राजनीतिक दस्तावेज बन चुका है।
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राकेश दुबे

