Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 9 मई को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। बीजेपी (BJP) नेता शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) राज्य के मुख्यमंत्री बने। वे पश्चिम बंगाल (West Bengal) में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री हैं। वे हिंदुत्व के नाम पर जीते हैं। लंबे समय तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के प्रभुत्व वाले राज्य में बीजेपी की यह जीत राष्ट्रीय राजनीति में भी एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत है और इस विधानसभा चुनाव में, हिंदुत्व, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और संगठनात्मक मजबूती बीजेपी की जीत के प्रमुख कारण रहे। ब्रिगंड़ परेड़ ग्राउंड में मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन सहित कई केंद्रीय मंत्रियों सहित बीजेपी व एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री उपस्थित रहे। समारोह में बड़ी संख्या में साधु-संत, उद्योगपति, सांस्कृतिक जगत की हस्तियां और बीजेपी नेता व कार्यकर्ता भी शामिल हुए। 55 वर्षीय अविवाहित शुभेंदु अधिकारी राजनीतिक व स्वाधीनता संग्राम से जुड़े परिवार से हैं।
तगड़ी रणनीति से बने बीजेपी के दावेदार
बीजेपी ने विधानसभा चुनाव से पहले आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया था। हालांकि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने रणनीतिक रूप से शुभेंदु अधिकारी को सीधे ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था। यही स्पष्ट संकेत था कि अधिकारी ही पार्टी के सबसे बड़े बंगाली चेहरे हैं। पांच साल पहले 2021 में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराने के बाद से उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई थी। ममता बनर्जी को इस बार के चुनाव में उन्होंने लगातार दूसरी बार भवानीपुर से करारी मात दी। बीजेपी में इसी से वे स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री दावेदार बन गए थे। कोलकाता में 8 मई को बीजेपी विधायक दल की बैठक में नवनिर्वाचित विधायकों ने सर्वसम्मति से शुभेंदु को विधायक दल का नेता चुना। उसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री पद के लिए शुभेंदु अधिकारी के नाम का ऐलान किया। बीजेपी को विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ। पार्टी ने ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी बढ़त हासिल करते हुए तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया।

मुख्यमंत्री के रूप में कई बड़ी चुनौतियां
मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनावी वादों को जमीन पर उतारने की होगी। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार के मुताबिक बीजेपी ने राज्य में भ्रष्टाचार समाप्त करने, राजनीतिक हिंसा रोकने, उद्योग निवेश बढ़ाने और प्रशासनिक सुधार के जो वादे किए हैं, वे ही इस मुश्किल प्रदेश में पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होंगे। परिहार कहते हैं कि वामपंथ एवं ममता बनर्जी के शासनकाल में पश्चिम बंगाल में बरसों तक जो अराजकता, हिंसा और समाज विरोधी माहौल पनपा, उसको कानून व्यवस्था के जरिए नियंत्रित करना सबसे बड़ी चुनौती है। वरिष्ठ पत्रकार संदीप सोनवलकर मानते हैं कि ममता बनर्जी के शासनकाल में विपक्ष लगातार राजनीतिक हिंसा, कटमनी और प्रशासनिक पक्षपात के आरोप लगाता रहा। सोनवलकर के मुताबिक मुस्लिम आबादी वाले कई जिलों में बीजेपी को सामाजिक संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ अपनी हिंदुत्व आधारित राजनीतिक लहर को भी कायम रखना होगा। वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह मानते हैं कि बीजेपी नेतृत्व को उम्मीद है कि शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में पार्टी का विस्तार और मजबूत होगा, जबकि विपक्ष इसे राज्य की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ मान रहा है। राजकुमार कहते हैं कि शुभेंदु अधिकारी के लिए विकास और वैचारिक राजनीति के बीच संतुलन बनाकर भी चलना होगा।
बीजेपी में जबरदस्त खुशी का माहौल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी काे पहले मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंच कर मंच सबसे पहले रविंद्र नाथ टैगोर की तस्वीर पर फूल चढाए और नमन किया। पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सबसे पुराने कार्यकर्ता माखनलाल सरकार को सम्मानित किया। उनको गले लगाया और पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया। शपथ ग्रहण समारोह में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, समेत कई दिग्गत नेता भी इस शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बने।

शुभेंदु राजनीतिक परिवार की उपज
शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के कांथी क्षेत्र में हुआ था। वे एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद रहे। शुभेंदु अधिकारी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की। वे पहले कांग्रेस और बाद में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े। नंदीग्राम आंदोलन के दौरान वे राज्य राजनीति में एक बड़े जननेता के रूप में उभरे। ग्रामीण बंगाल में उनकी मजबूत पकड़ और संगठन क्षमता ने उन्हें ममता बनर्जी के सबसे विश्वसनीय नेताओं में शामिल कर दिया था। लेकिन ममता से मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया। बीजेपी ने उनको पश्चिम बंगाल में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की राजनीति के प्रमुख चेहरा बनाया। उनकी छवि एक आक्रामक लेकिन संगठनात्मक रूप से मजबूत नेता की मानी जाती है।
बीजेपी में जबरदस्त खुशी का माहौल
बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में 207 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की एवं ममता बनर्जी को महज 80 सीटों पर समेटकर रख दिया और तृणमूल कांग्रेस के 15 सालों के शासन का खात्मा कर दिया। पश्चिम बंगाल में बीजेपी का पहले मुख्यमंत्री बनने पर कोलकाता की सड़कों पर बीजेपी समर्थकों का उत्साह देखने लायक रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में समाज के एक खास वर्ग को हिंदुत्व पर हावी होने की खुली छूट दी थी, उसी का परिणाम है कि उनकी बुरी तरह हार हुई। बीजेपी के लिए यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक संस्कृति में परिवर्तन का प्रतीक माना जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में 23वें और वहां पर बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बने हैं। ऐसे में नई सरकार पर कानून व्यवस्था सुधारने और प्रशासन में विश्वास बहाल करने का दबाव रहेगा। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की सामाजिक संरचना भी नई सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
– राकेश दुबे (वरिष्ठ पत्रकार)
Please read also: West Bengal: दीदी तो गई, मगर बीजेपी की असली परीक्षा है अब!
Read also: Sunil Bansal: कमाल का धमाल करते हैं बीजेपी के चुनावी समीकरण सजाने वाले सुनील बंसल

