BJP: देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बीजेपी 46 की हो गई, 47वें स्थापना दिवस का जश्न मना रही है। भारतीय राजनीति के परिदृश्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) जिसे आम तौर पर बीजेपी कहा जाता है, उसका उदय और विस्तार हमारी राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। सन 1980 की 6 अप्रेल वह तारीख है, जब देश में बीजेपी का जन्म हुआ। सन 1980 में स्थापित इस दल ने 46 वर्षों की अपनी यात्रा में न केवल स्वयं को देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया, बल्कि भारत की राजनीति, नीतियों और जन-चेतना को भी गहराई से प्रभावित किया है। यह यात्रा संघर्ष, विचारधारा, संगठनात्मक शक्ति और निरंतर विस्तार की कहानी है। यह 46 वर्षों की यात्रा एक ऐसे राजनीतिक दल की कहानी है, जिसने विचारधारा और संगठन के बल पर खुद को निरंतर विकसित किया और भारतीय राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाई। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी किस प्रकार अपनी उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए नई चुनौतियों का सामना करती है और देश के विकास में अपनी भूमिका को कैसे और सशक्त बनाती है।

सूरज निकला, अंधेरा छंटा और कमल खिला
बीजेपी की जड़ें भारतीय जनसंघ में निहित हैं, जिसकी स्थापना सन 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी। जनसंघ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक प्रेरणा के साथ भारतीय राजनीति में राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पहचान और स्वदेशी विचारों को प्रमुखता दी। सन 1977 में आपातकाल के बाद जनसंघ ने जनता पार्टी में विलय किया, लेकिन वैचारिक मतभेदों के चलते सन 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ। अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, राजमाता विजया राजे सिंधिया, भैरोंसिंह शेखावत, मुरली मनोहर जोशी, सिकंदर बख्त जैसे नेताओं ने मुंबई के बांद्रा रिक्लेमेशन ग्राउंड में बीजेपी की नींव रखी। तब अटल बिहारी बाजपेयी ने कहा था – ‘सूरज निकलेगा, अंधेरा छंटेगा, और कमल खिलेगा।’ कमल खिला और 1998 में वाजपेयी बीजेपी के पहले प्रधानमंत्री बने, तो दूसरे प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी। भारत में आज 21 राज्यों में बीजेपी या उसके गठबंधन वाली सरकारें हैं। इसके साथ ही देश में मोदी सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले नेता बन गए हैं, वे 3 बार गुजरात के मुख्यमंत्री और 3 बार भारत के प्रधानमंत्री के कार्यकाल को मिलाकर सरकार के मुखिया के रूप में सबसे आगे रहे हैं।
बीजेपी बनी एक सक्षम शासन विकल्प
स्थापना के बाद अपने शुरुआती वर्षों में बीजेपी को सीमित सफलता मिली, लेकिन उसने संगठन निर्माण और वैचारिक स्पष्टता पर ध्यान केंद्रित रखा। सन 1990 के दशक में बीजेपी ने अपने राजनीतिक विस्तार की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाए। राम जन्मभूमि आंदोलन और राष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख ने पार्टी को व्यापक जनसमर्थन दिलाया। सन 1996 में पहली बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और सन 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन अर्तात एनडीए की सरकार बनी। वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में बुनियादी ढांचे का विकास, पोखरण परमाणु परीक्षण और आर्थिक सुधार जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए, जिन्होंने बीजेपी को एक सक्षम शासन विकल्प के रूप में स्थापित किया।

मोदी से मिली बीजेपी को नई ऊंचाई
बीजेपी ने 21वीं सदी में अपनी रणनीति और संगठन को और मजबूत किया। सन 2014 में गुजरात से निकल कर देश के राजनीतिक फलक पर नरेंद्र मोदी का उदय हुआ और उनके नेतृत्व में पार्टी ने अकेले अपने बलबूते पर ऐतिहासिक जीत हासिल की और पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र में सरकार बनाई। यह भारतीय राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन था, जहां गठबंधन युग के बाद एक मजबूत एकल पार्टी सरकार का उदय हुआ। सन 2019 में बीजेपी ने और अधिक बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की, जिससे उसकी लोकप्रियता और संगठनात्मक शक्ति का प्रमाण मिला। देश की राजनीति में यह पहली बार है कि बीजेपी लगातार तीसरी बार देश की सत्ता में है। सन 1984 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को पूरे देश में सिर्फ 2 सीटें मिली थीं। उन दो सांसदों में से एक एके पटेल गुजरात से जीते और दूसरे जंगा रेड्डी आंध्र प्रदेश के हनमकोंडा से। सन 2014 में पहली बार बीजेपी ने नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़कर अकेले पूर्ण बहुमत हासिल किया।
सफल यात्रा की रणनीति और योजनाएं
बीजेपी की सफलता के पीछे उसकी मजबूत संगठनात्मक संरचना, जमीनी स्तर तक पहुंच और कार्यकर्ताओं का व्यापक नेटवर्क प्रमुख कारक रहे हैं। पार्टी ने बूथ स्तर तक अपने संगठन को सुदृढ़ किया और तकनीक के प्रभावी उपयोग से जनसंपर्क को नई दिशा दी। सोशल मीडिया, डिजिटल अभियान और प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से बीजेपी ने युवाओं और नए मतदाताओं को जोड़ने में सफलता पाई। नीतिगत दृष्टि से बीजेपी ने राष्ट्रवाद, सुशासन और विकास को अपने प्रमुख स्तंभों के रूप में प्रस्तुत किया है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाएं जैसे जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और डिजिटल इंडिया ने समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने का प्रयास किया है। साथ ही, धारा 370 का निरसन, नागरिकता संशोधन अधिनियम और तीन तलाक कानून जैसे निर्णयों ने पार्टी की वैचारिक प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट किया है।
चुनौतियों से भी लगातार जूझती रही बीजेपी
हालांकि, बीजेपी की इस यात्रा में चुनौतियां भी रही हैं। विपक्ष द्वारा सामाजिक ध्रुवीकरण, संस्थाओं की स्वतंत्रता और आर्थिक नीतियों को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। बेरोजगारी, महंगाई और कृषि संकट जैसे मुद्दे भी समय-समय पर सरकार के सामने चुनौती के रूप में खड़े हुए हैं। लोकतंत्र में एक सशक्त विपक्ष की भूमिका और आलोचना, किसी भी सत्ताधारी दल के लिए संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण होती है। भविष्य की ओर देखते हुए बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विकास मॉडल को और समावेशी बनाना और युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करना है। तेजी से बदलते वैश्विक और घरेलू परिदृश्य में आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन, सामाजिक समरसता और संस्थागत मजबूती जैसे मुद्दे अहम रहेंगे।
निरंजन परिहार (राजनीतिक विश्लेषक)
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