UK Election: ब्रिटेन में इस बार रिकॉर्ड संख्या में भारतीय (India) मूल के लोग चुनाव जीतकर हाउस ऑफ कॉमन्स पहुंचे हैं। वहां संसद को हाउस ऑफ कॉमन्स (House of Commons) कहते हैं और ब्रिटेन (Britain) के लोगों ने इस बार कुल 29 भारतीय मूल के लोगों को यूके की संसद में भेजा है और एक सांसद को ब्रिटेन के राजा ने मनोनीत किया है। ऋषि सुनक (Rishi Sunak) की कंजर्वेटिव पार्टी भले ही हार गई है, लेकिन ब्रिटेन के चुनाव (UK Election) में भारतीय मूल के पहले हिंदू (Hindu) प्रधानमंत्री रहे सुनक फिर जीत गए हैं। ब्रिटेन की संसद में बैठने वाले भारतीय मूल के कुल 29 लोगों में से 12 सिख समुदाय से हैं, जिनमें छह महिलाएं भी हैं। लेबर पार्टी से इन 12 सिख सांसदों के साथ ब्रिटेन अब भी कनाडा से पीछे हैं, जहां सिख समुदाय से 18 सांसद हैं। गुजरात, पंजाब, केरल, गोवा. उत्तर प्रदेश जैसे भारतीय (Indian) राज्यों के मूल निवासी इस बार भी ब्रिटेन की संसद में छाए रहेंगे।इस चुनाव में कुल 107 भारतीय उम्मीदवारों ने भाग लिया था।

भारत मूल की गुजराती राजनीतिज्ञ प्रीति पटेल विथम सीट से चुनाव जीती हैं। जुलाई 2019 से सितंबर 2022 तक गृह सचिव के पद पर रहीं प्रीति 2010 से सांसद के रूप में इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। गोवा मूल के ईसाई क्लेयर कॉउटिन्हो ईस्ट सरे सीट से फिर चुनाव जीते हैं। उन्होंने लेबर पार्टी के टॉम बोवेल को 7,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया। कॉउटिन्हो के माता-पिता गोवा ले ब्रिटेन गए थे। पंजाबी हिंदू परिवार में जन्मे गगन मोहिंद्रा ने ने भी अपनी साउथ वेस्ट हर्टफोर्डशायर सीट बरकरार रखी है। शिवानी राजा लेसेस्टर ईस्ट से विजयी हुई है। उनके सामने भारतीय मूल के लेबर पार्टी से उम्मीदवार राजेश अग्रवाल थे, जो चुनाव हार गए। लेस्टर में जन्मी शिवानी ने डि मॉन्टफ़ोर्ट यूनिवर्सिटी से कॉस्मेटिक साइंस की पढ़ाई की है। शौकत एडम पटेल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लेस्टर साउथ सीट से जीत दर्ज की है। प्रीत कौर गिल ने बर्मिंघम एजबेस्टन सीट पर भारी मतों के अंतर से जीत दर्ज की है। गोवा मूल के पिता और तमिल मूल की मां की बेटी सुएला ब्रेवरमैन फिर से हाउस ऑफ कॉमन्स में वापसी करेंगी। वे पिछली ऋषि सुनक सरकार में गृह सचिव रहीं। भारत मूल की सुएला ब्रेवरमैन फेयरहैम – वाटरलूविल सं सांसद हैं। तनमनजीत सिंह ढेसी, लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए। ढेसी सिख और अन्य मुद्दों पर ब्रिटेन की संसद में काफी मुखर रहे हैं। नादिया व्हिटोम कैथलिक सिख हैं, उन्होंने ने नॉटिंघम ईस्ट से दूसरी बार जीत हासिल की है। व्हिटोम 2019 में 23 साल की उम्र में पहली बार जीत कर हाउस ऑफ़ कॉमन्स में सबसे कम उम्र की सांसद बनीं थीं। किरीट एनट्विस्ले बोल्टन नॉर्थ ईस्ट सीट से जीत कर इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला सांसद बनीं हैं। उनको किरिथ अहलूवालिया के नाम से भी जाना जाता है। सतवीर कौर ने साउथेम्प्टन टेस्ट सीट से जीती, वारिंदर जस ने वॉल्वर हैम्प्टन वेस्ट सीट पर परचम लहराया, डॉ. जीवन संधेर वहां पर लॉफबोरो से और जस अटवाल ने इलफोर्ड साउथ संसदीय क्षेत्र से सांसद बने। गुरिंदर सिंह जोसन स्मेथविक से पहली बार सांसद बने हैं।

केरल से ताल्लुक रखने वाले सोजन जोसेफ कंजर्वेटिव पार्टी के गढ़ एशफोर्ड से लेबर पार्टी के उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए हैं। गुजरात के भरूच के मूल निवासी इकबाल मोहम्मद अहमदाबादी ने भी संसदीय चुनाव जीता है। इकबाल मोहम्मद ड्युस्बरी – बैटली सीट से निर्दलीय जीते हैं। इकबाल मूल रूप से भरुच जिले के टंकारिया गांव के रहने वाले हैं। मुनिरा विल्सन ने ट्विकेनहैम से चुनाव जीता है। हरप्रीत कौर उप्पल हडर्सफील्ड संसदीय सीट जीतकर पहली बार सांसद बनी हैं। सीमा मल्होत्रा ने फेल्थम – हेस्टन सीट पर कब्जा किया। लेबर की दिग्गज मल्होत्रा, जो फेबियन महिला नेटवर्क की सह-संस्थापक और अध्यक्ष हैं, फेल्थम – हेस्टन से अब तक चार बार जीत चुकी हैं। कनिष्क नारायण वेल्स में पहले जातीय अल्पसंख्यक सांसद बन गए हैं। वे लेबर पार्टी के वेल ऑफ़ ग्लैमरगन से उम्मीदवार थे। उत्तर प्रदेश मूल से से ताल्लुक रखनेवाले नवेन्दु मिश्रा ने स्टॉकपोर्ट से फिर जीत दर्ज की है। नवेंदु मिश्रा के माता पिता भारत के उत्तर प्रदेश राज्य से ब्रिटेन गए थे। सोनिया कुमार डुडले सीट से लेबर पार्टी की पहली महिला सांसद चुनी गई हैं। डेरेबी साउथ से बेगी शंकर चुनाव जीते हैं, तो सोनिया कुमार ने डब्ले सीट से विजय हीसिल की, तो नील शास्त्री हर्स्ट ने सोलिहुल – शर्ली सीट से चुनाव में जीत दर्ज की है। गोवा मूल की वैलेरी वाज़ ने वॉल्सॉल और ब्लॉक्सविच सीट पर लेबर पार्टी की उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की है। वैलेरी के भाई कीथ वाज़ भी सांसद है। आगरा में जन्मे भारतीय मूल के कंजर्वेटिव पार्टी के पूर्व सांसद आलोक शर्मा अब हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बैठेंगे। 56 वर्षीय शर्मा को ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स ने उच्च सदन के लिए मनोनीत किया है।
भारतीय मूल के कुल 28 सांसदों को इस चुनाव में जीत मिली है और 1 को मनोनीत किया गया है। खास बात यह है कि ब्रिटेन की पिछली संसद में भी भारतीय मूल के 15 सांसद ही थे जबकि इस बार कुल 29 सांसद हैं। इस बार लेबर पार्टी के 19 भारतीय सांसद चुनकर हाउस ऑफ कॉमंस जा रहे हैं, तो, कंजरवेटिव पार्टी से 7 भारतीय मूल के सांसद हैं। लिबरल डेमोक्रेट्स से 1 ब्रिटिश-भारतीय सांसद और भारतीय मूल के 2 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।