Close Menu
  • होम
  • देश-प्रदेश
  • सत्ता- सियासत
  • व्यक्ति विशेष
  • समाज – संस्कृति
  • कारोबार
  • ग्लैमर
  • वीडियो
  • प्रेस रिलीज़
Facebook X (Twitter) Instagram
ट्रेंडिंग:
  • Amit Shah: चुनावी रणनीति के चतुर चाणक्य अमित शाह की असलियत…!
  • Congress: राहुल गांधी नई पीढ़ी पर भरोसा करे और कांग्रेस को मजबूत करे, लेकिन…!
  • Rajya Sabha Election: निर्विवाद और संयमित नेता नीरज डांगी के राज्यसभा में होने के अर्थ
  • Narendra Modi: क्या पीएम मोदी सचमुच गद्दार और राहुल गांधी की बदजुबानी सही…?
  • Drugs: समूचे राजस्थान पर ड्रग्ज का शिकंजा, गांव – गांव में धमकता नशे का कारोबार
  • Bhairon Singh Shekhawat: शेखावत जैसा फिर कोई इस संसार में जन्मे तो बताना…
  • Bhairon Singh Shekhawat: वह रात केवल भैरोंसिंह शेखावत गिरफ्तारी की कहानी नहीं थी…
  • Gold Import Duty: पीएम मोदी की अपील के तत्काल बाद इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, गोल्ड और महंगा
4th June, Thursday, 12:30 AM
Facebook X (Twitter) Instagram
Prime Time BharatPrime Time Bharat
  • होम
  • देश-प्रदेश
  • सत्ता- सियासत
  • व्यक्ति विशेष
  • समाज – संस्कृति
  • कारोबार
  • ग्लैमर
  • वीडियो
  • प्रेस रिलीज़
Prime Time BharatPrime Time Bharat
Home»ग्लैमर»Dan Singh: ‘वो तेरे प्यार का गम…’ वाले जयपुर के दान सिंह, जिनकी किस्मत ही कुछ ऐसी थी कि दिल टूट गया
ग्लैमर 8 Mins Read

Dan Singh: ‘वो तेरे प्यार का गम…’ वाले जयपुर के दान सिंह, जिनकी किस्मत ही कुछ ऐसी थी कि दिल टूट गया

Prime Time BharatBy Prime Time BharatJune 20, 2024No Comments
WhatsApp Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Reddit Tumblr Email
DanSingh Prime Time Bharat
DanSingh_Prime_Time_Bharat
Share
WhatsApp Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

Dan Singh: मुंबई की सिने मायावी नगरी में केवल प्रतिभा के बूते सफलता हासिल नहीं होती। यहां भोलेपन के लिए कोई जगह नहीं। क्षूद्र ईर्षाओं, समूहों के हितों और फरेबी लोगों की भीड़ के बीच अपना स्थान बनाने के लिए यदि किसी में व्यावहारिक ज्ञान और चालाकी नहीं है तो बॉलीवुड की दुनिया उसे झटके से दूर फेंक देती है। हीरे ठुकरा दिये जाते हैं। संगीत का ऐसा ही एक नायाब हीरा पिछले दिनों संसार से चला बसा। जबर्दस्त प्रतिभा के धनी संगीतकार दान सिंह की हिन्दी सिने जगत ने उपेक्षा करके अपना ही नुकसान किया। पिछली सदी के साठ के दशक में मुंबई सिने संगीत में स्थान बनाने की जद्दोजहद करने के बाद अपने घर जयपुर लौट आए। मगर मुंबई को अलविदा कहने से पहले उन्होंने अपनी काबिलियत की जो झलक दिखाई उस पर हिंदुस्तानी फिल्म संगीत हमेशा नाज़ करेगा।

याद कीजिये रिलीज न हो सकी फिल्म ‘भूल ना जाना’ का मुकेश का दर्दीले सुरों में गाया ‘गमे दिल किससे कहूं कोई गम ख़्वार नहीं’ या फिर जयपुर के ही हरिराम आचार्य का लिखा सोज़ में डूबा बड़ा ही खूबसूरत, गीता दत्त की सुरीली झंकार वाली आवाज़ में गाना ‘मेरे हमनशीं मेरे हमनवां मेरे पास आ मुझे थाम ले। गुलज़ार का लिखा यह गीत भी कौन सा कम पड़ता है ‘पुकारो मुझे नाम लेकर पुकारो मुझे तुमसे अपनी खबर मिल रही है’। पचास साल बाद आज भी दान सिंह के संगीत के इन मोतियों की चमक फीकी नहीं पड़ी है।

चमक तो बॉक्स ऑफिस पर असफल रही शशि कपूर, शर्मिला टैगोर अभिनीत फिल्म ‘माई लव’ (1970) के गानों की भी जरा भी फीकी नहीं पड़ी है। गज़ल शैली में आसावरी थाट के सुरों में पिरोया गाना ‘जिक्र होता है जब कयामत का तेरे जलवों की बात होती है’और गिटार के तारों की झंकार पर तैरता गीत ‘वो तेरे प्यार का गम एक बहाना था सनम अपनी किस्मत ही कुछ ऐसी थी के दिल टूट गया’।

मुंबई में इस भोले संगीत कार का दिल बहुतर टूटा मगर यह उनकी खूबी थी कि ता उम्र कभी किसी का गीला शिकवा नहीं किया। हमेशा यही कहते थे “मन चाहा किसी को मिलता भी नहीं है”। सिने नगरी में महफ़िलें जमती जहां दान सिंह अपनी नई-नई धुनें उत्साह से सुनाते। मगर वे बॉलीवुड की रीत नहीं जानते थे इसीलिए लुट गए।

संस्कृत और हिन्दी के बड़े हस्ताक्षर हरिराम आचार्य उनके बड़े करीबी रहे। वे बताते हैं कि ‘खानदान’ फिल्म के गीत ‘तुम्हीं मेरे मंदिर तुम्हीं मेरी पूजा तुम्हीं देवता हो’ की धुन वास्तव में दान सिंह जी की कंपोजीशन थी जिसे उन्होंने एक महफिल में सुनाया जूसमें बॉलीवुड के बड़े बड़े संगीतकार भी मौजूद थे। एक बड़े संगीतकार ने दूसरे दिन इस धुन को अपने गाने में ढाल दिया। चुराकर कॉपी किए गए संगीत को फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला, पर क्रेडिट दान सिंह को नहीं मिला। इसी प्रकार भूल न जाना के लिए गीत चंदन सा बदन चंचल चितवन को दान सिंह ने कंपोज किया, लेकिन बाद में यह गीत सरस्वती चंद्र में शामिल कर लिया गया और क्रेडिट किसी और को गया। दान सिंह फिल्म लाइन में इसलिए नहीं ठहर सके क्योंकि वे वहां की धोखाधड़ी में स्वयं को ढाल नहीं पाए।

दान सिंह के जीतने भी फिल्मी गाने आज आज हमारी थाती हैं उनमें अधिकतर मुकेश के गाये हुए है। उन्होंने एक बार कहा “मुकेश में कलाम की समझ थी इसलिए उनके स्वरों में गाने का मर्म उभर आता था”। मगर ‘भूल न जाना’ के लिए उन्होंने देशभक्तिपूर्ण एक काल जयी गाना मन्नाड़े से क्या खूब गवाया ‘बही है जवां खून की एक धारा उठो हिन्द की सरजमीं ने पुकारा’।

दुर्भाग्य ने हमेशा उनका पीछा किया। फिल्म डिवीजन के भास्कर राव तथा निर्देशक शांताराम अठवाले ने उन्हें फिल्म ‘रेत की गंगा’में स्वतंत्र संगीतकार के रूप में पहली बार चांस दिया मगर फिल्म पर्दे पर नहीं आ सकी। ‘भूल न जाना’ क्योंकि चीनी आक्रमण पर बनी थी तो भारत सरकार ने अड़ंगा लगा दिया की चीन के साथ संबंध सुधारने के प्रयास चल रहे हैं इसलिए फिल्म रिलीज नहीं हो सकती। फिल्म ‘मतलबी’ के लिए दान सिंह ने दो गाने टेक कर लिए मगर फिल्म पूरी नहीं हो सकी। ‘बहादुरशाह ज़फर’ बननी शुरू हुई मगर पूरी नहीं हो सकी। केवल दो फिल्में ‘माई लव’ और ‘तूफान’ (1969) रिलीज़ हुई मगर चली नहीं। दारा सिंह अनीता अभिनीत ‘तूफान’ की तो किसी को कुछ भी याद नहीं बस दान सिंह का स्वरबद्ध किया तेज रिदम वाला मुकेश और आशा भोसले का गाया ‘हमने तो प्यार किया प्यार प्यार प्यार’की आज भी चर्चा हो जाती है।

हिन्दी फिल्मों के संगीतकारों पर बड़ा ग्रंथ ‘धुनों की यात्रा’ लिखने वाले पंकज राग की दान सिंह पर यह टिप्पणी सटीक है कि “प्रतिभा के साथ किस्मत का होना भी हमारे फिल्म जगत में बहुत ज़रूरी है, और एक ऐसा संगीतकार जिसके पास किसी का वरद हस्त न था, फिल्मी दुनिया के षड्यंत्रों और तिकड़मों के सामने टिक न पाया।

हिन्दी फिल्म वालों से वे भले ही उमेक्षित रहे हों मगर अपने संगीत की छाप उन्होंने आकाशवाणी के लिए काम करते हुए खूब छोड़ी। आकाशवाणी के लिए हिन्दी के ख्यातनाम कवियों की रचनाओं को संगीतबद्ध करने की शुरुआत दान सिंह से ही हुई। सबसे पहले सुमित्रानन्दन पंत के एक गीत को संगीतबद्ध करने की जिम्मेवारी उन्हें दिल्ली के आकाशवाणी केंद्र से मिली। पंत जी बड़े आशंकित थे कि एक नौजवान संगीतकार उनके गीत को कैसे प्रस्तुत करेगा। पंत जी की आशंका से आकाशवाणी केंद्र के निदेशक भी तनाव में थे। उन्होंने पंत जी को रेकार्डिंग के समय पंत जी को भी बुलवा लिया। पंत जी ने जब अपनी कविता की कंपोजीशन सुनी तो आगे बढ़ कर दान सिंह को गले लगा लिया। दान सिंह जी उस घटना हो याद कर उम्र के अंतिम पढ़ाव में भी भाव विभोर हो उठते थे कि पंत जी का उस दिन का आशीर्वाद आज भी मेरे साथ है।

वे विरले संगीतकार खेमचंद प्रकाश के शिष्य रहे। खेमचंद प्रकाश जिन्हें लोग 1949 की फिल्म ‘महल’ के लिए सबसे अधिक जानते हैं या फिर इस फिल्म के उस गाने के कंपोजीशन के लिए जानते हैं जिसने लता मंगेशकर को पहली बार बुलंदियों पर पंहुचाया “आएगा आएगा आने वाला”। अपने गुरु के लिए उनकी भारी श्रद्धा थी। “गुरुजी का कमाल देखिए एक ही राग यमन कल्याण में ही पूरी पिक्चर (महल) ख़त्म कर दी। इसका गाना आएगा आनेवाला पचास साल से सुन रहे हैं मगर सुनते सुनते अब भी तबीयत नहीं भरती”।

उन्होंने एचएमवी के लिए भी दर्जनों राजस्थानी गाने कम्पोज़ किए जिनके रिकार्डों की खूब धूम रही। दशकों बाद उन्हें फिर एक बार फिल्म में संगीत देने का मौका दिया जगमोहन मूंदड़ा ने। राजस्थान की महिला कार्यकर्ता भंवरी देवी के संघर्ष की कहानी पार्ट आधारित फिल्म ‘बवंडर’ के गानों में दान सिंह ने राजस्थानी लोक संगीत की खूबसूरत छटा बिखेरी। पर, पंकज राग के शब्दों में, जैसा अक्सर होता है यह “ऑफ बीट” फिल्म और इसका संगीत ठीक से रिलीज ही नहीं हुआ। फिल्म का बैकग्राउंड संगीत ग्रेमी पुरस्कार विजेता विश्व मोहन भट्ट ने रचा था इसलिए फिल्म की नामावली में सिंह और भट्ट दोनों का नाम आया।

अत्यंत नम्र, सहज और विनोदी प्रवत्ति के दान सिंह हमेशा संगीत में ही डूबे रहते थे। उनके मन में कभी कोई कलुषता नहीं रही। उनकी जीवन संगिनी डॉ. उमा याग्निक जो खुद आला दर्जे की गायिका है के साथ दान सिंह जी का ऐसा संगीत द्वय बना रहा जो अपने अंदर मिसाल है।

ठेट जयपुरी मिजाज वाले दान सिंह संगीत के अलावा अपने शौक के बारे में दूरदर्शन पर प्रसारित एक कार्यक्रम ‘जीवन के पहलू’ में बताया कि उन्हें बचपन से ही पतंफ उड़ाने का बड़ा शौक रहा। मकर संक्रांति के दिन समूचा जयपुर शहर पतंग डोर लिए छतों पर होता है। उस दिन दान सिंह भी बच्चों की तरह खुश होकर पतंग उड़ाते थे।

जयपुर की गालीबाजी के भी वे बड़े मुरीद थे। इस बारे में सवाल करने पर वे खुद झूम कर गा उठते थे ‘ सुन साथण म्हारी पिव बड़ो छै पाजी, कई बर दीनो समझाये ने छोड़े न गाली बाजी’।

गैर फिल्मी संगीतकार के रूम में उन्होंने खूब नाम कमाया इज्जत पायी। वे अपने जीवन में सफल थे। मगर नम्र इतने थे कि यही कहते थे “इस सफलता के पीछे मैं एक ही बात आपसे कहूंगा कि कुछ लोगों की दुआएं काम आ गयी वरना मुझे तो अब तक काम ही नहीं आया। मैं खुद सोचता हूं कि हो कैसे गया’।

सिने जगत की अपनी असफलता का गिला उन्होंने कभी नहीं किया। वे कहते थे “मनचाहा किसी को मिलता भी नहीं है… ज़िंदगी के कितने ही ऐसे पहलू हैं जिन पर कभी आदमी उदास हो कर रह जाता है, कभी खुश हो कर रह जाता है। हाथ कुछ नहीं आता। और कलाकार के लिए अंत में एक ही चीज रह जाती है कि गत में उसने जो अच्छा काम किया है उससे उसे लोगों की सराहना मिलती रहे, लोगों का आशीर्वाद मिलता रहे। लोग खुश रहें। बस यही एक चीज है”। इसके साथ ही वे एक शेर कह देते थे “तकदीर के लिखे तो तदबीर क्या करे, तट पर डूबे नाव तो बंदा भी क्या करे”।

आज उन्हीं का सुनाया एक और शेर याद आता है ‘ये रोशनी है हकीकत में एक छल लोगों कि जैसे जल में झलकता हुआ महल लोगों/ दरख़्त हैं तो परिंदे नज़र नहीं आते, जो मुश्ताक हैं वही हक से बेदखल लोगों’।

-राजेंद्र बोड़ा

 (‘जनसत्ता’ के रविवारी संस्करण में 26 जून 2011 को प्रकाशित)

Bollywood Dan Singh Film Jaipur Music
Share. WhatsApp Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram Email
Prime Time Bharat

Related Posts

Amit Shah: चुनावी रणनीति के चतुर चाणक्य अमित शाह की असलियत…!

May 27, 2026

Congress: राहुल गांधी नई पीढ़ी पर भरोसा करे और कांग्रेस को मजबूत करे, लेकिन…!

May 25, 2026

Rajya Sabha Election: निर्विवाद और संयमित नेता नीरज डांगी के राज्यसभा में होने के अर्थ

May 25, 2026

Leave A Reply Cancel Reply

टॉप ख़बरें

Amit Shah: चुनावी रणनीति के चतुर चाणक्य अमित शाह की असलियत…!

May 27, 2026

सिनेमा से गायब राजमहल और राजा-रानी

October 28, 2023

फिर जनम लेने जयपुर आ जाना इरफान!

October 28, 2023

पाप के पुरुषार्थ का रंगमंच बना सोशल मीडिया !

December 26, 2023
यह भी देखें
देश-प्रदेश
6 Mins Read

Ram Mandir प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी को करेंगे प्राण-प्रतिष्ठा, तैयारिया ज़ोर-शोर से

By Prime Time BharatDecember 19, 2023

Ram Mandir प्राण-प्रतिष्ठा की तैयारी ज़ोर-शोर से चल रही है। अयोध्या में राम मंदिर (Ram…

Ram Mandir: राम नाम जपनेवाले मोदी को हराने का कांग्रेस का सपना कभी पूरा नहीं होगा

January 6, 2024

Mathura Shahi Idgah News : मथुरा में शाही ईदगाह के सर्वे पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाई गई , जाने पूरा मामला

January 16, 2024

Tamilnadu: प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु में 20 हजार करोड़ की परियाजनाएं राष्ट्र को अर्पित कीं

January 2, 2024
हमें फॉलो करें
  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • Instagram
  • YouTube
  • Vimeo
About Us
About Us

‘प्राइम टाइम’ की शुरुआत पर कोई बड़ी बात नहीं, मगर यह कहना जरूरी है कि इसके उद्भव के लिए हमें एक बड़ी मजबूरी में सोचना पड़ा। मजबूरी यही कि हमारे हिंदुस्तान में वास्तविक अर्थों में जैसी होनी चाहिए, वैसी पत्रकारिता का मार्ग तेजी से सिकुड़ रहा है।

Contact Us:-
Mobile:- +91-9821226894
Email:- contact@primetimebharat.com

Facebook X (Twitter) Pinterest YouTube WhatsApp
Pages
  • About us
  • Our Team
  • Contact Us
  • Cookies Policy
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
लेटेस्ट ख़बरें

Amit Shah: चुनावी रणनीति के चतुर चाणक्य अमित शाह की असलियत…!

May 27, 2026

Congress: राहुल गांधी नई पीढ़ी पर भरोसा करे और कांग्रेस को मजबूत करे, लेकिन…!

May 25, 2026

Rajya Sabha Election: निर्विवाद और संयमित नेता नीरज डांगी के राज्यसभा में होने के अर्थ

May 25, 2026
© 2026 Prime Time Bharat | All Rights Reserved |

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.