Rajasthan Congress: राजस्थान कांग्रेस में पार्टी के भीतर अंतर्विरोधों का नया दौर शुरू हो चुका है। संगठन में उभरते घटनाक्रम संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra)ने भी अपना मोर्चा खोल दिया है। लंबे समय तक केवल अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और सचिन पायलट (Sachin Pilot) के बीच की खींचतान सुर्खियों में रही, लेकिन अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी अपनी राजनीतिक तलवारें म्यान से बाहर निकाल ली हैं। पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय और कांग्रेस नेता दिनेश खोड़निया के नेतृत्व में वागड़ से भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने के लिए गुरुवार को 309 कार्यकर्ता जयपुर पहुंचे। पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया (Mahendrajeet Singh Malviya) के कांग्रेस प्रवेश पर डोटासरा की बयानबाजी, माइक छीनने ही हरकत और बड़े नेताओं के विरोध के सुर आलापने के ताजा घटनाक्रम ने प्रदेश में कांग्रेस की अंदरूनी हालत के खराब होने के संकेत दे दिए हैं। साफ लग रहा है कि कांग्रेस तकदीर के तिराहे पर है, और पार्टी में प्रवेश करते ही अपने साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा किए गए व्यवहार से मालवीय सन्न।

मंच पर मालवीया के हाथ से डोटासरा ने माइक छीना
दिग्गज आदिवासी नेता और पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के साथ कांग्रेस में लौटे सैकडों कार्यकर्ताओं के सामने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राजनीतिक शालीनता छोड़कर अपने व्यवहार ने जो परिदृश्य बनाया, उसने डोटासरा के संगठनात्मक अनुशासन और उनकी नेतृत्व शैली, दोनों पर सवाल खड़े कर दिए। मंच पर मालवीया के हाथ से डोटासरा का माइक छीनना, ‘चौथी बार फिर सरकार’ का नारा लगाने से रोकना, मालविया को अपने से बड़ा नेता बताने के बाद खुद को उनसे बड़ा साबित करना, और डोटासरा के सार्वजनिक रूप से उन्हें टोकने, तथा यह तक कह देना कि मेरी अनुशंसा के बिना कांग्रेस में उनकी वापसी संभव नहीं थी, जैसे पूरे घटनाक्रम ने यह संदेश दिया कि कांग्रेस का वर्तमान प्रदेश नेतृत्व खुद ही अनुशासनहीनता का शिकार है और यह भी कि प्रदेश अध्यक्ष संगठन के भीतर अपनी भूमिका और अधिकार को सार्वजनिक रूप से स्थापित करना चाहते हैं।
कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर नई खींचतान
राजनीति में संगठन और नेतृत्व के बीच संतुलन सबसे बड़ी पूंजी होता है। यदि मतभेद सार्वजनिक मंचों पर दिखाई देने लगें, तो विपक्ष से पहले पार्टी की आंतरिक एकजुटता प्रभावित होती है। राजस्थान में कांग्रेस पहले ही गहलोत-पायलट विवाद की लंबी राजनीतिक कीमत चुका चुकी है। यह भी तथ्य है कि राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत का राजनीतिक कद अब भी सबसे बड़ा माना जाता है। संगठन के लाखों कार्यकर्ताओं और विधायकों के बड़े वर्ग पर उनका प्रभाव किसी से छिपा नहीं है। उनके समर्थकों से जुड़े किसी भी घटनाक्रम पर प्रदेश अध्यक्ष का ऐसा सार्वजनिक व्यवहार स्वाभाविक रूप से राजनीतिक संदेश देता है। ऐसे में यदि एक नया शक्ति केंद्र और नया टकराव उभरता है, तो यह पार्टी के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकता है। इससे यह धारणा मजबूत होती है कि कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर नई खींचतान आकार ले रही है। वैसे गहलोत ने कहा है कि कि लंबे समय से ये लोग मिलने की जिद कर रहे थे। मालवीयाजी ने भी बार-बार कहा तो फिर मैंने कहा कि ठीक है। मुझसे भी मिलने आए, उन्होंने पीसीसी अध्यक्ष से भी टाइम लिया था और बताया था कि हम वहां भी जाकर आशीर्वाद लेंगे, मिल लेंगे।

गहलोत की तरह डोटासरा भी शक्ति केंद्र की चाहत में
कांग्रेस में लौटे पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के साथ आए सैकडों कार्यकर्ताओं के सामने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डोटासरा की तीखी प्रतिक्रिया और लगभग दुर्व्यवहार की श्रेणी में रखे जाने वाले व्यवहार को, उनकी शैली नहीं बल्कि टकराव के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं थी, कार्यकर्ता इसे दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष की अगली नई भूख के रूप में देख रहा है। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते हैं कि राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष डोटासरा की ताजा तस्वीर ने खुद ही साफ कर दिया है कि राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी का एक केंद्र वे भी बनना चाहते हैं। परिहार कहते हैं कि राजस्थान में जो वैचारिक रूप से कांग्रेस से जुड़ा आदिवासी कार्यकर्ता है, वह डोटासरा को एक बदतमीज और बकवासी व्यक्ति के रूप में देख रहा है, क्योंकि उनमें वह न्यूनतम राजनीतिक या सामाजिक समझदारी भी नहीं है कि किसके सामने बोलना है और कहां क्या करना है। परिहार कहते हैं कि अपने नेता मालविय. के साथ किए गए डोटासरा के इस व्यवहार से आदिवासी कार्यकर्ता दुखी है। वरिष्ठ पत्रकार अरविंद चोटिया कहते हैं कि इंतजार कीजिए। कांग्रेस में अंदरखाने बहुत कुछ चल रहा है। कुछ कुछ बाहर भी आ रहा है। लेकिन बाहर उतना ही आ रहा है, जितना आने दिया जा रहा है। चोटिया कहते हैं कि आने वाले समय में और भी बहुत कुछ बाहर आएगा, देखते रहिए।
कांग्रेस में संगठन को नुकसान पहुंचने की आशंका
उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी लगातार कांग्रेस को संगठनात्मक रूप से मजबूत और एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन राजस्थान जैसे बड़े और कांग्रेस की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण राज्य में यदि नेतृत्व के अलग-अलग केंद्र खुलकर सामने आते हैं, तो संगठन को नुकसान पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि राजनीति में जिन गहलोत ने डोटासरा को अपनी सरकार में मंत्री बनाया और प्रदेश अध्यक्ष बनाया, अब वे उन्हीं को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस की वर्तमान खींचतान से यह तो साफ है कि यह केवल एक क्षणिक विवाद नहीं है, बल्कि भविष्य में सत्ता आने पर की राजनीतिक भूख है, जिसमें नेता को प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आती दिख रही है, लेकिन वर्तमान हालात में कांग्रेस सत्ता से दूर दिख रही है। राजस्थान कांग्रेस का कार्यकर्ता इसीलिए असमंजस में है। क्योंकि कांग्रेस तकदीर के तिराहे पर खड़ी है, जहां से एक रास्ता अशोक गहलोत की ओर जाता है, दूसरा सचिन पायलट की ओर, तथा तीसरी एक नई पगडंडी डोटासरा खुद के लिए संवार रहे हैं।
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राकेश दुबे (वरिष्ठ पत्रकार)
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