Vasundhara Raje: बीजेपी की सरकार के महिला आरक्षण बिल का विरोध। वह भी वसुंधरा राजे का, और सीधे संघ परिवार के मुखिया मोहन भागवत से। सियासत का यह सबसे बदसूरत चेहरा है। जिस पार्टी की सरकार ने महिला आरक्षण बिल संसद में रखा। उसी की वरिष्ठतम महिला नेता का विरोध वायरल। एक चिट्ठी आई। मुद्दा बड़ा था, सो विरोधियों को नाम भी बड़ा चाहिए था। सो विरोध की चिट्ठी वसुंधरा राजे के नाम से। शब्द चुभते हुए, और सवाल तीखे। महिला आरक्षण के खिलाफ, सरकार की मंशा पर सवाल और नरेंद्र मोदी की नियत पर निशाना। जैसे किसी महिला ने ही महिलाओं के हक पर सवाल खड़े कर दिए हों। लेकिन सच? सच उतना ही काला था, जितना यह खेल। वह चिट्ठी फर्जी थी, जाली थी, गढ़ी हुई थी और सियासत की गंदी प्रयोगशाला में तैयार की गई थी। यह सिर्फ एक फर्जी दस्तावेज नहीं था। यह सियासत की घटिया सोच का खुला प्रदर्शन था। नैतिक दिवालियेपन का दर्शन था। और महिला के नाम से महिला अधिकार पर हमला था। यह दोहरा अपराध है और दोहरी शर्म भी। सिय़ासत अब ऐसी साजिशों से संवर रही है।

बड़ी नेता के नाम से झूठ गढ़ने की सियासत
वसुंधरा राजे… राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री रहीं दिग्गज नेता। वह सिर्फ एक नाम नहीं। राजस्थान की पहचान है। बीजेपी की राजनीति की एक मजबूत धुरी। केंद्र में मंत्री, सांसद और विधायक होने के साथ साथ बीजेपी में बड़े पदों पर भी। आज भले सत्ता में किसी पद पर नहीं, लेकिन पद पर बैठे लोगों से भी बड़े कद की नेता। जनता के दिलों पर राज करने के मामले में भी सम्मान में भी कोई कमी नहीं। ऐसी नेता के नाम से झूठ गढ़ना… यह सिर्फ सियासत नहीं, यह सियासत के चरित्र का पतन है। सवाल उठता है कि कौन लोग हैं ये? जो अपनी बात कहने के लिए झूठ का सहारा लेते हैं? क्या इतना डर है? क्या इतना असुरक्षा बोध है? कि सच बोलने की हिम्मत नहीं बची? लोकतंत्र में महिला आरक्षण का विरोध करना है, तो खुलकर कीजिए। तर्क दिजिए, बहस कीजिए। लेकिन यह क्या तरीका है?
तीन कांग्रेसियों को पकड़ा तो नेता भड़के
वसुंधरा राजे ने स्पष्ट किया। यह शुभचिंतकों की साजिश है। और यहीं, साजिश की परतें खुलने लगीं। जो लोग यह खेल खेल रहे थे, वे बेनकाब हो गए। उनका चेहरा लोग जान रहे हैं। मध्य प्रदेश के तीन कांग्रेसियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो गई, और पुलिस ने दबोच भी लिया। एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का बयान आया। कांग्रेस के एमपी प्रभारी हरीश चौधरी ने भी विरोध जताया। जरूरी नहीं यह गिरफ्तारी सही है, संभव है कि ध्यान भटकाने की कोशिश भी हो। लेकिन यही सियासत है, जो सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिर जाती है। वह मानसिकता है, जो मुद्दों से नहीं, मायाजाल से लड़ती है। जिसके पास तर्क नहीं होते, वह भ्रम फैलाते हैं। जिसके पास सत्य नहीं होता, वह झूठ गढ़ता है। मुद्दा महिला आरक्षण का है, इसीलिए गंभीर है, संवेदनशील है और ऐतिहासिक भी। लेकिन उसे इस स्तर तक गिराना? यह लोकतंत्र के साथ मजाक है। एक सम्मानित महिला नेता के नाम पर झूठी चिट्ठी बनाकर देश को गुमराह करना? यह राजनीति नहीं, षड्यंत्र है।

सियासी नैतिकता में गिरावट के खतरनाक संकेत
वसुंधरा राजे पर यह हमला दरअसल उनकी साख पर नहीं, उनकी ताकत पर था। क्योंकि सम्मानित चेहरों को निशाना बनाकर झूठ ज्यादा तेजी से फैलता है। लेकिन यह दांव उल्टा पड़ गया। सच सामने आ गया। और झूठ, बेपर्दा हो गया। अब सवाल, और बड़ा है। क्या राजनीति इतनी गिर जाएगी? क्या सत्ता की भूख, नैतिकता को पूरी तरह निगल जाएगी? अगर हां, तो यह खतरनाक संकेत है। लेकिन उम्मीद अभी बाकी है। क्योंकि हर झूठ के बाद, सच और मजबूत होकर सामने आता है। और इस बार भी आया। सच यही है कि वसुंधरा राजे ही सबसे लोकप्रिया नेता हैं। राजस्थान बीजेपी में उनका कोई सानी नहीं। वसुंधरा राजे के बहाने यह सिर्फ एक नेता का अपमान नहीं। यह उन लाखों महिलाओं का अपमान है, जो राजनीति में अपनी जगह बनाना चाहती हैं। जो संघर्ष कर रही हैं। जो उम्मीद देख रही हैं। और ऐसे समय में, उनके नाम पर, उनके अधिकार पर, ऐसी गंदी चालें? यह अक्षम्य है।
देश अब इतना भोला नहीं, सब समझ रहा है
यह घटना, एक चेतावनी है। उन लोगों के लिए, जो राजनीति को गंदगी में बदल रहे हैं। और एक संदेश भी कि लोग अब चुप नहीं रहेंगे। महिला आरक्षण की लड़ाई, ऐसी साजिशों से कमजोर नहीं होगी। बल्कि और मजबूत होगी। क्योंकि जब झूठ इतना गिरता है, तो सच उतना ही ऊंचा उठता है। और यह षड्यंत्र, महिला सम्मान के खिलाफ है। क्योंकि यहां दो निशाने हैं। एक तो महिला आरक्षण। और दूसरा, एक दमदार दिग्गज महिला नेता की साख। दोनों पर एक साथ वार। और वार भी पीठ पीछे से। लेकिन लोकतंत्र सब जानता है। देश अब इतना भोला नहीं है। वह भी समझ रहा है कि क्या सच है और क्या झूठ। इस पूरे घटनाक्रम में, एक बात बिल्कुल साफ है — वसुंधरा राजे का कद और बड़ा हुआ है। क्योंकि उन पर वार हुआ। झूठ से हुआ। और वह डटी रहीं। साफ रहीं। अडिग रहीं। यही असली ताकत है। यही असल राजनीति है। बाकी सब… सिर्फ सियासत का शर्मनाक तमाशा है।
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निरंजन परिहार (राजनीतिक विश्लेषक)
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