Health: स्वास्थ्य ही जीवन का मूल तत्व है। आधुनिक समय में, विशेषकर महानगरों में रहने वाले लोगों के लिए यह बात और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। बड़े शहरों में अवसरों की कोई कमी नहीं होती, उच्च वेतन, बेहतर करियर, आधुनिक सुविधाएं। लेकिन इन सबके साथ-साथ स्वास्थ्य (Health) से जुड़ी चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी होती हैं। सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सीएल बंबोली (Dr. C.L. Bamboli) कहते हैं कि बड़े शहरों में बड़ी कमाई है, तो स्वास्थ्य की परेशानियां भी बड़ी है। महानगरीय जीवन महंगा है, तो चिकित्सा (Medical) उससे भी महंगी है। उस मुश्किल इलाज के हो जाने के बाद जीवन को फिर से पटरी पर लाना तो और भी मुश्किल। इसलिए सबसे पहले स्वयं पर ध्यान दीजिए और स्वस्थ रहिए।
महानगरीय जीवन में बीमारी की संभावना ज्यादा
महानगरीय जीवन की तेज़ रफ्तार अक्सर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य की अनदेखी करने पर मजबूर कर देती है। लंबे कार्य घंटे, लगातार स्क्रीन के सामने बैठना, अनियमित खानपान और बढ़ता हुआ मानसिक तनाव, ये सभी मिलकर शरीर और मन दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा, शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण, शुद्ध पानी की कमी, और मिलावटी खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य को और भी कमजोर करते हैं। ऐसे में व्यक्ति जितना अधिक कमाता है, उतना ही अधिक उसे इलाज पर खर्च करना पड़ सकता है। विडंबना यह है कि इलाज के बाद भी सामान्य जीवन में लौटना आसान नहीं होता। डॉ. सीएल बंबोली कहते हैं कि भीड़ भरे मुंबई शहर में हर रोज लाखों लोग लोकल ट्रेनों में पसीने भरी यात्रा करते हैं और दिन भर घर बेहद दूर रहने की वजह से स्ट्रीट फूड खाने को मजबूर हैं। ऐसे में बीमारी फैलने की संभावना बेहद ज्यादा रहती है।

शरीर स्वस्थ तो ही पद, प्रतिष्ठा, धन का महत्व
भारतीय संस्कृति में भी स्वास्थ्य को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। शास्त्रों में भी कहा है कि “आरोग्यं परमं भाग्यं” अर्थात स्वस्थ शरीर ही सबसे बड़ा सौभाग्य है। डॉ. सीएल बंबोली कहते हैं कि यदि शरीर स्वस्थ नहीं है, तो व्यक्ति के पास चाहे कितना भी धन, पद या प्रतिष्ठा क्यों न हो, वह जीवन का वास्तविक आनंद नहीं ले सकता। अस्वस्थ व्यक्ति न तो अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन कर पाता है और न ही अपने सपनों को साकार कर सकता है। वे कहते हैं कि सबसे पहले स्वयं पर ध्यान दीजिए और स्वस्थ रहिए। ऐसी परिस्थितियों में यह आवश्यक हो जाता है कि हम अपने दैनिक जीवन में कुछ सरल लेकिन प्रभावी आदतों को अपनाएं।
संतुलित जीवन शैली ही स्वास्थ्य का आधार
सबसे पहले, संतुलित आहार अत्यंत आवश्यक है। भोजन में पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए—हरी सब्जियां, फल, प्रोटीन और पर्याप्त पानी। जंक फूड और अत्यधिक तले-भुने भोजन से बचना चाहिए। दूसरा, नियमित शारीरिक गतिविधि को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। चाहे वह सुबह की सैर हो, योग, व्यायाम या कोई खेल, कम से कम 30 मिनट प्रतिदिन शरीर को सक्रिय रखना जरूरी है। तीसरा, पर्याप्त नींद लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आजकल लोग नींद को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि 7–8 घंटे की गहरी नींद शरीर को पुनः ऊर्जावान बनाती है और मानसिक संतुलन बनाए रखती है। चौथा, तनाव प्रबंधन, जो ध्यान (मेडिटेशन), प्राणायाम और सकारात्मक सोच के माध्यम से जरूरी है। अंत में, नियमित स्वास्थ्य जांच (हेल्थ चेकअप) भी बेहद जरूरी है। समय-समय पर जांच कराने से बीमारियों का पता शुरुआती अवस्था में ही चल जाता है, जिससे उनका इलाज आसान हो जाता है।
जनसामान्य के लिए शुरू किया हॉस्पिटल
राजस्थान के गोड़वाड़ इलाके में 40 साल तक चिकित्सा सेवाएं के बाद राजस्थान सरकार में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पद से रिटायर हुए, तो डॉ सीएल बंबोली मुंबई आए और आम लोगों को बेहद किफायती इलाज की सेवाएं शुरू कीं। गोरेगांव पश्चिम में 22 साल पहले भगवान महावीर डाइग्नोस्टिक सेंटर एंड हॉस्पिटल शुरू किया। उनका कहना है कि मुंबई में इलाज बेहद महंगा है, जिसे सामान्य लोगों के लिए वहन करना बेहद मुश्किल है। इसीलिए उन्होंने जन-सामान्य के लिए किफायती इलाज की यह कोशिश की। वे कहते हैं कि महानगरों की चकाचौंध में स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना एक बड़ी भूल है। यदि हम सच में जीवन का आनंद लेना चाहते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमें सबसे पहले अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी। क्योंकि अंततः स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी संपत्ति है।
– राकेश दुबे (वरिष्ठ पत्रकार)
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