Ajit Pawar: सियासत में कोई भी काम यूं ही नहीं होता। यहां हर कदम अगले कदम की तैयारी होता है और हर पहल भविष्य की किसी संभावना का संकेत। राजनीति में घटनाओं को उनके सतही अर्थों से नहीं, बल्कि उनके निहितार्थों से पढ़ा जाता है। इसी परंपरा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) अजित पवार (Ajit Pawar) को दी गई बीजेपी की श्रद्धांजलि का त्वरित और प्रभावशाली विज्ञापन आज सियासी हलकों में गहन चर्चा का विषय है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गहरे शोक में है। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अपने वरिष्ठ नेता के असामयिक निधन से गमगीन। यह स्वाभाविक है कि पार्टी अपने नेता को श्रद्धांजलि दे। यह भी स्वाभाविक है कि अजित पवार उपमुख्यमंत्री थे, तो आधिकारिक तौर पर महाराष्ट्र सरकार शोक प्रकट करे। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जो बात असाधारण है, वह है, बीजेपी (BJP) की महाराष्ट्र इकाई द्वारा प्रकाशित फ्रंट का फुल-पेज श्रद्धांजलि विज्ञापन। अजित पवार मौजूदा सरकार का हिस्सा थे। यह विज्ञापन अगर महाराष्ट्र सरकार की ओर से दिया जाता, तो इसे समूचे महाराष्ट्र की ओर से दी गई श्रद्धांजलि माना जाता। लेकिन यहां विज्ञापन सरकार का नहीं, बल्कि पार्टी का है, बीजेपी का है। वह भी कोई छोटा, औपचारिक शोक संदेश नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये खर्च कर प्रमुख समाचार पत्रों के मुखपृष्ठों पर प्रकाशित प्रभावशाली विज्ञापन। यह तथ्य ही इस पूरे घटनाक्रम को सामान्य से अचानक असामान्य बना देता है। क्योंकि राजनीति में हर वक्त केवल सत्ता में बने रहना के अलावा कुछ और सोचा ही नहीं जाता।

भाजपा की भावांजलि या राजनीति को कोई राज
भारतीय राजनीति में आम तौर पर शोक संदेशों की भी एक अलिखित मर्यादा और परंपरा रही है। विरोधी दल के नेता के निधन पर संवेदना व्यक्त की जाती है, ट्वीट होते हैं, बयान आते हैं, और विज्ञापन भी। लेकिन किसी अन्य दल के नेता के लिए इतने व्यापक, त्वरित और तात्कालिक तरीके से बेहद महंगे श्रद्धांजलि विज्ञापन, वह भी सीधे पार्टी की ओर से, यह दृश्य बेहद दुर्लभ है। अगर इतिहास में झांका जाए, तो ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं। 2014 में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामाराव के परिवार या 2018 में अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर सभी दलों ने व्यापक श्रद्धांजलि दी थी, लेकिन तब वाजपेयी एक सर्वस्वीकृत राष्ट्रीय नेता थे और देश के प्रधानमंत्री भी रहे थे। वहां सरकार और पार्टी के बीच की रेखा लगभग मिट चुकी थी। इसी तरह, 2022 में मुलायम सिंह यादव के निधन पर भी उत्तर प्रदेश में कई दलों ने बड़े स्तर पर शोक प्रकट किया, लेकिन किसी एक पार्टी द्वारा दूसरे दल के नेता के लिए इतने त्वरित और खर्चीले मुखपृष्ठीय विज्ञापन देखने को नहीं मिले। यही कारण है कि इस श्रद्धांजलि की तात्कालिकता और व्यापकता को लेकर कांग्रेस, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और स्वयं बीजेपी के भीतर भी सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल संवेदना है, या इसके पीछे कोई सियासी संदेश छिपा है?
महाराष्ट्र की राजनीति पुनर्संयोजन की प्रयोगशाला
वैसे भी, महाराष्ट्र की राजनीति वैसे भी गठबंधन, टूट-फूट और पुनर्संयोजन की प्रयोगशाला रही है। शिवसेना के टूटने से लेकर कांग्रेस के फूटने तक। एनसीपी के विभाजन, अजीत पवार का सत्ता में आने और शरद पवार का अलग खेमे में जाने की राजनीतिक घटनाओं के बीच बीजेपी की हर रणनीति को दीर्घकालिक चश्मे से देखा जाता है। ऐसे में यह श्रद्धांजलि विज्ञापन केवल शोक व्यक्त करने का माध्यम नहीं रह जाता, बल्कि संभावित सियासी संकेत का रूप ले लेता है। कुछ विश्लेषक इसे एनसीपी के अजित पवार गुट के प्रति बीजेपी की सार्वजनिक स्वीकृति और अपनत्व के प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं। कुछ इसे भविष्य के लिए रिश्तों को और मजबूत करने का संदेश मान रहे हैं। वहीं, कुछ का कहना है कि यह शरद पवार गुट को यह जताने का तरीका भी हो सकता है कि सत्ता, संसाधन और सियासत किसके साथ खड़े हैं। वैसे भी, राजनीति में संवेदनाओं की सांसें और रणनीतियों के राज अक्सर एक-दूसरे में घुले होते हैं। माना कि अजीत पवार के प्रति यह श्रद्धांजलि सच्चे शोक की अभिव्यक्ति है, मगर इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि यह सियासी गणित का एक सोचा-समझा नया अध्याय शुरू करने की कोशिश भी।

बीजेपी की राजनीति में उसकी टाइमिंग और संदर्भ
महाराष्ट्र की सियासत में अजित पवार के बीजेपी की इस असामान्य श्रद्धांजलि को लंबे वक्त तक याद रखा जाएगा, लेकिन इसके वास्तविक मायने आने वाले कुछ ही दिनों में अधिक स्पष्ट हो जाएंगे, यह भी तय है। बीजेपी की राजनीति हमेशा रणनीतिक प्रतीकों, सुदीर्घ संकेतों और व्यापक संदेशों पर आधारित रही है। चाहे वह किसी कार्यक्रम में मंच साझा करने का तरीका हो या किसी नेता के प्रति सार्वजनिक सम्मान का प्रदर्शन। बीजेपी के हर कदम में अपनी टाइमिंग और अपने संदर्भ होते हैं। जिनको समझना, राजनीति के जानकारों के लिए भी आसान भले ही ना हो, लेकिन मुश्किल तो कतई नहीं है। इसी संदर्भ में अजीत पवार को यह श्रद्धांजलि विज्ञापन भले ही, भावनात्मक भाजपाई भावांजली हो, मगर रणनीतिक ज्यादा लगता है, यही सच है। और हां, अंत में एक बात यह भी कि राजनीति में बीजेपी वह सब कुछ कर जाती है, जो बाकी राजनीतिक पार्टियां सोच भी नहीं पाती। क्योंकि बीजेपी केवल सियासत, सत्ता और सदा सम्हले रहने के अलावा और कुछ नहीं सोचती। जो कि सियासत में सर्वाधिक सही भी है, समयानुकूल भी और सत्ता में बने रहने के लिए सबसे जरूरी भी।
– निरंजन परिहार (राजनीतिक विश्लेषक)
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