-निरंजन परिहार
Glasgow: ग्लासगो… एक शहर खामोश सा… एक शहर धड़कता सा… और एक शहर लुभावना सा। ग्लासगो यूके (UK) का एक शहर नहीं, एहसास है। ग्लासगो (Glasgow) एक ठहरी हुई लय सा है, बहती हुई सोच सा है और उड़ती हुई हवा सा है। यहां पत्थर बोलते हैं, इमारतें अपनी बुलंदियों का बखान करती है, और हवाएं इतिहास सुनाती है। ग्लासगो स्कॉटलैंड देश का ये सबसे बड़ा शहर है, जो , हर किसी के मन में हूक सी जगाता है।
ग्लासगो की पहचान वहां की नदी क्लाइड से शुरू होती है। क्लाइड, जिसने इस शहर को बनाया, जिसने जहाज़ गढ़े, और जिसने मजदूरों के हाथों में आत्मसम्मान दिया। कभी यह शहर औद्योगिक ताक़त था। शिपयार्ड, स्टील, भाप, और मशीनों की गूंज। फिर समय बदला। मशीनों ने अपनी गति को रोक दिया, कारखाने शांत हुए और उद्योग अटक गए। लेकिन ग्लासगो टूटा नहीं। उसने खुद को फिर गढ़ा। आज ग्लासगो ज्ञान का शहर है। शिक्षा का शहर है। संगीत से सजते सुरों का शहर है। आर्ट और आर्किटेक्चर का शहर है।

यहां की यूनिवर्सिटी और हर तरफ गॉथिएक शैली की भव्य और नयनाभिराम इमारतें। उन इमारतों पर शिल्प की शैली में बात करते पत्थरों में उकेरी हुई विद्या की विनम्रता। ये दुनिया भर के छात्रों की आंखों में भविष्य के सपनों का शहर है। यूके के बेहद खूबसूरत देश स्कॉटलैंड की राजधानी तो एडिनबर्ग है, जिसे बालचाल मेें एडिनबरा कहते हैं।, लेकिन स्कॉटलैंड का सबसे बड़ा शहर ग्लास्गो ही है। जितना बड़ा शहर, उतना ही बड़ा इसका दिल, उसके बड़े होने से भी शायद ज्यादा बड़ा है।
ग्लासगो की सड़कों पर चलते हुए आप अकेले नहीं होते। आपके साथ चलता है चार सौ साल का इतिहास, इतिहासकारों के अनुभव और अनुभवी लोगों की विरासत। यह शहर भव्यता में तो यकीन करता है, लेकिन भव्यता के दिखावे में यकीन नहीं करता। यह सच्चा है, अच्छै है, मगर थोड़ा सा टफ है, पर दिल से ईमानदार। यहां के लोग ग्लास्वेजियन बेहद सरल, सादे और सीधे भी, अक्सर हंसमुख और अपनेपन से भरे। बारिश यहां मेहमान नहीं। स्थायी निवासी है, कभी भी आ जाती है। लेकिन यही बारिश शहर को धोकर और चमकदार भी बना देती है।

ग्लासगो की खासियत उसकी सांस्कृतिक विविधता है। म्यूज़ियम, गैलरी, लाइव म्यूज़िक। हर मोड़ पर कला और हर चौराहे पर चमक। केल्विंग्रोव, जहां पेंटिंग सांस लेती है और जहां इतिहास बोलता सा लगता है। जॉर्ज स्क्वायर, ग्लासगो का मुख्य स्थल। जहां राजनीति, आंदोलन और जनभावना की प्रतिध्वनि सुनाई देती है। जॉर्ज स्क्वायर में रॉबर्ट बर्न्स, जेम्स वाट और सर रॉबर्ट पील जैसे कई इतिहासपुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित हैं, तो शहीद स्मारक भी हैं। यहां घूमते हुए, एक सवाल जो दिल पूछता है कि क्या ग्लासगो सचमुच खूबसूरत शहर है? जी हां, खूबसूरत तो है। लेकिन पेरिस जैसी चमक नहीं, रोम जैसा खिंचाव नहीं और लंदन जैसी भव्यता भी नहीं। मगर, फिर भी खूबसूरत है, एक ठहरी हुई खूबसूरती वाला शहर। यह खूबसूरती है ईमानदारी की। मेहनत की है, और आत्मसम्मान की।
ग्लासगो के हर कोने में भारत दिखता है, भारतीयता झलकती हैं और भारत के लोग मिलते हैं। ग्लासगो और भारत का नाता नया नहीं है। सबसे पहले, सन 1707 में संघ अधिनियम के बाद, स्कॉटिश लोग भारत के साथ व्यापार में शामिल हुए और बारतीयों को भी बुलाया। यह नाता मुख्य रूप से 18वीं-19वीं शताब्दी के दौरान औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश शासन के तहत ज्यादा मजबूत हुआ। भारतीय नाविक, व्यापारी, छात्र वहां पहुंचे और धीरे-धीरे वहां यहां बसते गए। भारतीयों की दुकानें खुलीं तो ग्लासगो में मसालों की महक फैली। रेस्टोरेंट आए, तो भारतीय व्यंजनों की खुशबू ने खबरदार किया। दिल्ली के छोले – कुलचे ग्लासगो में भी मिलते हैं और मुंबई का वड़ा-पाव और पाव-भाजी ने भी यहां अपना माहौल बना रखा है। राजस्थान की दाल-बाटी मिल जाती है।
आज ग्लासगो में भारतीय समुदाय, उस शहर की धड़कन का हिस्सा है। ज्यादातर भारतीय नौकरीपेशा हैं, डॉक्टर, बैंकर, सीए, इंजीनियर, आईटी प्रोफेशनल, टैक्सी ड्राइवर, छात्र और शिक्षक। भारत के लगभग हर प्रदेश के लोग यहां है, लेकिन पंजाबीयत ने यहां की नसों में बिजनेस की बारीकियां तराशी, तो भारतीयों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़े। दीवाली पर ग्लासगो में हजारों घर दीयों की रोशनी में खिलते हैं, तो फागुन में होली के रंग भी यहां मिलते हैं। गुरुद्वारों की अरदास भी इस शहर की फिज़ा में हर रोज घुलती है। ग्लासगो ने भारतीयों को अपनाया और भारतीयों ने ग्लासगो को घर बनाया।

ग्लासगो, दरअसल, संघर्ष की पाठशाला है। पुनर्निर्माण की मिसाल है। और खुद को फिर से गढ़ने की कहानी है। यह शहर सिखाता है कि पतन के बाद फिर से उठना कैसे होता है। ग्लासगो सिटी कोई पोस्टकार्ड सिटी नहीं। यह रियल सिटी है। जहां सपने लक्ज़री में नहीं, मनुष्य की मेहनत में पलते हैं। यहां जिंदगी और उससे जुड़ी मुश्किलों को संवारने के सपने भी साथ साथ चलते हैं। यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है। यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।
ग्लासगो के बारे में सही मायने में कहें, तो यह कोई एक शहर नहीं, बल्कि एक गहरी सोच है। जीवन को जीतने की जीजीविषा की एक जीवंत कहानी है और हर किसी को अपनापन बांटकर उसे आगे बढ़ने दिल खोल कर सहयोग करने की मिसाल है की ग्लासगो। मनुष्य जीवन में अगर, रोजमर्रा की जिंदगी को जीने से फुर्सत मिले, और जेब में अतिरिक्त पैसा हो, तो ग्लासगो के लिए जरूर उड़ जाइएगा, कुछ दिन भी यहां रह लेंगे, तोभी यह शहर जीवन भर आपको दिल के दरवाजे पर दस्तक न देता रहे, तो कहना!
(लेखक निरंजन परिहार राजनीतिक विश्लेषक हैं)
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