-त्रिभुवन
Rajendra Singh Rathore: राजस्थान के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा (BJP) नेता राजेंद्रसिंह राठौड़ (Rajendra Singh Rathore) राजस्थान की राजनीति की अलग शख़्सियत हैं। एक वही हैं, जो सियासी सवेरे की आहट पर सूरज को टाँग कर चुपचाप आगे निकल लेने वाला गुरुमंत्र जानते हैं। वे छात्र राजनीति के समय से ही हौसले वाले नेता रहे हैं और उन्होंने कभी भी मैदान छोड़ना नहीं सीखा। भले वह उनका पहला चुनाव परिणाम ही क्यों न हो। राजस्थान (Rajasthan) की राजनीति में उन्होंने झंझावात भी बहुत झेले हैं। कोई और होता तो पक्का राजनीति छोड़कर कोई धंधा ढूंढ़ लेता।
समकालीन राजनेताओं की तुलना में बेहतर
राजेंद्रसिंह राठौड़ की राजनीतिक माँसपेशियों पर पसीने की जैसी और जितनी चमक है, उससे अधिक उनकी भीतरी नमनीयता उन्हें अपने समकालीन राजनेताओं की तुलना में बेहतर खड़ा रखने में मददगार सिद्ध हुई है। वे उन लोगों में कतई नहीं हैं, जो अपनी सियासी घड़ी को इधर-उधर रखकर भूल जाएं। इस प्रदेश में अशोक गहलोत के बाद अगर किसी की सियासी घड़ी का अलार्म सही समय पर बजता है तो वह राजेंद्र राठौड़ ही हैं। गहलोत में तो यह ख़ूबी है कि वे अलार्म भले लगाएं; लेकिन उनको एनएसयूआई का अध्यक्ष बनने के समय से ही बिना नींद लिए सोने की आदत है। आप कह सकते हैं कि वे सोते-सोते भी जागने के माहिर हैं और अगर कभी नींद में भी हों तो कोई-न-कोई रणनीति बना रहे होते हैं। दिलजलों का कहना है कि नींद में भी सपने देखने के बजाय गहलोत अपने किसी न किसी विरोधी को निपटा रहे होते हैं।

अपनी चमक बचाकर निकलने में माहिर राठौड़
राजेंद्र राठौड़ भी कम नहीं हैं। यह तो वे ऐसी पार्टी में हैं, जिसे प्रदेश स्तरीय नेताओं को ऐबले घोड़ों से भी अधिक पछाड़ियां लगाकर रखने की आदत है। ऐसा नहीं होता या वे किसी और दल में होते तो वे अब तक कभी के मुख्यमंत्री बन चुके होते। यह उनकी ही ख़ूबी है कि वे अपने नेता की तनी हुई भृकुटी के सहारे भी अपने इरादों को पूरा करवा लेते हैं। उन पर आग में सनसनाते लोहे के कितने ही तपे घन बरसते रहें, वे शांति से अपनी चमक बचाकर निकलने में माहिर हैं और ऐसा उन्होंने एकाधिक बार साबित किया है। वे अपने साथ होने वाले हादसों और उस दौरान मिले घावों को रफ़ू करने और उसके निशान छुपाने में दक्ष हैं; लेकिन यह भी है कि राजनीति के नए तरु-शिखरों की ओर बढ़ाने वाली पगडंडियों का सही पता भी उनके पाँव जानते हैं।
बाकी है उम्मीदों के आसमान पर सितारे की चमक
रेतीले राजस्थान की राजनीति में वे कुशल राजनेता हैं, जो सदन में भले सत्तापक्ष में हों या प्रतिपक्ष में, अपनी कुशल रणनीतियों का लोहा मनवाते रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी में बहुत कम लोग बचे हैं, जो अब भी लोहिया जैसे समाजवादियों को याद करते हैं और जिनकी राजनीतिक यात्रा में शिशु से युवा बनने तक चंद्रशेखर जैसे नेता की छाया रही है। आशा की जानी चाहिए कि राजस्थान की राजनीतिक के इस मोड़ पर जब सियासी टीले तेजी से करवट बदल रहे हैं, तब उनकी अविचलित रहने वाली छवि किसी पथरीली पहाड़ी को निचोड़ ही लेगी और उनके लिए कोई नया आबशार फूट पड़ेगा।

