Rajasthan News: राजस्थान में भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) की सरकार ने सरकारी स्कूलों में तृतीय श्रेणी अध्यापक (Teachers) भर्ती के लिए 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व कर दी है और इस फैसले से युवकों में नाराजगी हैं, जबकि युवतियां बेहद खुश हैं। युवतियां भजनलाल शर्मा को बधाई दे रही हैं, उनका अभिनंदन कर रही हैं और 50 फीसदी आरक्षण (Reservation) का स्वागत कर रही हैं। महिलाओं के आरक्षण का ये फैसला सबको भा रहा है, खासकर बुद्धिजीवी वर्ग भी सरकार के समर्थन में खड़ा दिख रहा है। मामला आखिर नारी सशक्तिकरण का है, और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे से निकले सपनों को अब आगे की उड़ान मिल रही है। वैसे भी, बेटियां पढ़ लिख कर नौकरी करे, तो अच्छा ही है। हालांकि, इसके विरोध में कोई संगठित आंदोलन का स्वरूप अब तक तो कहीं देखने को नहीं मिला है, फिर भी पूरे प्रदेश में कहीं – कहीं और खास तौर पर सोशल मीडिया में लड़के इस फैसले के विरोध में भीतर ही भीतर सुलग रहे हैं। हालांकि, 50 फीसदी महिला आरक्षण के इस मामले में विसंगतियों की वजह से कुछ लोगों को भ्रम भी है, जिनको तत्काल दूर करने की कोशिश होनी चाहिए। बहरहाल, सरकार तटस्थ होकर हालात देख रही है और किसी अनहोनी के संयोग पर नजर रखे हुए है।
विश्लेषकों और चिंतकों की नजर में स्वागत योग्य फैसला
राजस्थान में भजनलाल शर्मा सरकार के 50 फीसदी आरक्षण के फैसले को राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार नारी सशक्तिकरण की दिशा में नई पहल के रूप में देखते हैं। परिहार कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर ‘मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है, वर्षों का अंधेरा रोशन हो रहा है…’ गीत बहुत तेजी से हर तरफ सुनाई दे रहा था, लेकिन राजस्थान की युवतियों के लिए अब जाकर असल में देश बदलता दिख रहा है और नौकरियों पर छाए वर्षों के अंधेरे में एक नई उम्मीद का उजाला दिख रहा है। परिहार तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में 50 फीसदी महिला आरक्षण के भजनलाल सरकार के इस फैसले को एक अभिनव सोच से भरा कदम मानते हैं। राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार और चिंतक त्रिभुवन महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने के राजस्थान सरकार के फैसले को वक्त की जरूरत बताते है। उनका कहना है कि न केवल तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में बल्कि सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण लागू करना चाहिए, ताकि नारी सशक्तिकरण की कोशिश केवल नारों तक ही नहीं बल्कि सचमुच पूरी हो सके। त्रिभुवन कहते हैं कि विधानसभाओं और संसद सहित मंत्रिमंडलों में भी महिलाओं की 50 फीसदी भागीदारी तय होनी चाहिए और उसके लिए भी यही बिल्कुल सही समय है। राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार दिनेश डांगी का कहना है कि महिलाओं को सशक्त बनाने की ये शानदार पहल है। थर्ड ग्रेड टीचर्स भर्ती में 50 फीसदी आरक्षण किए जाने के बाद अब राजस्थान सरकार ने पुलिस भर्ती में भी महिलाओं का आरक्षण बढ़ाया है। डांगी ने थर्ड ग्रेड टीचर्स भर्ती का विरोध कर रहे लोगों को सदबुद्धि देने की प्रार्थना के साथ कहा है कि नारी के त्याग को कभी नहीं भुलाया जा सकता, हम इस संसार में उसी की वजह से ही सब कुछ है।
फैसले के विरोध में कहीं कहीं मुखर भी हो रहे हैं लोग
फिलहाल राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्तियों में महिलाओं के लिए 30 फीसदी आरक्षण है, जिसे बढ़ाकर राजस्थान सरकार ने 50 फीसदी करने का फैसला किया है। विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जो वायदे किए थे, उसी के तहत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह फैसला किया जिससे अब तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्तियों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिलेगा। लेकिन एडवोकेट अंजली सैनी के सुर सरकार के विरोध में हैं। वे कहती है कि मैं एक महिला होकर भी इस फैसले का पूर्णतः विरोध करती हूं। एक ओर हम समानता कि बात करते हैं वहीं पुरुषों के साथ ऐसा अन्याय उचित नहीं। अंजली का सवाल है कि महिला वर्ग को मुख्य धारा में लाने के लिए पुरुष वर्ग का भविष्य अंधकार में कर दो, यह कैसा न्याय है। उनका कहना है कि लोकसभा में महिलाओं की एक तिहाई सीट आरक्षित हुई वहां 50 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं? सोशल मीडिया पर इस ममामले में जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा है। बोराजगार युवा अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

50 फीसदी आरक्षण पर सरकार के स्पष्टीकरण की जरूरत
राजस्थान के सरकारी स्कूलों पर नजर डाली जाए, तो उनमें पढ़नेवालों में बालिकाओं की संख्या 50 फीसदी के आसपास है, लेकिन स्कूली शिक्षा में वर्तमान में महिलाओं को मुकाबले पुरुष अध्यापक ज्यादा हैं। महिला शिक्षक महज 30-32 फीसदी ही हैं। राजस्थान सरकार के आंकड़ों पर नजर डालें तो मोटे तौर पर प्राथमिक शिक्षा में कुल स्वीकृत लगभग ढाई लाख शिक्षकों के पदों पर अभी केवल 1 लाख 95 हजार शिक्षक ही हैं, और उनमें भी केवल 30 फीसदी महिला अध्यापिकाएं हैं, जबकि 70 फीसदी पदों पर पुरुष हैं। राजस्थान में जब पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिल रहा है, तो तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती में 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व किए जाने पर बवाल क्यों है, यह समझने के लिए सबसे पहले आंकड़ों को समझना जरूरी है। जो लोग विरोध कर रहे हैं उनका कहना है कि 50 फीसदी आरक्षण के इस ताजा फैसले से पुरुष वर्ग के लिए केवल 14.5 फीसदी सीटें ही मिलेंगी। विरोध करनेवाले कह रहे हैं कि शत प्रतिशत भर्तियो में 12.5 फीसदी पद पहले ही एक्स सर्विसमेन के लिए आरक्षित है, 4 फीसदी विकलांग, 2 फीसदी खिलाड़ी, 7 फीसदी विधवा और तलाकशुदा महिला और 10 फीसदी वैसे भी जनरल सीटों पर महिला आरक्षण है, फिर 30 फीसदी से 50 फीसदी किए जाने को मिलाकर तो ये कुल 85.5 फीसदी आरक्षण हो जाता है, ऐसे में जनरल, ओबीसी, एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए तो केवल 14.5 फीसदी सीटें ही बचैंगी, जो कि न्याय संगत नहीं है। सरकार को इस पर तत्काल स्पष्टीकरण देने की जरूरत है।
-आकांक्षा कुमारी