Rajasthan Budget: राजस्थान सरकार साल 2026- 27 का बजट तैयार करने जा रही है। इस बार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) की सरकार ने बजट बनाने में जनता की राय लेने का भी फैसला किया है। बीजेपी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार के मुखिया के रूप में स्वयं भजनलाल शर्मा भी बजट (Budget) के संबंध में समाज के कई वर्गों, प्रतिनिधियों और संस्थाओं के साथ विचार विमर्श करेंगे। ‘जनसंवाद से जनकल्याण तक’ थीम के तहत इन विभिन्न संवादों के माध्यम से राजस्थान (Rajasthan) सरकार आगामी साल को अधिक विकासोन्मुख और सर्वसमावेशी बनाने वाला राजस्थान का बजट (Rajasthan Budget) तैयार करेगी। भजनलाल सरकार का बजट बनाने का यह अभिनव प्रयोग है। यह वही फार्मुला है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर खास तौर पर अपनाया जाता है। हालांकि, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का प्रशासनिक अनुभव केवल 2 साल का है, इसके बावजूद वे एक बेहतरीन और सधे हुए मुख्यमंत्री के रूप में राजस्थान की दशा और दिशा, दोनों बदलने की कोशिश कर रहे हैं। यही कारण है कि अल्प अनुभव के बावजूद वे एक बेहतर मुख्यमंत्री के रूप में उभरते दिखाई दे रहे हैं, जो राज्य के विकास को केवल घोषणाओं से नहीं बल्कि संवाद, सहमति और समावेश से आगे बढ़ाना चाहते हैं। जबकि विपक्ष के नेता टीकाराम जूली का कहना है कि यह बजट भी हर बार की तरह केवल औपचारिकता पूरी करने वाला बजट ही रहेगा।

बजट वही सफल, जो आख़िरी व्यक्ति का जीवन बदले
राजस्थान सरकार के बजट 2026 – 27 में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विकास विजन साफ झलक रहा है। ‘जनसंवाद से जनकल्याण तक’ उनका विशेष अभियान है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक निर्णय लेते हुए बजट निर्माण में जनता की राय को शामिल करने का फैसला किया है। इस जनसंवाद के माध्यम से सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है, ऐसा बजट बनाना जो विकासोन्मुख भी हो और सर्वसमावेशी भी, जिसमें हर क्षेत्र, हर वर्ग, और हर नागरिक की प्राथमिकताएं समाहित हों। इस बार के बजट में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विज़न केंद्र में रहेगा। इस पहल से सरकार को ज़मीनी समस्याओं की सीधी जानकारी मिलेगी, जैसे शिक्षा में गुणवत्ता सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, जल प्रबंधन, और निवेश को बढ़ावा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विजन यही है कि बजट वही सफल है जो आख़िरी पंक्ति के व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाए। यही जनभागीदारी इस बजट की सबसे बड़ी ताकत बनने जा रही है।
मोदी मॉडल की छाया, लेकिन भजनलाल की अपनी पहचान
सरकार चलाने, सत्ता में रहने तथा प्रसासनिक तौर पर कम अनुभव में भी स्पष्ट नेतृत्व और विकास का रोडमैप भजनलाल शर्मा ने तैयार किया है। बजट निर्माण में जनसंवाद की यह पद्धति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए गए सहभागी शासन मॉडल से प्रेरित है, जहां जनता की राय को नीतियों में शामिल करने की कोशिश की जाती है। लेकिन यह पहल केवल अनुकरण नहीं है, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इसे राजस्थान की आवश्यकताओं के अनुसार ढालकर लागू कर रहे हैं। उनका विजन स्पष्ट है कि राजस्थान को अगले वर्ष अधिक विकासोन्मुख और निवेशअनुकूल बनाना, साथ ही सामाजिक सुरक्षा, रोजगार, और बुनियादी सुविधाओं में व्यापक सुधार। बटच के लिए सरकार की जनता से सुझाव लेने की प्रक्रिया यह भी दर्शाती है कि मुख्यमंत्री योजनाओं को कागज़ी उपलब्धि नहीं बनाना चाहते, बल्कि परिणाम आधारित शासन की ओर बढ़ रहे हैं।

राष्ट्रीय मॉडल में राज्य की वास्तविकता का तालमेल
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विभिन्न वित्त विशेषज्ञों, सामाजिक वर्गों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों से बजट के विषय में विचार – विमर्श पर राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार कहते हैं कि राजस्थान सरकार इस बार का बजट की जो तैयारी कर रही है, उससे यह तो स्पष्ट है कि इस बार बजट की प्रक्रिया केवल सामान्य सरकारी औपचारिकता भर नहीं रहने वाली। परिहार कहते हैं कि यह प्रयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए गए ‘जनभागीदारी आधारित नीतिनिर्माण’ के अनुरूप भी है, जिसे मुख्यमंत्री शर्मा आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री का मनाना है कि किसान, युवा, महिला समूह, व्यापारी वर्ग, स्टार्टअप समुदाय, श्रमिक संगठन, शिक्षक, डॉक्टर, पंचायत प्रतिनिधि जैसे हर वर्ग के सुझाव बजट को अधिक संतुलित और व्यावहारिक बनाया जा रहा है। परिहार कहते हैं कि यही मुख्यमंत्री की राजनीतिक परिपक्वता है कि वे राष्ट्रीय मॉडल से दिशा लेते हुए राज्य की ज़मीनी वास्तविकता के साथ उसका सामंजस्य बैठा रहे हैं।
मुख्यमंत्री का विमर्श और ‘सर्वसमावेशी विकास’ लक्ष्य
भजनलाल शर्मा का प्रशासनिक मॉडल एक तरफा आदेश नहीं, बल्कि संवाद आधारित शासन की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई देता है। मुख्यमंत्री स्वयं समाज के कई वर्गों, प्रतिनिधियों और संस्थाओं के साथ बैठकर बजट पर चर्चा कर रहे हैं। यह परंपरागत राजनीति से अलग कामकाजी नेतृत्व का संकेत है, जहां मुख्यमंत्री एक निर्णयकर्ता के साथ – साथ सुनने वाले नेतृत्व के रूप में भी उभर रहे हैं। इन संवादों के माध्यम से सरकार को यह स्पष्ट दिशा मिलेगी कि कौन से क्षेत्र में त्वरित निवेश की आवश्यकता है और कौनसी योजनाएं पुनर्गठित करनी होंगी। यह सर्वसमावेशी बजट बनाने की प्रक्रिया है, जिसमें केवल शहर केंद्रित विकास नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, आदिवासी क्षेत्र, सीमावर्ती जिले, और पिछड़े क्षेत्रों की जरूरतें भी प्राथमिकता बनेंगी। मुख्यमंत्री का यह विजन विकास को एक वर्ग की उपलब्धि नहीं, बल्कि हर वर्ग की प्रगति बनाना है। यदि छात्र, व्यापारी, किसान, महिला, बुजुर्ग और युवा आदि हर व्यक्ति यह महसूस करे कि यह बजट मेरे लिए भी है, तब बजट की सफलता सिर्फ आंकड़ों में नहीं बल्कि संतोष और विश्वास में दिखाई देगी।

बजट में जन भागीदारी’ से नीतियों की विश्वसनीयता
राजस्थान के अगले बजट को जनआकांक्षाओं से जोड़ने के दृष्टिकोण के तहत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का सबसे बड़ा और सबसे उल्लेखनीय कदम यही है कि वे बजट को सिर्फ वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि जनआकांक्षाओं का संकल्प पत्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार संदीप सोनवलकर कहते हैं कि आमतौर पर बजट निर्माण विशेषज्ञों, अधिकारियों और विभागीय बैठकों तक सीमित रहता है, लेकिन इस बार सरकार ने निर्णय लिया कि जनता की राय को औपचारिक तौर पर सुना जाएगा। सोनवलकर के मुताबिक यह दृष्टिकोण लोकतंत्र की मूल भावना के अनुकूल है, क्योंकि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि लोगों की वास्तविक जरूरतों को समझकर संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण करना भी है। परिहार कहते हैं कि मुख्यमंत्री शर्मा का प्रशासनिक अनुभव भले ही केवल दो साल का हो, लेकिन उनका कार्यव्यवहार और निर्णय शैली यह संकेत देती है कि वे सीखते हुए नेतृत्व नहीं कर रहे, बल्कि निर्णय लेने वाले नेतृत्व के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।
भजनलाल सरकार की नीति – निर्माण की नई परंपरा
राजस्थान सरकार की जनसंवाद की यह प्रक्रिया बजट को अधिक लोकतांत्रिक, अधिक पारदर्शी और अधिक जवाबदेह बना रही है। लेकिन राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने आगामी बजट सत्र को लेकर राज्य सरकार पर कड़े प्रहार किए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार में अफसरशाही हावी है और जनता की कोई सुनवाई नहीं हो रही। जूली ने कहा कि इस सरकार पहले बजट में बढ़ा-चढ़ाकर घोषणाएं कर देती है और बाद में ‘फिजिबिलिटी नहीं है’ का हवाला देकर उन्हें निरस्त कर देती है। जबकि यह काम बजट बनाने से पहले होना चाहिए। विपक्ष के नेता का कहना है कि आगामी बजट भी महज एक औपचारिकता रहने वाला है। हालांकि, ज्यादातर जानकार मानते हैं कि इस बार नई तरह से बनने वाला राजस्थान का साल 2026 – 27 का बजट केवल कोई वित्तीय योजना नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की विकासदृष्टि और जनआकांक्षाओं के समन्वय का दस्तावेज बनने जा रहा है। जनता की राय, संस्थाओं से संवाद और समावेशी विकास का लक्ष्य, ये तीनों पहल इस बजट को नया स्वरूप देने जा रही हैं। निश्चित तौर पर यह प्रयोग सफल रहने वाला है, और यकीन मानिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपने अल्प प्रशासनिक अनुभव के बावजूद यह राजस्थान में नीति – निर्माण की नई परंपरा स्थापित कर रहे हैं, जहां जनता केवल सत्ता की लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास में भागीदार भी साबित होगी।
-आकांक्षा कुमारी
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